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केरल: सुधाकरन बोले- नेहरू ने सांप्रदायिक विचारधारा से समझौता कर दिखाई थी उदारता; कांग्रेस नेता ने पार्टी छोड़ी
Mon, 14 Nov 2022 08:49 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोझिकोड
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोझिकोड
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 14 Nov 2022 08:49 PM IST
सार
केरल कांग्रेस प्रमुख सुधाकरन ने कहा कि दशकों पहले जवाहर लाल नेहरू ने मुस्लिम लीग को परेशान किया था और आरएसएस की शाखाओं को संरक्षण दिया था।
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के सुधाकरन।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) प्रमुख के. सुधाकरन ने सोमवार को कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू महान नेता थे। उन्होंने आरएसएस नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी को अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर 'उदारता' दिखाई थी। हालांकि, कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और सत्तारूढ़ माकपा ने उनके बयान की आलोचना की है।
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सुधाकरन कन्नूर जिला कांग्रेस समिति (डीसीसी) द्वारा जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिवस पर आयोजित बाल दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि दशकों पहले उन्होंने (जवाहर लाल नेहरू) मुस्लिम लीग को परेशान किया था और आरएसएस की शाखाओं को संरक्षण दिया था।
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उन्होंने आगे कहा, नेहरू ने अपने मंत्रिमंडल में एक आरएसएस नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी को शामिल कर उदार भाव दिखााया। सांप्रदायिक, फासीवादी विचारधारा के साथ समझौता कर उदारता दिखाई। उन्होंने देश को लोकतंत्र के महान मूल्य दिखाए।
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उन्होंने आगे यह भी कहा, हमें नेहरू से बहुत कुछ सीखना है, हमें उनसे बहुत कुछ समझना है, उनके दिमाग को जानने के लिए हमें उनके बारे में पढ़ना और सीखना होगा। सुधाकरन ने आगे कहा, नेहरू ने डॉ. बी. आर. अंबेडकर को संविधान की जिम्मेदारी दी थी, जो कांग्रेस नेता नहीं थे। नेहरू ने अपनी सरकार में अंबेडकर को कानून मंत्री बनाया।
उन्होंने आगे कहा, आजादी के बाद बनी अंतरिम सरकार में नेहरू द्वारा मुखर्जी को उद्योग और आपूर्ति मंत्री के रूप में शामिल किया गया था। मुखर्जी ने 1951 में सरकार छोड़ दी और आरएसएस की राजनीतिक शाखा भारतीय जनसंघ की स्थापना की। वे जनसंघ के संस्थापक-अध्यक्ष थे, जिसे भाजपा का पुरान अवतार माना जाता है।
हालांकि, आईयूएमएल के वरिष्ठ नेता एम. के. मुनीर ने सुधाकरन की टिप्पणी की आलोचना की है। मुनीर ने उनपर लोगों को उकसाने और फासीवादियों को खुश करने की कोशिश का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ माकपा और मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने अलग-अलग बयानों में केपीसीसी प्रमुख की आलोचना की। विजनय ने उनपर कांग्रेस को संघ परिवार के खेमे में ले जाने की कोशिश का आरोप लगाया।
कोझिकोड में पत्रकारों से बात करते हुए मुनीर ने कहा, अगर सुधाकरन ने इस तरह की टिप्पणी की है, तो निश्चित तौर पर उन्होंने इतिहास को पूरी तरह से नहीं पढ़ा है। नेहरू की पहली चुनावी जीत हिंदू महासभा जैसी फासीवादी ताकतों के खिलाफ थी। कांग्रेस नीत यूडीएफ सरकार में मंत्री रहे मुनीर ने कहा, आईयूएमएल के नेतृत्व में 16 नवंबर को बैठक होगी। इसमें सुधाकरन द्वारा की गई टिप्पणी पर भी चर्चा हो सकती है। आईयूएमएल नेता ने यह भी दावा किया राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन कांग्रेसियों की आरएसएस का समर्थन करने वाली सोच है, उन्हें पार्टी छोड़ देनी चाहिए।
वहीं, मुख्यमंत्री विजयन ने पूछा कि वह इस तरह के प्रयास क्यों कर रहे हैं? उन्होंने नेहरू को एक सच्चा धर्मनिरपेक्ष नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने (नेहरू) 7 दिसंबर, 1947 को मुख्यमंत्री को भेजे एक पत्र में आरएसएस द्वारा पैदा होने वाले खतरे की प्रकृति के बारे में बताया था। उन्होंने एक अन्य पत्र में चेतावनी दी थी कि आरएसएस एक राजनीतिक संगठन नहीं है।
माकपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास सुधाकरन जैसी मानसिकता वाले सांप्रदायिक और आरएसएस समर्थक हमेशा से रहे हैं। विजयन ने दावा किया कि ऐसे ही लोगों के दबाव में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को कांग्रेस सरकार में मंत्री बनाया गया था।
नाराज सीके श्रीधरन ने कांग्रेस छोड़ी
बताया यह भी जा रहा है कि सुधाकरन के बयान से जाराज होकर केरल प्रदेश कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष सीके श्रीधरन ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। वे अब माकपा में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि मैंने कांग्रेस पार्टी छोड़ने का फैसला किया है। मेरी भावी योजना माकपा के साथ काम करने की है, जिसका एलान 17 नवंबर को किया जाएगा। कांग्रेस सभी मोर्चों पर नाकाम साबित हुई है।