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नए संसद भवन के लिए न तो धरोहर ढांचा नष्ट होगा और न ही पेड़ कटेंगे
Wed, 22 Jul 2020 04:45 AM IST
अवधेश कुमार
राजीव सिन्हा अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Wed, 22 Jul 2020 04:45 AM IST
सार
- केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का बचाव किया
- सरकार ने कहा, मौजूदा संसद भवन सुरक्षित नहीं और न ही जरूरतों के अनुरूप
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संसद भवन (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
विस्तार
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 20,000 करोड़ रुपये के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का बचाव करते हुए कहा, नए संसद भवन और केंद्रीय सचिवालय भवनों के निर्माण में किसी भी धरोहर ढांचे (हेरिटेज स्ट्रक्चर) को नष्ट नहीं किया जाएगा और न ही पेड़ों को काटा जाएगा। सरकार ने यह भी कहा है कि मौजूदा संसद भवन न तो जरूरतों के मुताबिक है और न ही यह सुरक्षित है।
सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामा दायर कर केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने कहा, नए संसद भवन का निर्माण मौजूदा इमारत के बगल में 9.5 एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा। सरकार ने कहा, नई परियोजना के तहत सभी 51 मंत्रालय 10 इमारतों में होंगे। फिलहाल केंद्रीय सचिवालय 47 इमारतों व घरों में है।
39 मंत्रालय मौजूदा सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में है, जबकि 12 मंत्रालय इसके बाहर है। नई परियोजना के तहत कई मंत्रालयों में जाने-आने के लिए तीन किमी भूमिगत शटल प्रस्तावित है। इसे मौजूदा उद्योग भवन और केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से जोड़ा जाएगा। सीपीडब्ल्यूडी में यह जवाब राजीव सूरी और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल अनुज श्रीवास्तव द्वारा इस प्रोजेक्ट के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामा दायर कर केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने कहा, नए संसद भवन का निर्माण मौजूदा इमारत के बगल में 9.5 एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा। सरकार ने कहा, नई परियोजना के तहत सभी 51 मंत्रालय 10 इमारतों में होंगे। फिलहाल केंद्रीय सचिवालय 47 इमारतों व घरों में है।
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39 मंत्रालय मौजूदा सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में है, जबकि 12 मंत्रालय इसके बाहर है। नई परियोजना के तहत कई मंत्रालयों में जाने-आने के लिए तीन किमी भूमिगत शटल प्रस्तावित है। इसे मौजूदा उद्योग भवन और केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से जोड़ा जाएगा। सीपीडब्ल्यूडी में यह जवाब राजीव सूरी और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल अनुज श्रीवास्तव द्वारा इस प्रोजेक्ट के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर दिया है।
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नए प्रोजेक्ट से हर साल बचेंगे एक हजार करोड़
सीपीडब्ल्यूडी ने कहा है कि 20, 000 करोड़ रुपये का निवेश तत्काल नहीं किया जा रहा है बल्कि यह छह साल में प्रस्तावित व्यय है। कहा गया है कि वास्तव में इस प्रोजेक्ट से सालाना करीब 1000 करोड़ रुपये की बचत होगी, जो फिलहाल किराये के मद खर्च हो रहा है। इस प्रोजेक्ट से कार्यपालिका के कामकाज की दक्षता भी बढ़ेगी। साथ ही सामान्य रूप से सार्वजनिक जीवन में भी आसानी होगी क्योंकि सभी प्रमुख मंत्रालय एक ही जगह पर होंगे। सेंट्रल विस्टा में बनने वाली 10 इमारतों में 51 मंत्रालयों को समायोजित किया जाएगा।
नई लोकसभा में 876 सदस्यों के बैठने के व्यवस्था
नए संसद भवन के निर्माण की आवश्यकता के प्रस्तावक सीपीडब्ल्यूडी (शहरी विकास मंत्रालय के अंतर्गत) ने कहा कि कि मौजूदा संसद भवन में अधिक सदस्यों को समायोजित नहीं किया जा सकता है। 2026 के बाद सांसदों की संख्या में भारी इजाफा होने की संभावना है। नए लोकसभा चैंबर में 876 सदस्यों की व्यवस्था होगी और संयुक्त सत्र होने की स्थिति में 1,224 सदस्यों को समायोजित किए जा सकेंगे। वहीं, प्रस्तावित राज्यसभा चैंबर में 400 सदस्यों को बैठने की व्यवस्था की जाएगी।
सीपीडब्ल्यूडी ने कहा है कि 20, 000 करोड़ रुपये का निवेश तत्काल नहीं किया जा रहा है बल्कि यह छह साल में प्रस्तावित व्यय है। कहा गया है कि वास्तव में इस प्रोजेक्ट से सालाना करीब 1000 करोड़ रुपये की बचत होगी, जो फिलहाल किराये के मद खर्च हो रहा है। इस प्रोजेक्ट से कार्यपालिका के कामकाज की दक्षता भी बढ़ेगी। साथ ही सामान्य रूप से सार्वजनिक जीवन में भी आसानी होगी क्योंकि सभी प्रमुख मंत्रालय एक ही जगह पर होंगे। सेंट्रल विस्टा में बनने वाली 10 इमारतों में 51 मंत्रालयों को समायोजित किया जाएगा।
नई लोकसभा में 876 सदस्यों के बैठने के व्यवस्था
नए संसद भवन के निर्माण की आवश्यकता के प्रस्तावक सीपीडब्ल्यूडी (शहरी विकास मंत्रालय के अंतर्गत) ने कहा कि कि मौजूदा संसद भवन में अधिक सदस्यों को समायोजित नहीं किया जा सकता है। 2026 के बाद सांसदों की संख्या में भारी इजाफा होने की संभावना है। नए लोकसभा चैंबर में 876 सदस्यों की व्यवस्था होगी और संयुक्त सत्र होने की स्थिति में 1,224 सदस्यों को समायोजित किए जा सकेंगे। वहीं, प्रस्तावित राज्यसभा चैंबर में 400 सदस्यों को बैठने की व्यवस्था की जाएगी।
मौजूदा संसद 100 साल पुरानी, भूकंप मानकों पर खरा नहीं
हलफनामे में सीपीडब्ल्यूडी का कहना है कि मौजूदा संसद भवन की इमारत करीब 100 साल पुरानी है। इसकी स्थिति ठीक नहीं हैऔर यह सुविधाओं और प्रौद्योगिकी के मामले में वर्तमान आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम नहीं है। साथ ही मौजूदा ढांचा अपग्रेड भूकंप क्षेत्र -4 की जरूरतों को पूरा नहीं करता। साथ ही अग्नि सुरक्षा भी गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि इमारत, वर्तमान अग्नि मानदंडों को अनुरूप नहीं है। मौजूदा इमारत में व्यापक तौर पर बदलाव की भी आवश्यकता है और यह सब इमारत को खाली किए बिना संभव नहीं है।
नई संसद के लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन
सरकार ने कहा, संसद भवन के विस्तार और नवीनीकरण के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा ईएसी (विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति) की अनुशंसा के आधार पर दी गई है। इसके लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है। इसके लिए पर्यावरण, भूजल, वायु प्रदूषण, पेड़ों, यातायात पर पड़ने वाले प्रभाव संबंधित दिशानिर्देशों का पालन किया गया है। साथ ही कहा गया है कि इस परियोजना के लिए मौजूदा पेड़ों को काटा नहीं जाएगा बल्कि ट्रांसप्लांटेशन (पेड़ों को एक जगह से हटाकर दूसरी जगह लगाना) किया जाएगा। इसके अलावा 9.54 एकड़ जमीन हरित क्षेत्र के लिए प्रस्तावित है। इससे पेड़ों की संख्या में इजाफा होगा।
हलफनामे में सीपीडब्ल्यूडी का कहना है कि मौजूदा संसद भवन की इमारत करीब 100 साल पुरानी है। इसकी स्थिति ठीक नहीं हैऔर यह सुविधाओं और प्रौद्योगिकी के मामले में वर्तमान आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम नहीं है। साथ ही मौजूदा ढांचा अपग्रेड भूकंप क्षेत्र -4 की जरूरतों को पूरा नहीं करता। साथ ही अग्नि सुरक्षा भी गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि इमारत, वर्तमान अग्नि मानदंडों को अनुरूप नहीं है। मौजूदा इमारत में व्यापक तौर पर बदलाव की भी आवश्यकता है और यह सब इमारत को खाली किए बिना संभव नहीं है।
नई संसद के लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन
सरकार ने कहा, संसद भवन के विस्तार और नवीनीकरण के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा ईएसी (विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति) की अनुशंसा के आधार पर दी गई है। इसके लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है। इसके लिए पर्यावरण, भूजल, वायु प्रदूषण, पेड़ों, यातायात पर पड़ने वाले प्रभाव संबंधित दिशानिर्देशों का पालन किया गया है। साथ ही कहा गया है कि इस परियोजना के लिए मौजूदा पेड़ों को काटा नहीं जाएगा बल्कि ट्रांसप्लांटेशन (पेड़ों को एक जगह से हटाकर दूसरी जगह लगाना) किया जाएगा। इसके अलावा 9.54 एकड़ जमीन हरित क्षेत्र के लिए प्रस्तावित है। इससे पेड़ों की संख्या में इजाफा होगा।