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सीआरपीएफ: न्यूटन फिल्म में बल को दागदार करने का प्रयास हुआ, आज निष्पक्ष चुनाव के लिए इसी पर सबसे ज्यादा भरोसा
Fri, 19 Mar 2021 06:44 PM IST
Harendra Chaudhary
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 19 Mar 2021 06:44 PM IST
सार
सान्याल बताते हैं, आज कहीं पर निष्पक्ष एवं शांतिपूर्वक चुनाव कराने की बात होती है, तो सबसे पहला नाम 'सीआरपीएफ' का आता है। जब यह बल चुनावी ड्यूटी पर पहुंचता है, तो लोगों को यह भरोसा रहता है कि अब वे बिना किसी भय के अपना वोट डाल सकेंगे...
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न्यूटन फिल्म का एक दृश्य और सीआरपीएफ के पूर्व एसआई तमाल सान्याल
- फोटो : For Refernce Only
विस्तार
आपको ध्यान होगा कि 2017 में सीआरपीएफ और चुनावी प्रक्रिया पर बनी फिल्म 'न्यूटन' रिलीज हुई थी। इसके निर्माता पर यह आरोप लगा था कि उन्होंने इस फिल्म में 'सीआरपीएफ' को दागदार करने का प्रयास किया है। बल के पूर्व उप निरीक्षक तमाल सान्याल के मन को इस फिल्म ने काफी ठेस पहुंचाई। वे इस फिल्म के खिलाफ अदालत में पहुंच गए। सितंबर 2019 में दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने मानहानि के केस में न्यूटन फिल्म के निर्माता मनीष मुंद्रा और सेंसर बोर्ड (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) को नोटिस जारी किया था।
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सान्याल बताते हैं, आज कहीं पर निष्पक्ष एवं शांतिपूर्वक चुनाव कराने की बात होती है, तो सबसे पहला नाम 'सीआरपीएफ' का आता है। विभिन्न राज्य सरकारों के द्वारा इस बल की तैनाती की मांग की जाती है। जब यह बल चुनावी ड्यूटी पर पहुंचता है, तो लोगों को यह भरोसा रहता है कि अब वे बिना किसी भय के अपना वोट डाल सकेंगे।
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मौजूदा समय में देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' को पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में हो रहे चुनावों के लिए ड्यूटी पर भेजा गया है। पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान के लिए सीआरपीएफ सहित दूसरे बलों को मिलाकर 725 कंपनी तैनात की जा रही हैं। तमाल सान्याल के मुताबिक, न्यूटन फिल्म ने इस बल की छवि खराब की है।
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इसमें दिखाया गया था कि छत्तीसगढ़ के किसी दूरवर्ती इलाके में मौजूद सीआरपीएफ अधिकारी पोलिंग पार्टी से कहते हैं कि सब यहीं बैठे बिठाए हो जाएगा। कहीं बूथ पर जाने की जरूरत नहीं है। यहां के लोगों को चुनाव से कोई मतलब नहीं है। उनके वोट हम ही ले लेंगे। इतने में डीआईजी का फोन आता है कि मीडिया टीम वहां पहुंच रही है। तुरंत माहौल बदल जाता है।
फिल्म में दिखाया गया है कि बल के जवान लोगों को भेड़-बकरियों की तरह पोलिंग बूथ पर ले आते हैं। उनके मुर्गे आदि भी सुरक्षा बल अपने साथ उठा लाते हैं। इतना ही नहीं, जब पोलिंग अधिकारी ने कहा कि वह चाहते हैं कि लोग बिना किसी डर के मतदान करें तो बल अधिकारी बोले, ईवीएम से सब कुछ यहीं पर हो जाएगा। फिल्म में दिखाया गया कि जैसे सीआरपीएफ को वोटिंग से कोई मतलब नहीं है। यह बल लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास नहीं रखता।
जब मीडिया कर्मी वापस चले गए तो 12 बजे बल अधिकारी बोले, अब सब ठीक हो गया है, चलो निकलो। पोलिंग अफसर नहीं माना। वह बोला, तीन बजे तक मतदान होगा। सीआरपीएफ की छवि खराब करने के मकसद से फिल्म में दिखाया गया कि वहां बल के अधिकारी, फर्जी नक्सली हमला कराते हैं। बाद में पोलिंग अफसर के सामने वह पोल भी खुल जाती है।
सान्याल कहते हैं, चुनाव में आज इसी बल पर सर्वाधिक भरोसा किया जाता है। कहीं पर दंगा हो रहा तो सीआरपीएफ बुलाई जाती है। विभिन्न इलाकों में इस बल ने सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत जो सराहनीय कार्य किया है, उसकी प्रशंसा सरकार में बड़े स्तर पर होती है। फिल्म निर्माता ने स्वीकार किया था कि अमेजन प्राइम ने डिस्क्लेमर नहीं लगाया था।
सिनेमा हाल में भी डिस्क्लेमर नहीं लगा था। बाद में लगा दिया गया है कि यह फिल्म काल्पनिक घटना पर आधारित है। हालांकि इस बाबत कोर्ट में शपथ पत्र दिया जाना है। सान्याल ने अमेजन प्राइम को पार्टी बनाने के लिए कोर्ट में एप्लीकेशन दी है। फिल्म निर्माता को अदालत में शपथ पत्र देकर यह बताना होगा कि फिल्म में पहले डिस्क्लेमर नहीं लगा था, अब लगा दिया गया है।
सीआरपीएफ के पूर्व एसआई सान्याल के अनुसार, जहां भी यह बल चुनावी ड्यूटी के लिए भेजा जाता है, वहां लोगों में आत्मविश्वास पनपता है। वे सोचते हैं कि अब असामाजिक तत्व चुनाव में गड़बड़ी नहीं कर सकेंगे। लोगों को भरोसा रहता है कि वे बिना किसी भय के मतदान कर सकते हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने सीमावर्ती और दूरवर्ती इलाकों में लोगों तक विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं पहुंचाने के लिए सीआरपीएफ एवं दूसरे अर्धसैनिक बलों को एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
डीजी कुलदीप सिंह ने शुक्रवार को बल की 82वीं वर्षगांठ पर कहा, यह बल साहस और व्यावसायिक कुशलता के साथ राष्ट्र की सेवा करने के लिए पुन: प्रबल उर्जस्विता और प्रतिबद्धता के साथ तत्पर है, जो सदैव इसकी पहचान रही है। सीआरपीएफ, विद्यमान और आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी परिचालनिक रणनीति एवं प्रौद्योगिकियों को उन्नत करना जारी रखेगा। आगामी राज्य विधानसभा चुनावों में स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से मतदान कराने के लिए बल की टुकड़ियां भेजी जा रही हैं।