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चिंताजनक: वातावरण में तैरते नए वायरस से कोरोना जैसी महामारी का खतरा, चमगादड़ और मछली से हो रहा अधिक प्रसार

Thu, 23 May 2024 06:37 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 23 May 2024 06:37 AM IST
सार

एक नवीन कंप्यूटर पद्धति की मदद से शोधकर्ताओं की टीम ने वायरस संबंधी लगभग तीन लाख आंकड़ों का विश्लेषण कर पता लगाया है कि वातावरण में 40 निडोवायरस तैर रहे हैं, इनमें 13 कोरोना वायरस भी हैं। ये महामारी की वजह बन सकते हैं। 

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new computer method help revealed 40 nidoviruses floating environment out of which 13 are corona viruses
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : एएनआई

विस्तार

मछली से लेकर कुतरने वाले जीवों तक विभिन्न कशेरुकी जीवों में 40 निडोवायरस का पता लगा है। इनमें 13 कोरोना वायरस भी शामिल हैं। ये हमारे वातावरण में तैर रहे हैं और सार्स-सीओवी-2 कोरोना वायरस की तरह बड़ी महामारी को जन्म दे सकते हैं। 

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एक नवीन कंप्यूटर पद्धति की मदद से शोधकर्ताओं की टीम ने वायरस संबंधी लगभग तीन लाख आंकड़ों का विश्लेषण कर यह पता लगाया है। यह कंप्यूटर प्रक्रिया नए वायरस के प्रसार को रोकने में मदद कर सकती है। यह उन वायरस स्वरूप की व्यवस्थित खोज को सक्षम बनाती है जो मनुष्यों के लिए खतरनाक हैं। इसके नतीजे पीएलओएस पैथोजन्स में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, ये वास्तव में नए नहीं हैं, लेकिन आनुवंशिक रूप से बदल गए हैं। शोधकर्ताओं ने वैज्ञानिक डाटाबेस में एकत्रित किए गए कशेरुकियों से आनुवंशिक आंकड़ों को अपने कंप्यूटरों के माध्यम से नए प्रश्नों के साथ जोड़ा। उन्होंने बड़े पैमाने पर संक्रामक आनुवंशिक सामग्री हासिल करने और उसका अध्ययन करने के लिए वायरस से संक्रमित जानवरों की खोज की। इसका केंद्र बिंदु निडोवायरस था, जिसमें कोरोनो वायरस परिवार भी शामिल है। निडोवायरस जिनकी आनुवंशिक सामग्री में आरएनए (राइबोज न्यूक्लिक एसिड) होता है, कशेरुकियों में भारी मात्रा में पाए जाते हैं। 

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...तो पैदा होता है नया वायरस 
शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने मछली में जिन निडोवायरस की खोज की है वे अक्सर विभिन्न वायरस प्रजातियों के बीच आनुवंशिक सामग्री का आदान-प्रदान करते हैं। यहां तक कि पारिवारिक सीमाओं के बाहर भी वे ऐसा करते हैं। जब दूर के रिश्तेदार क्रॉसब्रीड करते हैं तो इससे पूरी तरह से नए गुणों वाला वायरस पैदा होता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि जब जानवर एक साथ अलग-अलग वायरस से संक्रमित होते हैं तब वायरस अपने आपको दोहराने के दौरान फिर से संक्रामक जीन में बदल जाता है। इस तरह की विकासवादी छलांगें वायरस की आक्रामकता और इनसे होने वाले खतरे को बढ़ा देती हैं। 

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वायरस फैलाने में सबसे ज्यादा जिम्मेदार चमगादड़ 
शोध के निष्कर्षों से पता चला कि मछली में पाए गए वायरस का आनुवंशिक आदान-प्रदान स्तनधारी वायरस में भी हुआ। चमगादड़, जो कुतरने वाले जानवरों की तरह अक्सर बड़ी संख्या में अलग-अलग वायरसों से संक्रमित होते हैं उन्हें पिघलने वाले बर्तन की तरह माना जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि चमगादड़ वायरस फैलने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। इनके संपर्क में जो भी जीव आता है वह इनसे बच नहीं सकता। इसलिए सार्स-सीओवी-2 कोरोना वायरस हो सकता है जो चमगादड़ों में भी विकसित हुआ और वहीं से मनुष्यों में फैल गया। 

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