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Updates: पश्चिम बंगाल में बिजली गिरने से 13 लोगों की मौत; वित्त मंत्री सीतारमण ने कर अधिकारियों को दी नसीहत

Thu, 24 Jul 2025 09:33 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिव शुक्ला Updated Thu, 24 Jul 2025 09:33 AM IST
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आज की बड़ी खबरें। - फोटो : अमर उजाला

मणिपुर पुलिस और सुरक्षा बलों ने बीते तीन दिनों में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य के चार जिलों – इम्फाल वेस्ट, बिष्णुपुर, तेंगनौपाल और चंदेल से कुल आठ उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से जुड़े हैं और जबरन वसूली जैसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे। पुलिस के अनुसार, बुधवार को इम्फाल वेस्ट के टाकयेल खोंगबाल और खुयाथोंग इलाके से कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (तैबंगनबा) के दो कैडर पकड़े गए।

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वहीं, मंगलवार को तेंगनौपाल जिले के जंगल से पीआरईपीएके और पीएलए के एक-एक उग्रवादी को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा, इम्फाल वेस्ट के तबुंगखोक ब्रिक फील्ड से पीआरईपीएके-पीआरओ का एक सदस्य पकड़ा गया, जबकि बिष्णुपुर जिले से केसीपी (एमसी) का एक उग्रवादी गिरफ्तार हुआ। सोमवार को सुगनू-चंदेल रोड पर यूनाइटेड कुकी नेशनल आर्मी का एक कैडर और बुधवार को केसीपी (पीडब्ल्यूजी) का सदस्य भी गिरफ्तार किया गया।
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पश्चिम बंगाल के दो जिलों में बिजली गिरने से 13 की मौत
पश्चिम बंगाल के बांकुरा और पूर्व बर्द्धमान जिलों में गुरुवार को बिजली गिरने की घटनाओं में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बांकुरा के पुलिस अधीक्षक वैभव तिवारी ने कहा कि जिले के विभिन्न हिस्सों में आंधी-तूफान के दौरान बिजली गिरने से आठ लोगों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि ओण्डा में चार, कोतुलपुर, जयपुर, पत्रसयेर और इंदास थाना क्षेत्रों में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। एक आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया, पूर्व बर्द्धमान जिले में बिजली गिरने से पांच लोगों की मौत हुई और चार अन्य घायल हुए। उन्होंने कहा कि माढ़बिधी में दो, आउसग्राम, मंगलकोट और रैना थाना क्षेत्रों में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। घायलों का उपचार स्थानीय अस्पतालों में चल रहा है।
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कर अधिकारियों से बोलीं वित्त मंत्री- करदाताओं काभरोसा हासिल करें
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को आयकर अधिकारियों से कहा कि नीतियों के समय पर क्रियान्वयन में अपने मानक ऊंचे रखें और अपने आचरण के माध्यम से करदाताओं का भरोसा हासिल करें। उन्होंने अधिकारियों की सराहना की कि उन्होंने नई तकनीकों को अपनाया और केवल छह महीने में नया आयकर बिल तैयार किया। सीतारमण ने अधिकारियों से ओजीई (ऑर्डर गिविंग इफेक्ट) बैकलॉग को जल्द से जल्द निपटाने का आग्रह किया। ओजीई वह आदेश है जिसे आयकर अधिकारी को उस स्थिति में पारित करना होता है, जब एक करदाता, विभाग के खिलाफ मामले में जीतता है।

बंगलूरू दंगा मामले में तीन आरोपियों को 7 साल की सजा
2020 के बंगलूरू दंगों के मामले में एक विशेष एनआईए अदालत ने आरोप-निर्धारण के दौरान दोषी ठहराए गए तीन आरोपियों को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला राष्ट्रीय जांच एजेंसी के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है, जो ऐसी हिंसक घटनाओं के पीछे की बड़ी साजिश की जांच कर रही है। दोषियों सैयद इकरामुद्दीन उर्फ सैयद नवीद (44), सैयद आसिफ (46) और मोहम्मद आतिफ (26) पर भारतीय दंड संहिता, कर्नाटक संपत्ति विनाश और क्षति निवारण अधिनियम (केपीडीएलपी) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत कई आरोप लगाए गए थे।

यह मामला 11 अगस्त, 2020 को भड़की भीड़ की हिंसा से उपजा है, जिसमें पुलकेशीनगर के विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के आवास और शहर के केजी हल्ली और डीजे हल्ली पुलिस स्टेशनों को निशाना बनाया गया था। विधायक के भतीजे के कथित तौर पर अपलोड किए गए एक भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट के बाद हुई हिंसा में पुलिस की गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई थी और पूरे इलाके में व्यापक नुकसान हुआ। एनआईए की जांच में पहले आरोपियों और अब प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और उसकी राजनीतिक शाखा, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के बीच संबंधों का खुलासा हुआ था।

कर्नाटक में 10 कुत्तों ने गर्भवती महिला और बच्चे को घायल किया
कर्नाटक के तुमकुर शहर के अंतर्गत भागीरथ नगर में मंगलवार देर रात कुत्तों ने गर्भवती महिला और उसके पांच वर्ष के बेटे पर हमला कर दिया। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। दोपहिया वाहन पर सवार आठ महीने की गर्भवती काव्या और उनके बेटे समित पर 10 से अधिक कुत्तों ने हमला किया। इस कारण वे वाहन से नियंत्रण खो बैठे और गिर गए। मां-बेटे के सिर, चेहरे, घुटनों और पैरों में गंभीर चोटें आईं। घटना तुमकुर ग्रामीण पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में हुई।

मेघालय में असंगठित मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर ₹541 प्रतिदिन की गई 
मेघालय सरकार ने असंगठित श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी में इजाफा करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। नए नियम के तहत अब अप्रशिक्षित (अनस्किल्ड) मजदूरों को ₹541 प्रतिदिन मिलेंगे। यह दर 1 अप्रैल 2025 से लागू होगी। श्रम विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह नई मजदूरी दर वैरिएबल डिअरनेस अलाउंस (वीडीए) सहित होगी। नई दरों के तहत अर्ध-कुशल मजदूरों को ₹583, कुशल मजदूरों को ₹624 और अति-कुशल मजदूरों को ₹665 प्रतिदिन मिलेंगे। पहले यह मजदूरी ₹525, ₹565, ₹605 और ₹645 थी। नई दरों में ₹16 से ₹20 तक की बढ़ोतरी की गई है। ये दरें राज्य के 29 नियोजित क्षेत्रों जैसे कृषि, निर्माण, खनन, घरेलू काम, फैक्ट्रियों और सरकारी आकस्मिक रोजगारों पर लागू होंगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये दरें वीडीए सहित हैं, लेकिन इसमें अन्य लाभ शामिल नहीं हैं।

गोवा विधानसभा में नया विधेयक पारित, अब भूमि विवादों की सुनवाई के लिए कोर्ट की सीमा होगी तय
गोवा विधानसभा ने बुधवार को ‘गोवा सूट वैल्यूएशन विधेयक 2025’ पारित किया, जिसका उद्देश्य भूमि से जुड़े दीवानी मामलों में कोर्ट की अधिकारिता तय करने के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया को आसान और स्पष्ट बनाना है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बताया कि यह विधेयक हाल ही में लागू हुए गोवा कोर्ट फीस एक्ट, 2024 के अनुरूप है और 1965 के पुराने कानून को बदल देगा। इस विधेयक के तहत राज्य सरकार हाईकोर्ट से परामर्श लेकर विभिन्न क्षेत्रों में भूमि की वैल्यू तय करने के लिए नियम बना सकेगी। इससे न्यायालय की फीस और क्षेत्राधिकार को लेकर विवाद और भ्रम में कमी आएगी। विधेयक के अनुसार, कुछ मामलों में कोर्ट फीस और क्षेत्राधिकार का मूल्य एक समान होगा, और तकनीकी आपत्तियों पर अनावश्यक अपील से बचा जा सकेगा। हाईकोर्ट को जटिल मामलों के लिए कल्पित मूल्य तय करने का अधिकार भी मिलेगा।
 

असम की कार्रवाई के बाद अलर्ट मोड पर मेघालय, अवैध प्रवासियों की एंट्री रोकने के निर्देश
मेघालय सरकार ने अवैध प्रवासियों की संभावित घुसपैठ को रोकने के लिए राज्य के सभी उपायुक्तों को सतर्क रहने और ज़रूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। यह कदम असम सरकार द्वारा चलाए जा रहे बेदखली अभियानों के चलते उठाया गया है, जिसमें कई लोग बेघर हुए हैं। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शकील पी अहमद द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि सीमावर्ती संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाए और पुलिस तथा सीमा सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर अवैध प्रवेश को रोका जाए। असम के बारपेटा, लखीमपुर, होजाई और नगांव जिलों में सरकारी और वन भूमि पर कथित अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है। इस बीच, बीएसएफ ने भी अंतर-राज्यीय सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है और हाल में कई बांग्लादेशी नागरिकों को बिना वैध दस्तावेजों के पकड़ा है।
 

'आधिकारिक जानकारी नहीं मिली',  एसआईटी से सौम्या लता के हटने पर बोले कर्नाटक गृहमंत्री परमेश्वर
धर्मस्थल सामूहिक दफन मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) से  भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की अधिकारी सौम्या लता के हटने को लेकर कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वर ने गुरुवार को कहा कि उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन अनौपचारिक रूप से सूचना मिली है।

मंत्री परमेश्वर ने कहा, मुझे इस बारे में आधिकारिक रूप से कुछ नहीं बताया गया है। हालांकि, अनौपचारिक तौर पर मुझे पता चला है कि उन्होंने एक पत्र लिखा है, जिसमें एसआईटी से हटने की बात कही गई है। उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है और अनौपचारिक रूप से इस फैसले की जानकारी दी है। उनकी जगह किसी और को नियुक्त किया जाएगा। 

रविवार को धर्मस्थल पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के एक गांव में कई शवों को गुप्त रूप से ठिकाने लगाने का आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ता एक पूर्व सफाईकर्मी है, जो पहले धर्मस्थल मंदिर में काम करता था और अब उसे पछतावा है। सुरक्षा कारणों से उसकी पहचान गोपनीय रखी गई है। उसने कहा है कि अगर उसे और उसके परिवार को कानूनी सुरक्षा दी जाए तो वह पूरी जानकारी देने को तैयार है।

पुलिस अधीक्षक (एसपी) के कार्यालय में दर्ज की गई इस शिकायत में व्यक्ति ने दावा किया है कि धमकी देकर उसे कई शवों को ठिकाने लगाने के काम में शामिल किया गया। गंभीर अपराधबोध से परेशान होकर अब उसने सामने आकर उन लोगों की पहचान बताने की इच्छा जताई है जो इसमें शामिल थे, और यह भी बताया कि शवों को कहां-कहां दफनाया गया।

बंगाल: मिथुन ने ममता के प्रवासी श्रमिकों पर दिए बयान को बताया गलत
भाजपा नेता और अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस दावे को खारिज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अन्य राज्यों में बंगाली बोलने वाले प्रवासी मजदूरों को परेशान किया जा रहा है। मिथुन ने ममता के इस बयान को बेबुनियाद बताया और उन पर आरोप लगाया कि वह 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ के लिए डर का माहौल बना रही हैं।

मिथुन चक्रवर्ती ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेतृत्व चुनाव आयोग (ईसी) की चल रही मतदाता सूची की विशेष जांच (एसआईआर) को लेकर घबरा गया है, क्योंकि उन्हें डर है कि वे अपने अवैध वोट बैंक पर नियंत्रण खो देंगे। उन्होंने कहा कि तृणमूल नेता जानते हैं कि जब घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे, तो 2026 में 294 में से 70 सीटें भी जीतना उनके लिए मुश्किल होगा। इसलिए वे घबरा रहे हैं और इसलिए चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं।  
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