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NCRB: देश में हर घंटे 19 आत्महत्या, किसानों-श्रमिकों के जान देने की संख्या बढ़ी, पढ़ें पूरी रिपोर्ट
Tue, 05 Dec 2023 05:56 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Tue, 05 Dec 2023 05:56 AM IST
सार
देशभर में हुईं 18.4 फीसदी आत्महत्याओं की वजह गंभीर बीमारियां रहीं। 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बीमारियों की वजह से आत्महत्या की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही। अंडमान एवं निकोबार द्वीप, पंजाब, तमिलनाडु, सिक्किम और गोवा में बीमारियों की वजह से आत्महत्या की दर सबसे अधिक थी।
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घटनास्थल पर जांच करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
2021 में 1,64,033 आत्महत्याओं के मुकाबले 2022 में 1,70,924 आत्महत्याएं हुई हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 13.3 फीसदी, तमिलनाडु में 11.6 फीसदी, मप्र में नौ, कर्नाटक में आठ और पश्चिम बंगाल में 7.4 फीसदी मामले इन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के सामने आए। आंकड़ों के लिहाज से इनकी गणना की जाए देश में 2022 में हर घंटे 19 लोगों ने आत्महत्या की। खेती-बाड़ी के क्षेत्र में हर घंटे एक से अधिक किसानों और कृषि श्रमिकों ने आत्महत्या की।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट एक्सीडेंटल डेथ्स एंड स्यूसाइड्स इन इंडिया 2022 के अनुसार, वर्ष 2021 में 10,881 किसानों और कृषि श्रमिकों के मुकाबले 2022 में 11,290 लोगों ने आत्महत्या की। कृषि क्षेत्र में महाराष्ट्र में 4,248, कर्नाटक में 2,392, आंध्र में 917 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। 2022 में आत्महत्या करने वाले 5,207 किसानों में 4,999 पुरुष, जबकि 208 महिलाएं थीं। वहीं, आत्महत्या करने वाले 6,083 कृषि श्रमिकों में 5,472 पुरुष और 611 महिलाएं शामिल थीं। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, चंडीगढ़, लक्षद्वीप व पुदुचेरी में कृषि क्षेत्र से संबंधित कोई आत्महत्या दर्ज नहीं की गई।
गंभीर बीमारियां बड़ी वजह
देशभर में हुईं 18.4 फीसदी आत्महत्याओं की वजह गंभीर बीमारियां रहीं। 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बीमारियों की वजह से आत्महत्या की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही। अंडमान एवं निकोबार द्वीप, पंजाब, तमिलनाडु, सिक्किम और गोवा में बीमारियों की वजह से आत्महत्या की दर सबसे अधिक थी।
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14.8% घरेलू महिलाओं ने उठाया घातक कदम
व्यावसायिक क्षेत्र में 2022 के दौरान आत्महत्या करने वालों में सबसे अधिक संख्या 26.4% दिहाड़ी मजदूरों की थी। इसी अवधि के दौरान 14.8% घरेलू महिलाओं ने भी आत्महत्या की, जबकि 2021 में इनकी संख्या क्रमश: 25.6 और 14.1 फीसदी थी।
उत्तर प्रदेश और बिहार बेहतर स्थिति में
2022 में अखिल भारतीय आत्महत्या दर (एक लाख की आबादी पर आत्महत्या) 12.4 फीसदी रही जो इससे पहले 12 फीसदी थी। देशभर के 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में आत्महत्या दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही, जबकि 17 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में यह दर राष्ट्रीय औसत से कम थी। इस मामले में सबसे बेहतर स्थिति उत्तर प्रदेश, बिहार, मणिपुर, नगालैंड, जम्मू-कश्मीर और लक्षद्वीप की रही।
बच्चों के खिलाफ अपराध में 8.7 फीसदी की वृद्धि
2022 में बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल 1,62,449 मामले दर्ज किए गए, जो 2021 (1,49,404 मामले) की तुलना में 8.7 फीसदी अधिक हैं। इसमें 45.7 फीसदी मामले अपहरण और बंधक बनाए जाने और 39.7 फीसदी यौन उत्पीड़न से जुड़े थे।
साइबर अपराध बेतहाशा बढ़े
2022 में साइबर अपराधों के देशभर में 65,893 मामले दर्ज किए गए, जो 2021 में दर्ज 52,974 मामलों की तुलना में 24.4 फीसदी अधिक हैं। वहीं, 19 महानगरों में साइबर अपराध से जुड़े मामलों में 42.7 फीसदी की वृद्धि हुई। साइबर अपराध के सबसे ज्यादा 64.8 फीसदी मामले (42,710) धोखाधड़ी के मकसद से जुड़े थे। 5.5 फीसदी (3,648 मामले) जबरन वसूली और 5.2 फीसदी (3,434 मामले) यौन शोषण के थे।
यूएपीए के 75 फीसदी से अधिक मामले 4 राज्यों में
2022 में देश में यूएपीए कुल मामलों में से 75 फीसदी से अधिक मामले जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, असम और उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए, जबकि अकेले प. बंगाल में राजद्रोह के एक-चौथाई मामले दर्ज किए गए। 2022 में देश में आईपीसी की धारा 124ए (राजद्रोह) के कुल 20 मामले दर्ज किए गए, जबकि गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत 1,005 मामले दर्ज किए गए। यूएपीए के सबसे अधिक 371 मामले जम्मू-कश्मीर में, उसके बाद मणिपुर में 167, असम में 133 और यूपी में 101 दर्ज हुए। राजद्रोह के सबसे अधिक 5 मामले बंगाल में दर्ज किए गए, उसके बाद जम्मू-कश्मीर, मणिपुर और यूपी में 3-3 मामले दर्ज किए गए।
राजद्रोह के मामलों में आई कमी
2020 के बाद से राजद्रोह के मामलों में कमी आई है, जबकि यूएपीए के तहत दर्ज मामलों में पिछले तीन वर्षों में वृद्धि देखी गई है। 2021 में देश में राजद्रोह के 76 और यूएपीए के 814 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2020 में इसके आंकड़े क्रमश: 73 और 796 थे।
सरकार के खिलाफ अपराध की श्रेणी में मामले बढ़े
सरकार के खिलाफ अपराध की श्रेणी के तहत 2021 में 5,164 मामलों की तुलना में 2022 में 5,610 मामले दर्ज किए गए। 2022 में कुल मामलों में से 78.5 फीसदी सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम (4,403 मामले) के तहत दर्ज किए गए।
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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट एक्सीडेंटल डेथ्स एंड स्यूसाइड्स इन इंडिया 2022 के अनुसार, वर्ष 2021 में 10,881 किसानों और कृषि श्रमिकों के मुकाबले 2022 में 11,290 लोगों ने आत्महत्या की। कृषि क्षेत्र में महाराष्ट्र में 4,248, कर्नाटक में 2,392, आंध्र में 917 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। 2022 में आत्महत्या करने वाले 5,207 किसानों में 4,999 पुरुष, जबकि 208 महिलाएं थीं। वहीं, आत्महत्या करने वाले 6,083 कृषि श्रमिकों में 5,472 पुरुष और 611 महिलाएं शामिल थीं। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, चंडीगढ़, लक्षद्वीप व पुदुचेरी में कृषि क्षेत्र से संबंधित कोई आत्महत्या दर्ज नहीं की गई।
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गंभीर बीमारियां बड़ी वजह
देशभर में हुईं 18.4 फीसदी आत्महत्याओं की वजह गंभीर बीमारियां रहीं। 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बीमारियों की वजह से आत्महत्या की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही। अंडमान एवं निकोबार द्वीप, पंजाब, तमिलनाडु, सिक्किम और गोवा में बीमारियों की वजह से आत्महत्या की दर सबसे अधिक थी।
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14.8% घरेलू महिलाओं ने उठाया घातक कदम
व्यावसायिक क्षेत्र में 2022 के दौरान आत्महत्या करने वालों में सबसे अधिक संख्या 26.4% दिहाड़ी मजदूरों की थी। इसी अवधि के दौरान 14.8% घरेलू महिलाओं ने भी आत्महत्या की, जबकि 2021 में इनकी संख्या क्रमश: 25.6 और 14.1 फीसदी थी।
उत्तर प्रदेश और बिहार बेहतर स्थिति में
2022 में अखिल भारतीय आत्महत्या दर (एक लाख की आबादी पर आत्महत्या) 12.4 फीसदी रही जो इससे पहले 12 फीसदी थी। देशभर के 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में आत्महत्या दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही, जबकि 17 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में यह दर राष्ट्रीय औसत से कम थी। इस मामले में सबसे बेहतर स्थिति उत्तर प्रदेश, बिहार, मणिपुर, नगालैंड, जम्मू-कश्मीर और लक्षद्वीप की रही।
बच्चों के खिलाफ अपराध में 8.7 फीसदी की वृद्धि
2022 में बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल 1,62,449 मामले दर्ज किए गए, जो 2021 (1,49,404 मामले) की तुलना में 8.7 फीसदी अधिक हैं। इसमें 45.7 फीसदी मामले अपहरण और बंधक बनाए जाने और 39.7 फीसदी यौन उत्पीड़न से जुड़े थे।
साइबर अपराध बेतहाशा बढ़े
2022 में साइबर अपराधों के देशभर में 65,893 मामले दर्ज किए गए, जो 2021 में दर्ज 52,974 मामलों की तुलना में 24.4 फीसदी अधिक हैं। वहीं, 19 महानगरों में साइबर अपराध से जुड़े मामलों में 42.7 फीसदी की वृद्धि हुई। साइबर अपराध के सबसे ज्यादा 64.8 फीसदी मामले (42,710) धोखाधड़ी के मकसद से जुड़े थे। 5.5 फीसदी (3,648 मामले) जबरन वसूली और 5.2 फीसदी (3,434 मामले) यौन शोषण के थे।
यूएपीए के 75 फीसदी से अधिक मामले 4 राज्यों में
2022 में देश में यूएपीए कुल मामलों में से 75 फीसदी से अधिक मामले जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, असम और उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए, जबकि अकेले प. बंगाल में राजद्रोह के एक-चौथाई मामले दर्ज किए गए। 2022 में देश में आईपीसी की धारा 124ए (राजद्रोह) के कुल 20 मामले दर्ज किए गए, जबकि गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत 1,005 मामले दर्ज किए गए। यूएपीए के सबसे अधिक 371 मामले जम्मू-कश्मीर में, उसके बाद मणिपुर में 167, असम में 133 और यूपी में 101 दर्ज हुए। राजद्रोह के सबसे अधिक 5 मामले बंगाल में दर्ज किए गए, उसके बाद जम्मू-कश्मीर, मणिपुर और यूपी में 3-3 मामले दर्ज किए गए।
राजद्रोह के मामलों में आई कमी
2020 के बाद से राजद्रोह के मामलों में कमी आई है, जबकि यूएपीए के तहत दर्ज मामलों में पिछले तीन वर्षों में वृद्धि देखी गई है। 2021 में देश में राजद्रोह के 76 और यूएपीए के 814 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2020 में इसके आंकड़े क्रमश: 73 और 796 थे।
सरकार के खिलाफ अपराध की श्रेणी में मामले बढ़े
सरकार के खिलाफ अपराध की श्रेणी के तहत 2021 में 5,164 मामलों की तुलना में 2022 में 5,610 मामले दर्ज किए गए। 2022 में कुल मामलों में से 78.5 फीसदी सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम (4,403 मामले) के तहत दर्ज किए गए।