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Vaccine: मलेरिया की नई वैक्सीन ने जगाई उम्मीद, खून में मौजूद परजीवी को कर देती है खत्म
Wed, 11 Dec 2024 10:00 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 11 Dec 2024 10:00 PM IST
सार
Malaria vaccine: बुर्किना फासो के इंस्टीट्यूट डी रिसर्च एन साइंसेज डे ला सैंटे और यूके के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता ने अफ्रीकी देश में 361 बच्चों को आरएच5.1/मैट्रिक्स-एम वैक्सीन की तीन खुराकें या रेबीज नियंत्रण वैक्सीन दी है।
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लेरिया वैक्सीन
- फोटो : ANI
विस्तार
अफ्रीकी बच्चों पर किए गए चरण 2बी नैदानिक परीक्षण के अंतरिम नतीजों के मुताबिक, मलेरिया की एक नई वैक्सीन सुरक्षित और अत्यधिक प्रतिरक्षात्मक है। यह नतीजे इसके असरदार होने की उम्मीद जगाते हैं। आरएच5.1/मैट्रिक्स-एम नामक यह वैक्सीन मलेरिया पैदा करने वाले परजीवी के खून में मौजूद रहने के दौरान उसे निशाना बनाती है। यह वह दौर होता है जब मलेरिया के लक्षण प्रभावित व्यक्ति में दिखाई देने लगते हैं। इस परीक्षण के नतीजे द लैंसेट इन्फेक्शियस डिजीज जर्नल में प्रकाशित हुए है।
मलेरिया प्लाज्मोडियम नामक परजीवी के कारण होता है, जो संक्रमित मादा ऐनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। इसके लक्षण आमतौर पर मच्छर के काटने के 10-15 दिनों बाद दिखाई देते हैं और इनमें बुखार, ठंड लगना जैसे हल्के लक्षण से लेकर दौरे और सांस लेने में कठिनाई जैसे गंभीर लक्षण शामिल हो सकते हैं।
361 अफ्रीकी बच्चों पर हुआ परीक्षण
बुर्किना फासो के इंस्टीट्यूट डी रिसर्च एन साइंसेज डे ला सैंटे और यूके के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता ने अफ्रीकी देश में 361 बच्चों को आरएच5.1/मैट्रिक्स-एम वैक्सीन की तीन खुराकें या रेबीज नियंत्रण वैक्सीन दी गईं। शोधकर्ता ने मलेरिया वैक्सीन के दो अलग-अलग शेड्यूल विलंबित और मासिक आजमाए। विलंबित शेड्यूल में दूसरी खुराक के चार महीने बाद तीसरी खुराक दी गई। वहीं, मासिक शेड्यूल में दूसरी खुराक के एक महीने बाद तीसरी खुराक दी गई। नतीजों में खुलासा हुआ कि विलंबित शेड्यूल ज्यादा प्रभावी था, इसकी प्रभावकारिता 55 फीसदी थी, जबकि मासिक शेड्यूल की प्रभावकारिता 40 फीसदी थी। विलंबित शेड्यूल वाले बच्चों में मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और एंटीबॉडी का उच्च स्तर देखा गया।
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मौजूदा दो वैक्सीनों से ज्यादा असरदार
यह वैक्सीन मौजूदा दो मलेरिया वैक्सीन आरटीएस, एस/एएस01 और आर21/मैट्रिक्स-एम से अलग है। मौजूदा दो वैक्सीन लीवर में मौजूद मलेरिया परजीवी को निशाना बनाते हैं और बच्चों में मलेरिया की रोकथाम के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इनकी सिफारिश करता है। हालांकि, शोधकर्ताओं के मुताबिक, इनमें से कोई भी टीका मलेरिया परजीवियों के खून में मौजूद रहने के दौरान प्रतिरक्षा पैदा नहीं करता हैं और यह परजीवी लीवर से खून में प्रवेश कर सकते हैं। वहीं, आरएच5.1/मैट्रिक्स-एम नामक यह वैक्सीन खून में मौजूद परजीवी को निशाना बनाता है और मलेरिया के खिलाफ एक अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है।
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मलेरिया प्लाज्मोडियम नामक परजीवी के कारण होता है, जो संक्रमित मादा ऐनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। इसके लक्षण आमतौर पर मच्छर के काटने के 10-15 दिनों बाद दिखाई देते हैं और इनमें बुखार, ठंड लगना जैसे हल्के लक्षण से लेकर दौरे और सांस लेने में कठिनाई जैसे गंभीर लक्षण शामिल हो सकते हैं।
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361 अफ्रीकी बच्चों पर हुआ परीक्षण
बुर्किना फासो के इंस्टीट्यूट डी रिसर्च एन साइंसेज डे ला सैंटे और यूके के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता ने अफ्रीकी देश में 361 बच्चों को आरएच5.1/मैट्रिक्स-एम वैक्सीन की तीन खुराकें या रेबीज नियंत्रण वैक्सीन दी गईं। शोधकर्ता ने मलेरिया वैक्सीन के दो अलग-अलग शेड्यूल विलंबित और मासिक आजमाए। विलंबित शेड्यूल में दूसरी खुराक के चार महीने बाद तीसरी खुराक दी गई। वहीं, मासिक शेड्यूल में दूसरी खुराक के एक महीने बाद तीसरी खुराक दी गई। नतीजों में खुलासा हुआ कि विलंबित शेड्यूल ज्यादा प्रभावी था, इसकी प्रभावकारिता 55 फीसदी थी, जबकि मासिक शेड्यूल की प्रभावकारिता 40 फीसदी थी। विलंबित शेड्यूल वाले बच्चों में मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और एंटीबॉडी का उच्च स्तर देखा गया।
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मौजूदा दो वैक्सीनों से ज्यादा असरदार
यह वैक्सीन मौजूदा दो मलेरिया वैक्सीन आरटीएस, एस/एएस01 और आर21/मैट्रिक्स-एम से अलग है। मौजूदा दो वैक्सीन लीवर में मौजूद मलेरिया परजीवी को निशाना बनाते हैं और बच्चों में मलेरिया की रोकथाम के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इनकी सिफारिश करता है। हालांकि, शोधकर्ताओं के मुताबिक, इनमें से कोई भी टीका मलेरिया परजीवियों के खून में मौजूद रहने के दौरान प्रतिरक्षा पैदा नहीं करता हैं और यह परजीवी लीवर से खून में प्रवेश कर सकते हैं। वहीं, आरएच5.1/मैट्रिक्स-एम नामक यह वैक्सीन खून में मौजूद परजीवी को निशाना बनाता है और मलेरिया के खिलाफ एक अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है।