फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   New technology for decomposing straw to be used for stubble burning in Delhi and other states

प्रदूषण से निपटने के लिए पराली को खेत में ही खाद में बदलने की तकनीक का होगा इस्तेमाल : जावड़ेकर

Thu, 01 Oct 2020 04:11 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 01 Oct 2020 04:11 PM IST
विज्ञापन
New technology for decomposing straw to be used for stubble burning in Delhi and other states
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

हर साल पराली जलने से प्रदूषण की समस्या झेलने वाली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके पड़ोसी राज्य हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में इस समस्या से निपटने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यह बात केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरुवार को कही। जावड़ेकर ने कहा कि इस साल पूसा एग्रीकल्चरल इंस्टीट्यूट की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा जिससे पराली खेतों में ही खाद में बदल जाएगी।  

विज्ञापन


जावड़ेकर दिल्ली और अन्य चारों राज्यों के पर्यावरण मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक करने के बाद मीडिया को संबोधित कर रहे थे। इस बैठक में जावड़ेकर ने राज्यों द्वारा पराली जलाने से पहले के निवारक उपाय करने और इसके लिए उनकी तैयारियों का जायजा लिया। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा कि पिछले तीन साल में पराली जलने में कमी देखी गई है लेकिन इस मुद्दे से पूरी तरह निपटने के लिए और भी कदम उठाए जाने जरूरी हैं।
विज्ञापन



इस बैठक में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, डीडीए और एनडीएमसी के अधिकारी भी मौजूद थे। जावड़ेकर ने बैठक के दौरान कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पहले ही छह बैठकें आयोजित हो चुकी हैं और केंद्र सरकार ने इसे लेकर कई कदम उठाए हैं। एक घंटे से अधिक समय तक चली इस बैठक में जावड़ेकर ने कहा कि दिल्ली से इसके 13 प्रदूषण हॉटस्पॉट पर ध्यान देने के लिए कहा गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


पूसा की तकनीक पर काम करेगी दिल्ली सरकार
इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को कहा था कि उनकी सरकार खेतों में पराली जलाने की जरूरत को कम करने के लिए पूसा संस्थान की तकनीक का इस्तेमाल करेगी। उन्होंने कहा था कि दिल्ली सरकार पांच अक्तूबर से पूसा अनुसंधान संस्थान के साथ काम शुरू करेगी। दिल्ली सरकार पूसा संस्थान द्वारा बनाए गए घोल का इस्तेमाल 800 हेक्टेयर भूमि पर छिड़काव के लिए करेगी।


मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक ऑनलाइन ब्रीफिंग में कहा था कि ‘एग्री मिक्स कैप्सूल’ बनाने का काम 12-13 अक्तूबर तक पूरा होने की संभावना है। इन कैप्सूलों में से चार को तरल पदार्थ के साथ मिलाया जा सकता है और एक हेक्टेयर भूमि पर छिड़काव किया जा सकता है। यह घोल पराली को नरम करेगा और धीरे-धीरे इसे खाद में बदल देगा। इससे उत्पादकता बढ़ाने के अलावा कृषि भूमि में उर्वरक के उपयोग में कमी आएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed