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#ShaheedDiwas चोरी-छिपे आया था भगत सिंह को फांसी की खबर देने वाला अखबार
दीपक शर्मा/अलीगढ़।
Updated Thu, 23 Mar 2017 10:35 AM IST
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भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव
करीब आठ दशक पहले भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में एक अहम पड़ाव शहीद ए आजम भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी दिए जाने पर आया। अलीगढ़ इस ऐतिहासिक घटना की स्मृतियों का मुहाफिज (सहेजने वाला रक्षक) है।
सन 1931 में अलीगढ़ के खैर के गांव वीरपुरा के रहने वाले स्वतंत्रता सेनानी श्याम बिहारी लाल इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाले अखबार ‘भविष्य’ की उन प्रतियों का एक बंडल किसी तरह अंग्रेजों से बचाकर ले अलीगढ़ ले आए। इसी अखबार से अलीगढ़ के लोगों ने जाना कि भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी किस अंदाज में दी गई होगी। 2005 में श्याम बिहारी लाल के निधन के बाद उनके बेटे निरंजन लाल इस अखबार की प्रतियां आज भी सुरक्षित रखे हैं। इंडस्ट्रियल एस्टेट में रहने वाले निरंजन लाल के लिए वह उनकी सबसे बड़ी संपदा है।
इस अखबार की खबरों से पता चलता है कि अंग्रेजी हुकूमत भगत सिंह की फांसी की सजा और उसके बाद बन रहे घटनाक्रम को दबा कर रखना चाहती थी। इसीलिए अंग्रेजों ने अखबारों पर इमरजेंसी लगा दी थी।
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सन 1931 में अलीगढ़ के खैर के गांव वीरपुरा के रहने वाले स्वतंत्रता सेनानी श्याम बिहारी लाल इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाले अखबार ‘भविष्य’ की उन प्रतियों का एक बंडल किसी तरह अंग्रेजों से बचाकर ले अलीगढ़ ले आए। इसी अखबार से अलीगढ़ के लोगों ने जाना कि भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी किस अंदाज में दी गई होगी। 2005 में श्याम बिहारी लाल के निधन के बाद उनके बेटे निरंजन लाल इस अखबार की प्रतियां आज भी सुरक्षित रखे हैं। इंडस्ट्रियल एस्टेट में रहने वाले निरंजन लाल के लिए वह उनकी सबसे बड़ी संपदा है।
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इस अखबार की खबरों से पता चलता है कि अंग्रेजी हुकूमत भगत सिंह की फांसी की सजा और उसके बाद बन रहे घटनाक्रम को दबा कर रखना चाहती थी। इसीलिए अंग्रेजों ने अखबारों पर इमरजेंसी लगा दी थी।
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अखबार में कुछ यूं छपी थी शहीद भगत सिंह की फांसी की ख़बर
Execution News Paper File Photo
- फोटो : The Tribune
‘भविष्य’ में छपी खबरों पर नजर
- पंजाब के तीनों विप्लववादी फांसी पर लटका दिए गए
- लाहौर में सनसनी, शहर भर में पुलिस, फौज और हवाई जहाजों का पहरा
- 50 हजार स्त्री पुरुषों का रोमांचकारी करुण क्रंदन
- कुटंबियों से अंतिम मुलाकात नहीं हो सकी
गांव में करते थे बम का परीक्षण
अलीगढ़। गांव शादीपुर में स्वतंत्रता सेनानी हरी शंकर आजाद भगत सिंह के संपर्क में आए और बम बनाने की विधि जानी। जब बम तैयार हुआ तो भगत सिंह के साथ गांव के बाहर परीक्षण के लिए गए। धमाके की तेज आवाज से बालक हरीशंकर थोड़ा सहम गए। उस समय तक वे यह नहीं जानते थे कि बम बनाने वाले महान क्रांतिकारी भगत सिंह हैं। कुछ दिनों बाद जब फांसी हुई तो हरीशंकर आजाद को पता लगा कि वह भगत सिंह थे।
- पंजाब के तीनों विप्लववादी फांसी पर लटका दिए गए
- लाहौर में सनसनी, शहर भर में पुलिस, फौज और हवाई जहाजों का पहरा
- 50 हजार स्त्री पुरुषों का रोमांचकारी करुण क्रंदन
- कुटंबियों से अंतिम मुलाकात नहीं हो सकी
गांव में करते थे बम का परीक्षण
अलीगढ़। गांव शादीपुर में स्वतंत्रता सेनानी हरी शंकर आजाद भगत सिंह के संपर्क में आए और बम बनाने की विधि जानी। जब बम तैयार हुआ तो भगत सिंह के साथ गांव के बाहर परीक्षण के लिए गए। धमाके की तेज आवाज से बालक हरीशंकर थोड़ा सहम गए। उस समय तक वे यह नहीं जानते थे कि बम बनाने वाले महान क्रांतिकारी भगत सिंह हैं। कुछ दिनों बाद जब फांसी हुई तो हरीशंकर आजाद को पता लगा कि वह भगत सिंह थे।