गंगा में अशोधित सीवेज गिरने से रोकने में नाकाम रहे यूपी समेत पांच राज्यों को एनजीटी ने फटकारा
- यूपी, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड को लगाई फटकार
- पांचों राज्यों को दिया 30 जून तक सभी प्रोजेक्ट पूरा करने का निर्देश
- उत्तराखंड को छोड़ कहीं भी नालों के लिए सीवेज ट्रीटमेंट शुरू नहीं हुआ
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंगा में अशोधित सीवरेज बहाने से रोकने में नाकाम रहने पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए सीवेज ट्रीटमेंट से संबंधित सभी प्रोजेक्ट अगले साल 30 जून तक पूरा करने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने कहा कि आदेश के बावजूद उत्तराखंड को छोड़कर किसी भी राज्य ने नालों के लिए सीवेज ट्रीटमेंट शुरू नहीं किया।
एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल को औद्योगिक अपशिष्ट गंगा और इसकी सहायक नदियों में गिरने से रोकने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में गंगा के पानी की गुणवत्ता को लेकर कोई जानकारी नहीं है। न ही फ्लड प्लेन जोन के नियमन की जानकारी है। उत्तराखंड को छोड़कर किसी भी राज्य ने नालों की संख्या, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और उनके डायवर्जन को लेकर कोई विवरण नहीं दिया है।
पीठ ने सीवेज ट्रीटमेंट से संबंधित सभी प्रोजेक्ट 30 जून, 2020 पूरा हो जाना चाहिए। इसके अनुपालन में विफल रहने पर जुर्माना देना होगा और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। तब तक गंगा में अशोधित सीवेज को गिरने से रोकने के लिए अंतरिम उपायों को अपनाना होगा।
यूपी को कानपुर के पास क्रोमियम डंप हटाने का निर्देश
इसके साथ ही एनजीटी ने यूपी सरकार को कानपुर के पास रानिया और कंचनपुर गांव से क्रोमियम डंप हटाने और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बायो डायवर्सिटी पार्क के लिए जल्द दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया है।