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NGT ने गंगा के दोनों ओर 100 मी. के दायरे को किया नो डेवलपमेंट जोन घोषित

Fri, 14 Jul 2017 07:06 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, ऋषिकेश
ब्यूरो/ अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Fri, 14 Jul 2017 07:06 AM IST
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NGT declare no-development Zone within 100m of Ganga on both sides
ganga - फोटो : amarujala

तीर्थनगरी में गंगा के दोनों तटों पर नेशनल ग्रीन ट्रब्यूनल (एनजीटी) की ओर से 100 मीटर की परिधि को नो डेवलपमेंट जोन घोषित किया गया है, लेकिन ऋषिकेश में ठीक इसके उलट हो रहा है। नगर क्षेत्र में कई निर्माण कार्य गंगा की तलहटी और सौ मीटर के प्रतिबंधित दायरे में बेरोकटोक जारी हैं। नदी के प्रतिबंधित दायरे में लगातार हो रहे निर्माण कार्य से गंगा मैली हो रही है। साथ ही एनजीटी ने गंगा नदी में कूड़ा- कचरा फेंकने पर 50 हजार के जुर्माने का प्रावधान कर दिया है।

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गंगा की प्रतिबंधित परिधि में किसी भी तरह के निर्माण कार्य को रोकने की जिम्मेदार हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) को सौंपी गई है। जोकि 100 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य नहीं रोक पा रहा है। प्राधिकरण की अनदेखी से ही क्षेत्र में बिना नक्शा पास किए मंजूरी के नदी के प्रतिबंधित क्षेत्र में धड़ल्ले से निर्माण कार्य जारी हैं। इतना ही नहीं क्षेत्र में नदी के करीब किसी भी तरह के निर्माण के लिए सिंचाई विभाग से एनओसी लेने पर ही मानचित्र की मंजूरी का प्रावधान है, मगर एचआरडीए इस मामले में विभागीय एनओसी की भी अनदेखी कर रहा है। 
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प्रतिबंध के 17 साल में हो गए सैकड़ों निर्माण 
गंगा के दो सौ मीटर की परिधि में एनजीटी से पूर्व निर्माण कार्य को लेकर हाईकोर्ट नैनीताल द्वारा वर्ष 2000 से रोक लगाई गई है। वर्ष 2000 में ही राज्य सरकार द्वारा बाकायदा इसी मामले में शासनादेश जारी किया गया है। इतना ही नहीं वर्ष 2015 में एनजीटी की ओर से भी गंगा के 100 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया, मगर यह सारे आदेश तीर्थनगरी में लागू ही नहीं हो रहे हैं। तीर्थनगरी में गंगा के प्रतिबंधित दायरे में लगातार हो रहे निर्माण कार्य इसकी तस्दीक करते हैं। 
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क्या कहते हैं स्थानीय नागरिक 
सामाजिक कार्यकर्ता भगवती प्रसाद भट्ट, डा. नारायण सिंह रावत, देवेंद्र पयाल, सुनील अरोड़ा आदि ने एनजीटी द्वारा गंगा के दोनों ओर सौ मीटर के दायरे को नो डेवलपमेंट जोन घोषित किए जाने के निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस प्रतिबंध का धरातल पर भी कड़ाई से पालन होना चाहिए। 

होटलों, आश्रमों के मैले की निकासी गंगा में 

NGT declare no-development Zone within 100m of Ganga on both sides
गंगा से 100 मीटर की दूरी को नो डेवलपमेंट जोन घोषित किए जाने के बावजूद हरिद्वार विकास प्राधिकरण निर्माण कार्य को छूट तो दे ही रहा है, जो लोग निर्माण कार्य करा रहे हैं उन्हें गंगा को प्रदूषित करने की भी मनाही नहीं है। तपोवन, लक्ष्मणझूला और आसपास के इलाकों में नदी तटों पर कई होटल, लॉज, आश्रम ऐसे भी हैं जिनका दूषित अवजल प्लास्टिक के पाइपों के जरिए आसपास के नालों के जरिए सीधे गंगा में गिर रहा है। 
 
कोट्स
एनजीटी द्वारा दिए गए ताजे आदेश की जानकारी नहीं है। फिर भी यदि कोई निर्माण कार्य गंगा के सौ मीटर के दायरे में हो रहे हैं, तो उनकी पड़ताल कराई जाएगी। उसके बाद नियमानुसार उनके खिलाफ सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। 
हर गिरि, उपसचिव एनआरडीए/एसडीएम ऋषिकेश


एनजीटी ने गंगा पर 32 साल बाद ऐतिहासिक फैसला सुनाया है:-

- गंगा के दोनों किनारे सौ मीटर का दायरा नो डेवलपमेंट जोन होगा- निर्माण नहीं
- टेनरी व अन्य इकाइयां यदि गंगा में केमिकल बहाती हैं तो 1 लाख जुर्माना
-गंगा में कूड़ा-कचरा फेंकने पर 50 हजार जुर्माना
- गंगा का न्यूनत्तम प्रवाह बनाए रखने का आदेश
- टेनरियां छह हफ्ते में हटाने के आदेश
- यूपी-उत्तराखंड पर धार्मिक गतिविधियां नियंत्रित करने को गाइडलाइन बनाने के आदेश
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