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विदेश से एमबीबीएस करने के लिए नीट पास करना हुआ जरूरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 04 Oct 2018 06:38 AM IST
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डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए विदेश जाने वाले छात्रों को भी अब नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) अनिवार्य रूप से पास करना होगा। पिछले वर्ष केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की मंजूरी के बाद मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने आदेश जारी किया था, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। इसकी सुनवाई करते हुए जस्टिस एस रविंद्र भट्ट और जस्टिस एके चावला की खंडपीठ ने एमसीआई के आदेश को जायज ठहराया।
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याचिका के तहत स्क्रीनिंग टेस्ट और फॉरेन मेडिकल इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2011 में हुए संशोधनों को चुनौती देते हुए इसमें बदलाव की मांग की गई थी। इनका कहना था कि कानून में किए गए संशोधन तार्किक नहीं हैं। इनके कारण देश के लाखों युवाओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने तमाम पहलुओं पर विचार करने के बाद अपना निर्णय सुनाया।
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दरअसल, 2017 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्णय के बाद एमसीआई ने वर्ष 2018 से विदेश से एमबीबीएस करने के लिए नीट अनिवार्य करने का आदेश जारी किया था। इस आदेश के अनुसार कोई भी भारतीय डॉक्टर की डिग्री कहीं से भी लेता है तो पहले उसे नीट पास करना होगा। यदि कोई विदेशी नागरिक भारत में मेडिकल की पढ़ाई करना चाहता है तो भी उसे नीट पास करना होगा।
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आदेश में ये भी लिखा था कि सत्र 2018-19 से जो भी छात्र विदेशों में मेडिकल पढ़ाई के इच्छुक हों, वे पहले नीट पास कर लें। विदेश जाने के लिए एमसीआई से अर्हता प्रमाण पत्र लेना होता है। यह प्रमाण पत्र उन्हीं को मिलेगा जो नीट पास कर पाएंगे। यदि कोई बिना नीट पास किए विदेश से मेडिकल की डिग्री लेता है तो वह देश में मान्य नहीं होगी। विदेश से मेडिकल की डिग्री लेने के बाद स्क्रीनिंग टेस्ट भी देना होता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की मानें तो विदेश से डॉक्टरी की डिग्री लेकर आने वाले 80 फीसदी नौजवान स्क्रीनिंग टेस्ट के पहले प्रयास में फेल हो जाते हैं। दूसरी तरफ नीट में करीब 12 लाख छात्र हर साल बैठते हैं, जिनमें से छह लाख इसे पास कर लेते हैं, लेकिन देश में सीटें सिर्फ 65 हजार के लिए है।
मंत्रालय का ये भी कहना है कि हर साल 9-10 हजार छात्र मेडिकल की डिग्री लेने के लिए विदेश जाते हैं। अभी चीन में 15 हजार, रूस में सात हजार तथा अन्य देशों में करीब छह हजार छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। विदेश में मेडिकल की पढ़ाई की एक बड़ी वजह सरलता से दाखिला मिलना है। विदेश से मेडिकल की पढ़ाई भारत के निजी कॉलेजों की तुलना में सस्ती भी होती है।