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कर्नाटक: सिद्धारमैया-यतनाल के बीच जुबानी जंग, विपक्ष के नेता के मुद्दे पर बहस; जानें संन्यास का जिक्र क्यों

Wed, 12 Jul 2023 05:47 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 12 Jul 2023 05:47 PM IST
सार

Karnataka Assembly: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विधानसभा में घोषणा की कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी 'समायोजन (एडजस्टमेंट) की राजनीति' नहीं की है और अगर कोई यह साबित कर देता है कि उन्होंने वास्तव में ऐसा किया है, तो वह तुरंत राजनीति छोड़ देंगे।

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Never resorted to 'adjustment politics' in my entire political life, says Karnataka CM Siddaramaiah
कर्नाटक विधानसभा में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने बुधवार को विधानसभा में घोषणा की कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी 'समायोजन (एडजस्टमेंट) की राजनीति' नहीं की है और अगर कोई यह साबित कर देता है कि उन्होंने वास्तव में ऐसा किया है, तो वह तुरंत राजनीति छोड़ देंगे। विधानसभा में विपक्ष का नेता कौन होगा, इस पर भी सदन में बहस हुई, तभी सिद्धारमैया ने वरिष्ठ भाजपा नेता बसनगौड़ा पाटिल यतनाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें पता है कि उन्हें प्रमुख पद के लिए नहीं चुना जाएगा। 

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'बार-बार दखल देने से एक अच्छे विधायक नहीं बन जाते'
ये दोनों मुद्दे उस समय सामने आए जब मुख्यमंत्री 'गृह ज्योति' योजना पर स्पष्टीकरण देने के लिए हस्तक्षेप कर रहे थे, जिसके तहत घरों को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा, 'यतनाल जी, मैंने सोचा था कि आप एक अच्छे विधायक हैं, लेकिन आपके बार-बार दखल देने से आप एक अच्छे विधायक नहीं बन जाते। मैं जानता हूं कि आप भी विपक्ष का नेता बनने की इच्छा रखने वालों में से एक हैं, कृपया इस भ्रम में न रहें कि बार-बार आपत्तियां उठाने और हस्तक्षेप करने से आपको विपक्ष का नेता बना दिया जाएगा।'

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'आपको नहीं बनाएंगे विपक्ष का नेता'
उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं होगा, कृपया बैठ जाइए। वे (भाजपा नेतृत्व) जिसे चाहें उसे विपक्ष का नेता बना देंगे... इस गलत धारणा में न रहें कि आपको (विपक्ष का नेता) बनाया जाएगा, सिर्फ इसलिए कि जब कोई बोल रहा होता है तो आप बार-बार हस्तक्षेप करते हैं... मेरी जानकारी के अनुसार, वे आपको नहीं बनाएंगे।'

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भाजपा ने अबतक नहीं नियुक्त किया एलओपी
विधानसभा सत्र शुरू होने के बाद से यह दूसरा सप्ताह होने के बावजूद राज्य में मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने अभी तक विपक्ष के नेता (एलओपी) की नियुक्ति नहीं की है। यतनाल ने सिद्धारमैया को याद दिलाया कि 2018 के विधानसभा चुनावों से पहले उन्होंने बार-बार भविष्यवाणी की थी कि जद (एस) नेता कुमारस्वामी मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे, लेकिन चुनाव के बाद कुमारस्वामी इस पद पर पहुंच गए। उन्होंने सिद्धारमैया पर कटाक्ष करते हुए कहा, 'अब आप भविष्यवाणी कर रहे हैं कि मैं विपक्ष का नेता नहीं बनूंगा... इसका मतलब है कि मैं 100 फीसदी बन जाऊंगा।'

सिद्धारमैया बोले- आर अशोक और अश्वथ नारायण भी आकांक्षी
सिद्धारमैया ने दोहराया कि यतनाल विपक्ष का नेता नहीं बनेंगे और कहा कि इस पद के लिए भाजपा के वरिष्ठ विधायक आर अशोक और सीएन अश्वथ नारायण जैसे अन्य आकांक्षी भी हैं। इसके बाद यतनाल ने मुख्यमंत्री पर पलटवार करते हुए कहा कि वह पार्टी नेताओं को भड़काने और उनके बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर पार्टी के भीतर आग लगाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह काम नहीं करेगा।

'राजनीतिक करियर में कभी समायोजन की राजनीति नहीं की'
सिद्धारमैया ने एक बार फिर कहा कि उनके पास खबर है कि यतनाल को विपक्ष का नेता नहीं बनाया जाएगा। इसके बाद में यतनाल ने कहा कि इससे साबित होता है कि मुख्यमंत्री 'समायोजन की राजनीति' में लिप्त हैं। उन्होंने कहा, 'आपके (सिद्धरमैया) पास सूचना है कि मैं विपक्ष का नेता नहीं बनूंगा, इसका मतलब है कि आपने (भाजपा में) किसी के साथ समझौता कर लिया है।' इस पर सिद्धारमैया ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में कभी समायोजन की राजनीति नहीं की। उन्होंने कहा, 'आप किसी से भी पूछ सकते हैं, चाहे मैं विपक्ष में रहते हुए किसी मुख्यमंत्री या मंत्री के घर कोई एहसान मांगने गया हो।'

'1983 से विधानसभा में हुआ, कोई साबित कर दे तो...'
उन्होंने कहा, 'मेरी ऐसी आदत नहीं है। मुझे अपने राजनीतिक जीवन में समायोजन करने की आदत नहीं है... मैं 1983 से इस विधानसभा में हूं, येदियुरप्पा (भाजपा के दिग्गज) और मैंने इस विधानसभा में एक साथ प्रवेश किया... 1983 से लेकर आज तक अगर यह साबित हो जाता है कि मैंने विरोधी पार्टी के साथ समायोजन की राजनीति की है, तो मैं तुरंत राजनीति से संन्यास ले लूंगा। मैं अपने जीवन में आज तक ऐसी किसी चीज में लिप्त नहीं हुआ हूं।'

विधानसभा चुनाव में हार के बाद हाल ही में भाजपा के कई नेताओं ने अपने ही सहयोगियों की खुलकर आलोचना की थी और कहा था कि कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग के साथ 'समायोजन की राजनीति' ने विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार में योगदान दिया, जिससे राजनीतिक बहस छिड़ गई।

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