अप्रैल से बस एक क्लिक पर पढ़ सकेंगे नेहरू पुस्तकालय के 5 करोड़ दुर्लभ दस्तावेज
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देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की रक्षा व विदेश नीति, नेहरू-गांधी के बीच की राजनीतिक चर्चा, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अर्थशास्त्र से लेकर पीएन हक्कसर के परमाणु पर लिखे रिसर्च पेपर तक, हजारों दुर्लभ दस्तावेजों व किताबों का संग्रहण करने वाला जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल पुस्तकालय आपके मोबाइल पर बस एक क्लिक करते ही ऑनलाइन हाजिर हो जाएगा। अप्रैल से शुरू हो रही इस व्यवस्था के लिए इस पुस्तकालय में मौजूद करीब 5 करोड़ दुर्लभ दस्तावेजों और 3 लाख कीमती किताबों के डिजिटलीकरण का काम तेजी से चल रहा है।
पुस्तकालय प्रशासन ने सभी दस्तावेजों और किताबों को ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए 3 करोड़ रुपये की लागत वालीं दो स्कैनिंग मशीनें खरीदी हैं, जिन पर 20 लोगों की टीम सप्ताह के सातों दिन 24 घंटे काम कर रही हैं। पुस्तकालय प्रशासन को उम्मीद है कि अगले तीन महीने में यहां मौजूद दस्तावेजों के एक बड़े हिस्से का डिजिटलीकरण हो जाएगा, लेकिन पूरे पुस्तकालय को ऑनलाइन करने में अगले पांच साल लग जाएंगे।
डिजिटलीकरण का काम देख रहे डॉक्टर नरेंद्र शुक्ला ने बताया पुस्तकालय के 25 मास्टर कंप्यूटर फरवरी में तकनीकी रूप से सक्षम हो जाएंगे और अप्रैल से शोधार्थी व देश-दुनिया के अन्य लोग थिनक्लाइंट के जरिये इंटरनेट पर जानकारियों को साझा कर सकेंगे। पुस्तकालय के निदेशक शक्ति सिन्हा ने कहा कि सालाना यहां संग्रहालय और पुस्तकालय में लगभग एक हजार विदेशी आते हैं, जिनकी रुचि नेहरू और भारत की आजादी से जुड़े तमाम तरह के अहम दस्तावेजों में होती है। डिजिटलीकरण होने से सभी इसका लाभ ऑनलाइन उठा पाएंगे।
2012 में शुरू हुआ था काम
दरअसल पुस्तकालय के डिजिटलीकरण का काम एक कंपनी को 2012 में सौंपा गया था, लेकिन इस कंपनी ने 3 साल बाद 2015 में काम शुरू किया। इसके बाद भी कंपनी की धीमी गति के कारण आखिरकार छह महीने पर पुस्तकालय प्रशासन ने खुद ही इस काम को अपने हाथ में ले लिया था।
इसलिए है खास
इस पुस्तकालय और संग्रहालय में जवाहर लाल नेहरू से जुड़ीं लगभग दो लाख फोटो, देश की आजादी की लड़ाई और आजाद भारत के प्रमुख नेताओं के दस्तावेज भी यहां मौजूद हैं। खास बात ये है कि इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव हेडगेवार, वीर सावरकर, प्यारे लाल, हिंदू महासभा के भी दस्तावेज संजोए गए हैं। साथ ही आजादी के पहले और बाद के लगभग साढ़े 11 सौ प्रभावशाली व्यक्तियों से जुड़े निजी दस्तावेज भी यहां संग्रहित किए गए हैं।