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तैयारी: एनडीए में महिला कैडेट्स के पहले बैच का प्रशिक्षण जून से होगा शुरू, ट्रेनिंग में हो सकते हैं कुछ बदलाव
Tue, 22 Mar 2022 06:39 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Tue, 22 Mar 2022 06:39 PM IST
सार
साल 2014-15 में भारतीय सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों की संख्या लगभग 3000 थी। वर्तमान में लगभग 9118 महिलाएं तीनों सेनाओं में सेवाएं दे रही हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
देश के प्रतिष्ठित सैन्य प्रशिक्षण संस्थान नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) महिला कैडेट्स के पहले बैच को इस जून से प्रशिक्षण देने के लिए तैयार है। इस संबंध में मंगलवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि अधिकतर शारीरिक प्रशिक्षण लिंग तटस्थ होंगे, लेकिन इसके कुछ पहलुओं में कुछ बदलाव हो सकते हैं। एनडीए में महिला कैडेट्स के पहले बैच के लिए कुल 19 रिक्तियां हैं। इनमें से 10 भारतीय थल सेना, छह वायु सेना और तीन नौसेना के लिए निर्धारित की गई हैं।
इसकी तैयारियों के हिस्से के रूप में एक स्क्वाड्रन को महिला कैडेट्स के रहने के लिए चिह्नित किया गया है। इसके अलावा मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर को आवश्यकता के अनुसार बढ़ाया जा रहा है। अपने पुरुष समकक्षों के समान, साढ़े 16 से 19 वर्ष की लड़कियों को यूपीएससी-एनडीए लिखित परीक्षा, सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) के साक्षात्कार और चिकित्सा जांच को को सफलतापूर्वक पास करना होगा। इसके बाद उन्हें के बाद तीन साल के सैन्य प्रशिक्षण से गुजरना होगा।
बयान में कहा गया कि मौजूदा पाठ्यक्रम में न्यूनतम बदलाव के साथ शैक्षणिक, ड्रिल और आउटडोर प्रशिक्षण आदि में कैडेट्स को लिंग-तटस्थ तरीके से प्रशिक्षण दिया जाएगा। हालांकि, बयान में यह भी कहा गया है कि पुरुष और महिला कैडेटों के बीच शारीरिक अंतर होने के कारण, शारीरिक प्रशिक्षण के पहलुओं में महिला कैडेटों के प्रशिक्षण में कुछ अनिवार्य बदलाव किए जा सकते हैं। इसके साथ ही महिला कैडेट्स के लिए एक अलग सपोर्ट स्टाफ भी उपलब्ध कराया जाएगा।
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इसकी तैयारियों के हिस्से के रूप में एक स्क्वाड्रन को महिला कैडेट्स के रहने के लिए चिह्नित किया गया है। इसके अलावा मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर को आवश्यकता के अनुसार बढ़ाया जा रहा है। अपने पुरुष समकक्षों के समान, साढ़े 16 से 19 वर्ष की लड़कियों को यूपीएससी-एनडीए लिखित परीक्षा, सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) के साक्षात्कार और चिकित्सा जांच को को सफलतापूर्वक पास करना होगा। इसके बाद उन्हें के बाद तीन साल के सैन्य प्रशिक्षण से गुजरना होगा।
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बयान में कहा गया कि मौजूदा पाठ्यक्रम में न्यूनतम बदलाव के साथ शैक्षणिक, ड्रिल और आउटडोर प्रशिक्षण आदि में कैडेट्स को लिंग-तटस्थ तरीके से प्रशिक्षण दिया जाएगा। हालांकि, बयान में यह भी कहा गया है कि पुरुष और महिला कैडेटों के बीच शारीरिक अंतर होने के कारण, शारीरिक प्रशिक्षण के पहलुओं में महिला कैडेटों के प्रशिक्षण में कुछ अनिवार्य बदलाव किए जा सकते हैं। इसके साथ ही महिला कैडेट्स के लिए एक अलग सपोर्ट स्टाफ भी उपलब्ध कराया जाएगा।
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