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नतीजे पर सबके अपने दावे: NDA का सवाल- इंडी गठबंधन 15% वोट कहां से लाएगा; विपक्ष बोला- चुनाव तो जनता लड़ रही

Fri, 31 May 2024 02:39 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Fri, 31 May 2024 02:39 PM IST
सार

अमित शाह कहते हैं कि 2019 में सपा-बसपा और रालोद ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ सुभाषपा के ओम प्रकाश राजभर, रालोद के जयंत चौधरी थे। तब स्वामी प्रसाद मौर्य और सैनी ने भी समाजवादी पार्टी के पक्ष में हवा बनाई थी। इस बार केवल कांग्रेस और सपा मिलकर उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ रहे हैं। 

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NDA vs INDIA on Lok Sabha Election 2024 Results Amit Shah claims vs opposition news and updates
मध्यप्रदेश लोकसभा चुनाव 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एनडीए और इंडिया गठबंधन ने 1 जून को आखिरी चरण के मतदान को पक्ष में करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। गृहमंत्री अमित शाह का दावा है कि उत्तर प्रदेश में 2014 दोहराएंगे, पूरे देश में भाजपा और एनडीए के सीटों की संख्या 2019 के आंकड़े को पार करेगी। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के संजय लाठर ने कहा कि अपने मुंह तो कोई भी मिट्ठू बन सकता है। जवाब जनता दे रही है और 4 जून को नतीजे सब साफ कर देंगे।
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अमित शाह कहते हैं कि 2019 में सपा-बसपा और रालोद ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ सुभाषपा के ओम प्रकाश राजभर, रालोद के जयंत चौधरी थे। तब स्वामी प्रसाद मौर्य और सैनी ने भी समाजवादी पार्टी के पक्ष में हवा बनाई थी। इस बार केवल कांग्रेस और सपा मिलकर उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने 2014, 2017, 2019 और 2022 में भाजपा, एनडीए को उत्तर प्रदेश में मिले मतों के आधार पर में सवाल किया है कि एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच में जो 15 प्रतिशत के करीब का वोटों का अंतर है, वह कैसे पूरा होगा?
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2014 और 2019 की सपा, कांग्रेस की सीट मत भूलिए?
ज्ञानेश्वर भाजपा के प्रयागराज में संगठन से जुड़े नेता है। कहते हैं चुनाव में कोई एक फैक्टर काम नहीं करता। मेरी समझ में नहीं आता कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी के मुकाबले विपक्ष के पास कौन सा चेहरा है? भाजपा की तरह पूर्ण बहुमत की सरकार देने वाली कौन सी पार्टी है? ज्ञानेश्वर कहते हैं कि अब वह जमाना लद गया जब जनता जाति, समाज में बंटकर किसी को भी वोट कर देती थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी जातियों और देश के नागरिकों के नेता है। यह जनता का भरोसा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा 80 सीट पर लड़ी, खाता नहीं खुला था। सपा की 05 और कांग्रेस की बस 2 सीट आई थी। 2019 में सपा-बसपा, रालोद साथ मिलकर लड़े तो बसपा की 10, सपा की 5 सीट आई। कांग्रेस 1 सीट पर सिमट गई। 2022 के चुनाव में कुछ लोग समाजवादी पार्टी की सरकार बनवा रहे थे। लेकिन हुआ उल्टा। बसपा का तो बस एक विधायक जीत सका। ज्ञानेश्वर कहते हैं कि भाजपा सरकार में लोगों को जो सुविधाएं (अपराध पर लगाम, पांच किग्रा मुफ्त राशन, उज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास, किसान कल्याण) मिल रही हैं, उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। 
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न हम चुनाव लड़े, न हमारे प्रत्याशियों ने चुनाव में खर्चा किया: संजय लाठर
समाजवादी पार्टी के रणनीतिकार और वरिष्ठ नेता संजय लाठर कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन नहीं था। संजय लाठर कहते हैं कि कहीं भी समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और इसके प्रत्याशी या फिर दोनों के नेता चुनाव नहीं लड़े हैं। हमारे 70 प्रतिशत प्रत्याशियों ने चुनाव में भाजपा, एनडीए के मुकाबले बहुत कम पैसा खर्च किया। यहां तक कि चुनाव में हमने (कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं) ने प्रचार भी तुलना में बहुत कम किया है। लाठर का कहना है कि हमारे पास तो प्रचार के उतने संसाधन भी नहीं थे। कई सीटों पर प्रत्याशी एक से अधिक बार बदले गए, लेकिन यह चुनाव जनता लड़ रही है। लाठर दावा करते हैं कि छठवें चरण तक की 67 में से 37 सीटों पर इंडिया गठबंधन बढ़त बनाता दिखाई दिया है। जबकि भाजपा 14 सीटों पर मजबूत स्थिति में दिखाई दी। 15 सीटों पर इंडिया गठबंधन और एनडीए में कांटे की टक्कर है।

कांग्रेस को भरोसा तीन अंकों में सीट ले आने का
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को लोकसभा चुनाव 2024 से काफी उम्मीद है। मध्य प्रदेश के कांग्रेस के नेता महेन्द्र जोशी को लग रहा है कि बड़ा बदलाव होगा। संजय गांधी के जमाने के उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के कांग्रेस नेता और एडवोकेट प्रदीप पाठक कहते हैं कि 10 साल बाद मैंने जनता के भीतर केन्द्र सरकार की नीतियों को लेकर नाराजगी देखी। मंहगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दे भीतर-भीतर असर कर रहे हैं। विपक्ष राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ पा रहा है लेकिन जनता खामोशी से वोट कर रही है। सुनील कानूगोलू पर कांग्रेस के नेता राहुल गांधी काफी भरोसा करते हैं। सुनील कानूगोलू की टीम के एक सदस्य दावे के साथ कहते हैं कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 04 सीट जीतने जा रही है। तीन पर तगड़ी लड़ाई है। समाजवादी पार्टी 23 सीटों पर जीतने के कगार पर है। 12 सीटों पर कांटे की टक्कर है। सूत्र का कहना है कि देश में इस बार कांग्रेस अकेले 100 सीटों के आंकड़े को छू सकती है। दिल्ली में भी कांग्रेस का खाता खुल सकता है।

...तो क्या कर्नाटक चुनाव जैसे हैं अमित शाह के दावे?
उत्तर प्रदेश के भाजपा के एक नेता मानते हैं कि राज्य में भाजपा को 2019 के आस-पास सीटें मिल सकती हैं। जबकि बसपा अलग चुनाव लड़ी है और सपा-कांग्रेस का गठबंधन शुरुआत में बहुत प्रभावी नहीं था। वरिष्ठ नेता का कहना है कि गाजियाबाद से गोरखपुर तक उन्होंने यात्रा की है। 2019 की तुलना में सीटें न बढ़ने के कारण में सूत्र का कहना है कि मंहगाई, बेरोजगारी मुद्दा थी। विपक्ष का केन्द्र की मोदी सरकार पर संविधान बदलने का राजनीतिक आरोप जनता में निचले स्तर तक गया और एनडीए इसकी मजबूत काट नहीं खड़ी कर सका। 10 साल में लोगों के जीवन में आए बदलाव को ठीक ढंग से प्रचारित करने में चूक हुई। कुछ नुकसान पार्टी के प्रत्याशी के चयन, संगठन की बजाय प्रधानमंत्री के चेहरे पर ही पूरे चुनाव को फोकस करने से हो सकता है। हालांकि केन्द्रीय मंत्री अमित शाह के दावे पर वह कुछ नहीं बोलते। इस बारे में सूत्र का कहना है कि केन्द्रीय गृहमंत्री के पास सूचना प्राप्त करने के मजबूत तंत्र हैं। हो सकता है कि गृहमंत्री का अनुमान सटीक हो। इसलिए 4 जून का इंतजार करना चाहिए।


कांग्रेस के नेता संजीव सिंह कहते हैं कि कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में क्या हुआ था? केन्द्रीय मंत्री अमित शाह तो भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनवा रहे थे? दिल्ली में क्या हुआ? संजीव सिंह कहते हैं कि हर पार्टी का नेता कहता है कि उसकी पार्टी जीतेगी। पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी। अमेठी के कांग्रेस के नेता शैलेन्द्र दूबे कहते हैं कि विपक्ष भाजपा की 200 सीटों के नीचे आने की भविष्यवाणी कर रहा है। यह हम भी जानते हैं कि ऐसा नहीं हो रहा है, लेकिन यह चुनाव है। कार्यकर्ता और जनता का मनोबल बढ़ाने के लिए दावे किए जाते हैं। अमित शाह भी ऐसा ही कर रहे हैं।
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