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Netaji Statue: नेताजी की प्रतिमा के अनावरण में शामिल नहीं हो पाएंगी उनकी बेटी, केंद्र सरकार से की यह अपील

Mon, 05 Sep 2022 08:36 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 05 Sep 2022 08:36 PM IST
सार

80 वर्षीय अनीता बोस फाफ ने एक इंटरव्यू में बताया कि वह चाहती हैं कि ताइपे में विमान दुर्घटना के बाद से अब तक जापान के रेनकोजी मंदिर में रखे गए अवशेषों को उचित सम्मान के साथ वापस लाया जाए। 

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Netaji daughter to miss unveiling of fathers statue wants Govt to consider bringing Boses remains back
अनीता बोस - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा गुरुवार को इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। लेकिन इस मौके से नेताजी की बेटी अनीता बोस फाफ चूक जाएंगी। हालांकि अनीता, नेताजी के अवशेषों को भारत वापस लाने के लिए शर्तों और प्रक्रियाओं पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री से मिलना चाहती हैं। 
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80 वर्षीय अनीता बोस फाफ ने एक इंटरव्यू में बताया कि वह चाहती हैं कि ताइपे में विमान दुर्घटना के बाद से अब तक जापान के रेनकोजी मंदिर में रखे गए अवशेषों को उचित सम्मान के साथ वापस लाया जाए। 
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पेशे से अर्थशास्त्री बोस फाफ ने कहा, मैं अपने पिता के अवशेषों की वापसी की शर्तों और प्रक्रियाओं पर (प्रधानमंत्री के साथ) चर्चा करना चाहती हूं। 

उन्होंने कहा कि उन्हें नेताजी की प्रतिमिा के अनावरण में शामिल होने का निमंत्रण मिला था, लेकिन छोटी सूचना ने उनके लिए जर्मनी से लंबी दूरी की यात्रा करना मुश्किल बना दिया जहां वह रहती हैं। इंडिया गेट पर एक छत्र के नीचे प्रतिमा का अनावरण किया जा रहा है, जहां दशकों पहले किंग जॉर्ज पंचम की छवि थी, जिसके खिलाफ उन्होंने विद्रोह किया था। 
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बोस फाफ ने कहा, मैं भारत की यात्रा को प्रधानमंत्री के साथ एक बैठक के साथ जोड़ना चाहती थी लेकिन मैं समझती हूं कि वह इस समय व्यस्त हैं, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भी एक राजकीय यात्रा पर हैं। बोस फाफ के पति मार्टिन फाफ सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी से जर्मन संसद के पूर्व सदस्य हैं। 


उन्होंने आगे कहा, इस मुद्दे पर प्रणब मुखर्जी (1990 के दशक के मध्य तत्कालीन नरसिम्हा राव कैबिनेट में विदेश मंत्री) के साथ बातचीत के अलावा मैं व्यक्तिगत रूप से देश के नेतृत्व के साथ अवशेषों की वापसी के मुद्दे पर चर्चा नहीं कर पायी।

1995-96 में पीवी नरसिम्हा राव सरकार रेनकोजी में रखे कलश को भारत लाने के कगार पर थी। माना जाता है कि इस कलश में सुभाष चंद्र बोस के नश्वर अवशेष हैं।   
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