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कपिल सिब्बल का दावा- पर्सनल लॉ पर एनडीए सरकार ले रही यू-टर्न

Thu, 18 May 2017 11:21 AM IST
amarujala.com, Presented By: हर्षित गौतम
amarujala.com, Presented By: हर्षित गौतम Updated Thu, 18 May 2017 11:21 AM IST
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NDA has made a U-turn on personal law: Kapil Sibal

ट्रिपल तलाक पर चल रही सुनवाई के दौरान बुधवार को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने ट्रिपल तलाक की वैधता के सवाल के जवाब में केंद्र को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा सरकार, 2001 में एनडीए सरकार के स्टैंड का खंडन कर रही है जिसमें कहा गया है कि पर्सनल लॉ भेदभाव के लिए मजबूत आधार हो सकता है।

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सिब्बल ने तर्क दिया कि पर्सनल लॉ में मौजूद ट्रिपल तलाक को गलत या सही नहीं कहा जा सकता क्योंकि ये विश्वास का मामला है। ये संविधान की नैतिकता से बाहर है। वहीं सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि ट्रिपल तलाक का मसला अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक के बीच का नहीं है बल्कि यह मुस्लिम समुदाय के भीतर पुरुष और महिलाओं के बीच का मामला है क्योंकि पुरुष अधिक शक्तिशाली, शिक्षित और कमाने वाला होता है।
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बोर्ड पहले ही दावा कर चुका है कि ट्रिपल तलाक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का ही हिस्सा है ऐसी स्थिति में इसमें लिंग के प्रति समानता और महिलाओं की गरिमा और उनके सम्मान को बनाए रखना चाहिए। इस मामले में अदालत को आगे आने चाहिए और इस प्रथा को समाप्त कर देना चाहिए। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अगर पर्सनल लॉ मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है तो उसे समाप्त कर देना चाहिए।

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कपिल सिब्बल ने दिया शाह बानो केस का हवाला

NDA has made a U-turn on personal law: Kapil Sibal

वहीं कपिल सिब्बल ने शाह बानो केसा का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि तलाकशुदा महिला सीआपीशी के सेक्शन 125 के तहत हर्जाना पाने की हकरदार है। इसके बाद संसद ने मुस्लिम महिला एक्ट 1986 कोर्ट में लाकर सुप्रीम कोर्ट के 1985 के फैसले को पलट दिया।

बाद में इस कानून को डेनियल लतीफी के द्वारा शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई तो सरकार ने 2001 में इसका ये कहते हुए बचाव किया कि इससे संविधान के अनुच्छेद 14 पर कोई असर नहीं पड़ता। सिब्बल ने कहा कि सरकार बदल गई है और कानूनी अधिकार बदल गए हैं।

ऐसे में अब केंद्र इस पर अपना विचार ही बदलने की कोशिश कर रही है। इस वक्त आज जिस बात को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कह रहा है उसी बात को उस वक्त केंद्र की सरकार चीख-चीख कर कह रही थी, कि पर्सनल लॉ से जुड़ी प्रथा संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं करती।

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