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एनजीटी ने देश भर में जैव चिकित्सा कचरा प्रबंधन केंद्रों को सीपीसीबी से मान्यता लेने का दिया निर्देश

Tue, 19 Jan 2021 03:58 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 19 Jan 2021 03:58 PM IST
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NGT directs the CPCB to ensure strict compliance of the Bio medical Waste Management Rules
एनजीटी - फोटो : सोशल मीडिया

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने मंगलवार को देश भर के सभी जैव चिकित्सा कचरा प्रबंधन केंद्रों को निर्देश दिया कि वे राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) से मान्यता हासिल करें। साथ ही इसने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से कहा कि वह जैव चिकित्सा कचरा प्रबंधन नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराए।

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एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि खतरनाक जैव चिकित्सा कचरा को सामान्य कचरे में नहीं मिलाया जाए। पीठ ने कहा कि सीपीसीबी को समय-समय पर अनुपालन स्थिति की समीक्षा करने की जरूरत है, कम से कम हर तीन महीने पर एक बार और वह प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर निर्देश जारी करे।
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अधिकरण ने कहा कि जैव कचरा प्रबंधन नियमों का उल्लंघन करने के लिए 130 स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों पर लगाए गए 7.17 करोड़ रुपये और छह सामान्य जैव चिकित्सा कचरा शोधन केंद्रों पर लगाए गए 85 लाख रुपये का पर्यावरण जुर्माना वसूला जाए।
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पीठ ने कहा, ‘‘सीपीसीबी सुनिश्चित कर सकता है कि कचरे का केवल अधिकृत एजेंसी के माध्यम से निस्तारण किया जाए। अनधिकृत पुनर्चक्रमण करने वाले द्वारा चोरी नहीं हो। पर्याप्त संख्या में सामान्य जैव चिकित्सा केंद्रों का निर्माण किया जाए। अधिकरण ने कहा कि सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिव हर तीन महीने पर कम से कम एक बार अनुपालन की निगरानी करें। 

अधिकरण ने कहा कि मुख्य सचिव सुनिश्चत कर सकते हैं कि उनके अधिकार क्षेत्र में हर स्वास्थ्य देखभाल केंद्र मान्यता हासिल करें और नियमों का पालन करें।

तेलंगाना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी सख्त निर्देश

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने तेलंगाना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) को आदेश दिया है कि वह राज्य में प्रदूषण फैलाने वाली दवा कंपनियों से जुर्माने के तौर पर 1.55 करोड़ रुपये वसूल करे। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य पीसीबी से कहा कि वह कंपनियों से यह राशि वसूले और भुगतान नहीं करने वाली कंपनियों को बंद करने समेत उनके खिलाफ बलपूर्वक कार्रवाई करे।

एक समिति ने सभी दवा निर्माता कंपनियों पर एक साल और श्री कार्तिकेय फार्मा पर छह माह के लिए पर्यावरणीय मुआवजा लागू करने की सिफारिश की थी, जिसके बाद एनजीटी ने यह आदेश पारित किया।  पीठ ने कहा कि यह औद्योगिक क्षेत्र प्रदूषित है और ये उद्योग ‘रेड श्रेणी’ के उद्योगों में आते हैं। ऐसे में, पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कड़ी निगरानी की आवश्यकता है। 

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