Delhi: दिल्ली में शक्तियों पर बवाल; वाशिंगटन, बर्लिन व पेरिस सहित कई देशों की राजधानियों पर केंद्र का शासन
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विस्तार
केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच टकराव जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को दिए अपने एक फैसले में राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस, कानून-व्यवस्था और भूमि को छोड़कर अन्य सभी सेवाओं का नियंत्रण, दिल्ली सरकार को सौंप दिया था। अब केंद्र सरकार ने संविधान पीठ के फैसले की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इसके अलावा केंद्र सरकार, शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण बनाने के लिए एक अध्यादेश लाई है। इसके जरिए ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकार, दोबारा से उपराज्यपाल के पास चला गया है। केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि ऐसी व्यवस्था दुनिया के कई देशों में लागू है। अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डी.सी., जर्मनी की राजधानी बर्लिन और फ्रांस की राजधानी पेरिस में भी दिल्ली जैसी व्यवस्था बताई गई है। दिल्ली बड़ी संख्या में राजनयिक मिशनों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की मेजबानी करती है। ऐसे में केंद्र सरकार का नियंत्रण, विदेशी सरकारों के साथ प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करता है। इन राजनयिक संस्थाओं के सुचारू संचालन की सुविधा भी प्रदान करता है।
पहले केंद्र पर ऐसे तीखे हमले नहीं होते थे ...
केंद्र सरकार ने 11 मई को आए संविधान पीठ के फैसले की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली सरकार के पास राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं पर विधायी और कार्यकारी शक्ति है। केंद्र सरकार, राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण बनाने के लिए शनिवार को एक अध्यादेश लाई है। इसके माध्यम से केंद्र ने ट्रांसफर और पोस्टिंग के अधिकार उपराज्यपाल को दे दिए हैं। पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली की निर्वाचित सरकार को लगभग सभी संभावित मामलों पर केंद्र सरकार के साथ टकराव करते हुए देखा गया है। सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार के कदमों की आक्रामक प्रकृति, जिनमें से अधिकांश बातें, केंद्र सरकार को भड़काने के लिए दिखाई पड़ती हैं, पहले ऐसा नहीं होता था। ऐसा तब भी नहीं हुआ, जब केंद्र और दिल्ली में अलग दलों की सरकार थी। उस वक्त केंद्र सरकार पर इस तरह के तीखे हमले नहीं होते थे।
राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा का दिया हवाला ...
केंद्र सरकार ने दिल्ली की शासन व्यवस्था को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा का हवाला दिया है। सूत्रों का कहना है कि इसके लिए केंद्र जिम्मेदार है। जब दिल्ली के प्रशासन पर केंद्र का नियंत्रण रहता है तो राष्ट्रीय राजधानी में कहीं अधिक प्रभावी समन्वय और सुरक्षा उपायों का कार्यान्वयन सुनिश्चित होता है। दिल्ली को वर्ष 1991 में जब एक संवैधानिक संशोधन द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र घोषित किया गया तो यह अवधारणा स्पष्ट कर दी गई थी कि दिल्ली में दोहरी सत्ता और जिम्मेदारी, एक साथ नहीं चल सकती। दिल्ली एक विशिष्ट स्थिति वाला केंद्र शासित प्रदेश है। केंद्र सरकार पूरे देश के हितों का प्रतिनिधित्व करती है। प्रशासन पर नियंत्रण होने से केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने की अनुमति मिलती है कि स्थानीय हितों पर राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी जाए। सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार की राष्ट्रीय संसाधनों और विशेषज्ञता तक पहुंच है। दिल्ली के प्रबंधन और विकास में इसका उपयोग किया जा सकता है। धन आवंटित करने से लेकर राष्ट्रीय योजनाओं को लागू करने तक के मामले में सहूलियत बनी रहती है। केंद्र सरकार अपने विशेषज्ञों, संसाधनों और संस्थानों के नेटवर्क का लाभ उठा सकती है।
दुनिया के इन देशों की व्यवस्था का दिया हवाला ...
केंद्र सरकार के सूत्र बताते हैं, अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी को देखें। वहां की व्यवस्था संघीय सरकार के सीधे नियंत्रण में है। वाशिंगटन में, केवल एक महापौर है। वहां कोई निर्वाचित सरकार नहीं है। कोलंबिया भी एक अनूठी व्यवस्था द्वारा शासित है। वहां पर कानून प्रवर्तन, शिक्षा और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे सहित प्रशासन पर केंद्र सरकार का अधिकार होता है। ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा, ऑस्ट्रेलियाई राजधानी क्षेत्र (एसीटी) में स्थित है। वहां भी संघीय सरकार का नियंत्रण है। अधिनियम के तहत वहां शक्तियों का बंटवारा है। केंद्र सरकार, प्रशासन, योजना और प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण नियंत्रण रखती है। कनाडा की राजधानी ओटावा भी संघीय सरकार के प्रशासन के अंतर्गत आती है। भूमि उपयोग योजना, प्रमुख बुनियादी ढांचे के विकास और राजनयिक संबंधों सहित शहर के शासन के विभिन्न पहलुओं पर संघीय सरकार का अधिकार क्षेत्र है। जर्मनी की राजधानी बर्लिन भी संघीय सरकार के अधीन है। हालांकि बर्लिन की अपनी राज्य सरकार भी है, लेकिन सुरक्षा, विदेशी मामलों और समग्र नीति समन्वय जैसे मामलों में केंद्र सरकार ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। फ्रांस की राजधानी पेरिस पर केंद्र और क्षेत्रीय प्राधिकरण, दोनों का शासन चलता है। सुरक्षा, परिवहन और शहरी नियोजन जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्र सरकार का अधिकार है, जबकि स्थानीय शासन और सांस्कृतिक मामलों के लिए क्षेत्रीय सरकार जिम्मेदार है।
शासन में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए जरुरी ...
दिल्ली, भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में कार्य करती है। केंद्र का नियंत्रण यह सुनिश्चित करता है कि शहर के लिए नीतियां और निर्णय राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ संरेखित हों। इससे बेहतर आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे का विकास और सांस्कृतिक संरक्षण संभव होता है। पूरे देश के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार का शासन और नीति-निर्माण पर व्यापक दृष्टिकोण रहता है। यह व्यापक दृष्टिकोण ही व्यापक योजना और निर्णय लेने की अनुमति देता है। इसके चलते दिल्ली के निवासियों की विविध आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को ध्यान में रखा जाता है। लिहाजा केंद्र के पास दिल्ली में राष्ट्रीय कानूनों, विनियमों और नीतियों को लागू करने का अधिकार है, इससे शासन में एकरूपता सुनिश्चित होती है। विभिन्न क्षेत्रीय नियमों, विनियमों और विधानों से उत्पन्न होने वाले संभावित संघर्षों या विसंगतियों से बचा जा सकता है। केंद्र सरकार, विदेशी निवेश को आकर्षित करने, पर्यटन को बढ़ावा देने और दिल्ली में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रभाव और राजनयिक संबंधों का लाभ उठा सकती है। केंद्र सरकार के पास दिल्ली में संसाधनों को कुशलतापूर्वक आवंटित करने और तैनात करने की शक्ति है। इससे प्राकृतिक आपदाओं या सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट जैसी आपात स्थितियों में केंद्र की भूमिका अहम हो जाती है।
केंद्र के पास शक्ति होगी तो टकराव नहीं रहेगा ...
केंद्र सरकार ने एक यह दलील भी दी है कि दिल्ली के प्रशासन पर केंद्र सरकार का नियंत्रण, हितों के संभावित टकराव को रोकता है। साथ ही इससे यह भी सुनिश्चित होता है कि निर्णय स्थानीय या क्षेत्रीय राजनीति से प्रभावित होने के बजाय समग्र रूप से राष्ट्र के सर्वोत्तम हित में लिए जाते हैं। केंद्र सरकार, दिल्ली के विकास और भलाई को प्रभावित करने वाले परिवहन, पर्यावरण संबंधी चिंताओं और सीमा पार के मामलों जैसे मुद्दों को हल करने के लिए अपने राष्ट्रीय नेटवर्क और अन्य राज्यों के साथ सहयोग का लाभ उठा सकती है। केंद्र सरकार के पास दिल्ली से जुड़े अंतरराज्यीय विवादों या संघर्षों को संबोधित करने का अधिकार है। केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करती है कि पड़ोसी राज्यों और दिल्ली के बीच संघर्ष को केंद्रीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से हल किया जाए। इससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलता है। दिल्ली के प्रशासन पर केंद्र सरकार का नियंत्रण सार्वजनिक कल्याण के मामलों में एक सुसंगत और एकीकृत दृष्टिकोण की अनुमति देता है। केंद्र सरकार, लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा, संसाधनों एवं और अन्य सेवाओं का समान वितरण सुनिश्चित करती है।