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New criminal laws: अब 'भ्रष्टाचार' पर लगेगी रोक, फुलप्रूफ तकनीक देगी त्वरित न्याय, पुलिस जांच की नई सीमा तय

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 09 Dec 2024 06:38 PM IST
सार

ऑनलाइन चिकित्सा, कानूनी जांच व पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्रणाली शुरु की गई है। इसे न्याय सेतु के साथ एकीकृत किया गया है। डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा रहेगी। पुलिस और अस्पताल के बीच बेहतर तालमेल होगा।

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New criminal laws Now corruption will be banned technology will give quick justice know more in hindi
नए आपराधिक कानून - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

तीन नए आपराधिक कानून- 'भारतीय न्याय संहिता', 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' और 'भारतीय साक्ष्य अधिनियम', देश में पहली जुलाई से लागू हो गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशन में इन कानूनों का ऐसा स्वरूप तय किया गया है कि अब विभिन्न मामलों की सुनवाई के लिए अदालतों में 'तारीख पर तारीख' नहीं मिलेगी। त्वरित गति से न्याय मिलेगा। साथ ही न्याय संबंधी प्रक्रिया के विभिन्न पहलू, डिजिटल प्लेटफार्म पर रहेंगे। इसके चलते 'क्रप्शन' पर रोक लगेगी। खास बात है कि पुलिस, अदालत, वकील, अस्पताल, गवाह और फोरेंसिंक जांच, इन सब में पहले जो समय लगता था, अब वैसा नहीं होगा। हाई तकनीक की मदद से स्पीडी न्याय मिलेगा। सब कुछ डिजिटल प्लेटफार्म पर रहेगा। इसके अलावा नए कानूनों में अब थानों में जब्त हुई संपत्ति, कबाड़ नहीं बनेगी। उसका निपटारा भी त्वरित गति से होगा। न्यायालय के लिए मामले की संपत्ति का विवरण 14 दिनों में तैयार करना अनिवार्य किया गया है। संपत्ति का निपटान, जब्ती या सुपुर्दारी, संपत्ति विवरण के 30 दिन के भीतर करना अनिवार्य बनाया गया है।
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चंडीगढ़ के डीजीपी एसएस यादव बताते हैं, केंद्रीय गृह मंत्रालय के तत्वावधान में चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा तीनों नए कानूनों के सफल क्रियान्वयन को लेकर जो लाइव प्रदर्शनी आयोजित की गई थी, वह अभी तक जारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में 3 दिसंबर को चंडीगढ़ स्थित पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) में उक्त प्रदर्शनी का शुभारंभ किया था। पीएम ने तीनों आपराधिक कानूनों- 'भारतीय न्याय संहिता', 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' और 'भारतीय साक्ष्य अधिनियम' का सफल कार्यान्वयन, राष्ट्र को समर्पित किया था। चंडीगढ़ पुलिस ने इस प्रदर्शनी में सभी तरह की कार्रवाई को लाइव दिखाया था। इससे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री काफी प्रभावित हुए थे। बतौर यादव, पीएम ने इस प्रदर्शनी को आगे जारी रखने के लिए कहा था। इसके बाद चंडीगढ़ के सामान्य लोग, प्रदर्शनी में तीनों कानूनों के लाइव डेमो को देखने के लिए आने लगे। 
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डीजीपी का कहना था, अब तकरीबन सब कुछ डिजिटल प्लेटफार्म पर है। ऐसे में 'क्रप्शन' की गुंजाइश खत्म हो गई है। हाई तकनीक के इस्तेमाल से लोगों को स्पीडी न्याय मिलने लगा है। देशभर के अपराधियों के फिंगरप्रिंट्स का ऑनलाइन डेटाबेस है। इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सटीक और भरोसेमंद रिकॉर्ड है। 10 अंकों का विशिष्ट फिंगर प्रिंट नंबर होता है। देश में किसी भी अपराधी की तुरंत पहचान हो जाती है। अपराध स्थल से फिंगरप्रिंट का तुरंत मिलान संभव हुआ है। अपराधी की पहचान और खोज में दक्षता हासिल होती है। जब न्याय मिलने में देरी होती है तो भ्रष्टाचार की संभावना बनी रहती है। मैनुअल तरीके से न्याय प्रक्रिया में कई ऐसे छिद्र बच जाते थे, जिनके चलते न्याय में अनावश्यक देरी होती थी। अब पुलिस जांच की नई सीमा तय कर दी गई है।
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यादव के मुताबिक, जैसे प्राथमिक जांच के लिए 14 दिन का समय निर्धारित किया गया है। 10 वर्ष या इससे अधिक की सजा वाले संगीन अपराध की जांच के लिए आरोपी की गिरफ्तारी से लेकर 90 दिन की समयावधि तय की गई है। यह प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187 में है। अन्य अपराधों की जांच के लिए 60 दिन का समय रहेगा। यह व्यवस्था, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187 में है। बलात्कार और पोस्को जैसे संगीन अपराध में एफआईआर के 60 दिन के अंदर आरोप पत्र दाखिल करना होगा। मृत्यु के मामले में 24 घंटे के अंदर एसडीएम को रिपोर्ट भेजना अनिवार्य बनाया गया है। गिफ्तार किए व्यक्ति को हवालात में रखने के लिए 24 घंटे का समय रहेगा।

ऑनलाइन चिकित्सा, कानूनी जांच व पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्रणाली शुरु की गई है। इसे न्याय सेतु के साथ एकीकृत किया गया है। डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा रहेगी। पुलिस और अस्पताल के बीच बेहतर तालमेल होगा। एमएलआर और पीएमआर की ऑनलाइन रिपोर्टिंग संभव हुई है। ग्राफिक्स/तस्वीरें अपलोड करने का प्रावधान रहेगा। केस से जुड़े चिकित्सकीय साक्ष्यों का सरल समन्वय किया गया है। डीजीपी यादव के अनुसार, देखिये अब नए कानूनों में जांच से जुड़ी अधिकांश बातें, ऑनलाइन प्लेटफार्म पर रहेंगी। ऐसे में जांच, त्वरित गति से आगे बढ़ेगी। घटनास्थल पर अगर कुछ बरामदगी हुई है या जब्ती है, उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग होगी। उसे थाने में कौन जमा कराएगा, वह सब जानकारी भी ऑनलाइन प्लेटफार्म पर आएगी। क्यूआर कोड लगेगा, इससे सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होगी।

फोरेंसिंक जांच का भी समय निर्धारित किया गया है। उसे लेने के लिए पुलिस को लैब पर नहीं जाना पड़ेगा। अदालत की ऑनलाइन कार्यवाही में डॉक्टर या लैब एक्सपर्ट जुड़े सकते हैं। अभियोजन पक्ष का कालाकल्प हो रहा है। राज्य व जिला स्तरीय निदेशाल की स्थापना की जा रही है। निदेशक, उपनिदेशक व सहायक निदेशक के पद सृजित हो रहे हैं। पुलिस रिपोर्ट, आरोप पत्र और वकील की वैधानिक दृष्टिकोण से जांच होगी। पुलिस और सरकार को त्वरित गति से वैधानिक परामर्श मिलेगा। डिजिटल माध्यम से केस की चार्जशीट को जांच के लिए भेजना। इससे अभियोजन कार्यालय और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। समय व पैसे की बचत होगी। मृत्युदंड प्राप्त हर अपराधी दया याचिका दे सकता है।


अपराधी की अपील खारिज होने की सूचना देने के लिए जेल अधीक्षक की जिम्मेदारी तय की गई है। सूचना मिलने के 30 दिन के भीतर याचिका दायर करने का विकल्प प्रदान किया गया है। अगर कई अभियुक्त हैं तो सह अभियुक्तों की याचिका देने की समय सीमा 60 दिन तय की गई है। 60 दिन के भीतर दया याचिका दायर करने के लिए जेल अधीक्षक उत्तरदायी होंगे। सरकार को सभी तरह के दस्तावेज भेजने की जिम्मेदारी, जेल अधीक्षक की होगी। दंड का फैसला मिलने के 30 दिन के भीतर राज्यपाल व वहां से निरस्त होने पर राष्ट्रपति के पास दया याचिका का प्रावधान रहेगा। केंद्र सरकार के लिए राष्ट्रपति को सिफारिश की 60 दिन की समय सीमा तय की गई है। राष्ट्रपति का फैसला अंतिम व मान्य होगा। 
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