{"_id":"679f1735231b305da2085748","slug":"ngt-issues-notice-to-centre-on-use-of-invasive-fish-species-for-mosquito-control-2025-02-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"NGT: मच्छर नियंत्रण के लिए जल निकायों में छोड़ी जा रहीं आक्रामक मछलियां, एनजीटी ने केंद्र से मांग लिया जवाब","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
NGT: मच्छर नियंत्रण के लिए जल निकायों में छोड़ी जा रहीं आक्रामक मछलियां, एनजीटी ने केंद्र से मांग लिया जवाब
Sun, 02 Feb 2025 12:26 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 02 Feb 2025 12:26 PM IST
सार
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड देशों में तो मच्छर मछली पर बाकायदा प्रतिबंध भी है। याचिका के अनुसार, मच्छर मछली दुनिया की 100 सबसे खतरनाक मछली प्रजातियों में शामिल है।
विज्ञापन
एनजीटी
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मच्छरों को नियंत्रित करने के लिए जैविक एजेंट के रूप में आक्रामक और विदेशी प्रजाति की मछलियां भारत के तालाबों और नदियों में छोड़ी जा रही हैं। इसके खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर की गई है, जिस पर एनजीटी ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। याचिका में कहा गया है कि दो मछली प्रजातियां गंबूसिया एफिनिस (Mosquitofish) और पोसिलिया रेटिकुलाटा (Guppy)को विभिन्न राज्यों के जल निकायों में छोड़ा जा रहा है।
मछली की ये प्रजातियां जलीय पारिस्थितिकी के लिए खतरनाक
यह याचिका आक्रामक प्रजाति विशेषज्ञ ग्रुप ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं में कानून के छात्र यशवीर सिंह भी शामिल हैं। याचिका में कहा गया है कि इन दोनों मछली प्रजातियों को आक्रामक और विदेशी घोषित किया गया है और ये स्थानीय जलीय पारिस्थितिनकी तंत्र पर विपरीत असर डालती हैं। इससे स्थानीय मछली प्रजातियों के भोजन की कमी हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड देशों में तो मच्छर मछली पर बाकायदा प्रतिबंध भी है। याचिका के अनुसार, मच्छर मछली दुनिया की 100 सबसे खतरनाक मछली प्रजातियों में शामिल है। याचिका में कहा गया है कि मच्छर मछली को असम, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पंजाब और आंध्र प्रदेश के जल निकायों में छोड़ा गया है। वहीं महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब और ओडिशा में मछली की गप्पी प्रजाति को छोड़ा गया था।
6 मई को सुनवाई करेगा एनजीटी
याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने 24 जनवरी को दिए अपने आदेश में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस मामले में केंद्र सरकार की तरफ से केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र जवाब दाखिल करेंगे। एनजीटी इस मामले पर अगली सुनवाई 6 मई को करेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
मछली की ये प्रजातियां जलीय पारिस्थितिकी के लिए खतरनाक
यह याचिका आक्रामक प्रजाति विशेषज्ञ ग्रुप ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं में कानून के छात्र यशवीर सिंह भी शामिल हैं। याचिका में कहा गया है कि इन दोनों मछली प्रजातियों को आक्रामक और विदेशी घोषित किया गया है और ये स्थानीय जलीय पारिस्थितिनकी तंत्र पर विपरीत असर डालती हैं। इससे स्थानीय मछली प्रजातियों के भोजन की कमी हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड देशों में तो मच्छर मछली पर बाकायदा प्रतिबंध भी है। याचिका के अनुसार, मच्छर मछली दुनिया की 100 सबसे खतरनाक मछली प्रजातियों में शामिल है। याचिका में कहा गया है कि मच्छर मछली को असम, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पंजाब और आंध्र प्रदेश के जल निकायों में छोड़ा गया है। वहीं महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब और ओडिशा में मछली की गप्पी प्रजाति को छोड़ा गया था।
विज्ञापन
6 मई को सुनवाई करेगा एनजीटी
याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने 24 जनवरी को दिए अपने आदेश में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस मामले में केंद्र सरकार की तरफ से केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र जवाब दाखिल करेंगे। एनजीटी इस मामले पर अगली सुनवाई 6 मई को करेगा।
विज्ञापन