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प्रदूषण से नुकसान अन्य जघन्य अपराधों से होने वाले नुकसान से कम नहीं : एनजीटी

Mon, 08 Feb 2021 04:20 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 08 Feb 2021 04:20 AM IST
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NGT reprimanded UP government over pollution in Hindon river
हिंडन नदी - फोटो : facebook

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने हिंडन नदी में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाने पर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है। साथ ही कहा है कि प्रदूषण से होने वाला नुकसान अन्य जघन्य अपराधों से होने वाले नुकसान से कम नहीं है। 

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एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बार-बार आदेश देने का तब तक कोई मकसद नहीं है जब तक प्रशासन नागरिकों के प्रति सांविधानिक दायित्वों की जिम्मेदारी नहीं ले लेता है।
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पीठ ने कहा कि यह दुख की बात है कि प्रशासन में बैठे उच्चाधिकारियों को समस्या के बारे में अवगत कराने के बावजूद प्रदेश प्राधिकरण सुधारात्मक उपाय करने के अपने सांविधानिक दायित्वों को पूरा करने में नाकाम रहा। हमें उम्मीद थी कि मुख्य सचिव को शामिल करने से प्रक्रियात्मक और अंतर विभागीय समन्वय का मुद्दा सुलझ जाएगा लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। 
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पीठ ने कहा कि प्रक्रिया को लंबित रखने की बजाय हम यह मानते हैं कि यूपी के मुख्य सचिव को अतिशीघ्र आधार पर सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की जरूरत है।

साथ ही आवश्यक फंड उपलब्ध कराने और जरूरी मंजूरी प्रदान करने के जिम्मेदार अधिकारियों की दायित्व तय किया जाना चाहिए और अक्षम या नाकाम अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड में प्रविष्टि की जानी चाहिए।

एनजीटी ने यूपी के नदी जीर्णोद्धार समिति को हिंडन नदी के एक्शन प्लान के क्रियान्वयन पर निगरानी रखने का निर्देश दिया। साथ ही पूरे मामले पर मुख्य सचिव नजर रखेंगे। पीठ ने कहा कि विभिन्न मामले की स्थिति की समीक्षा के साथ ही मुख्य सचिव का मुख्य फोकस चल रहे कार्यों का समय पर पूरा कराने पर होना चाहिए। 

एक ही व्यक्ति के कई पद संभालने पर जताई चिंता
पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव सीईआईएए के सदस्य सचिव के साथ ही सरकार में विशेष सचिव भी हैं और इसके अलावा भी कई पदों पर हैं।


इस पर पीठ ने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि इतने सारे पदों पर तैनात व्यक्ति आखिर अपने काम से न्याय कैसे कर सकता है क्योंकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव का कार्य पूरा वक्त मांगता है। एनजीटी एनजीओ दोआब पर्यावरण समिति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

इसमें आरोप लगाया गया है कि काली नदी, कृष्णा और हिंडन नदियों में प्रदूषण से आसपास के इलाकों में बीमारी फैल रही है और लोग मर रहे हैं।

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