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करीब 16 फीसदी मामलों में नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म, सजा की दर महज 27.2 फीसदी

Thu, 01 Oct 2020 10:47 PM IST
गौरव पाण्डेय अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 01 Oct 2020 10:47 PM IST
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NCRB Crime in India 2019 report sexual harassment of girl children
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट 2019 के अनुसार दुष्कर्म की कुल घटनाओं में 15.4 प्रतिशत मामलों में छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया गया। दुष्कर्म की 84.6 फीसदी घटनाओं में पीड़िताओं की उम्र 18 वर्ष या उससे ज्यादा थी। 18 वर्ष से कम आयु की इन बच्चियों की उम्र कई मामलों में दो-तीन वर्ष से भी कम पाई गई है। 2019 में सबसे ज्यादा राजस्थान में 1314 बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद केरल में 1271 बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं घटी थीं।

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वरिष्ठ वकील आभा सिंह ने अमर उजाला को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के कारण दुष्कर्म के मामले वापस नहीं लिए जा सकते। इसी प्रकार दुष्कर्म की पीड़िता और आरोपी के बीच कोई समझौता भी नहीं किया जा सकता। लेकिन आरोप झूठे पाए जाने या सबूतों के अभाव के कारण दुष्कर्म के भारी संख्या में मामले अदालतों में निरस्त कर दिए जाते हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक दुष्कर्म के 27.2 फीसदी मामलों में ही आरोपियों को सजा हो पाती है। यह आंकड़ा विधि विशेषज्ञों और महिला कल्याण क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के लिए चिंता का विषय है।
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उन्होंने कहा कि दुष्कर्म के मामलों में केवल 27.2 फीसदी आरोपियों को ही सजा हो पाना बताता है कि इन मामलों की जांच सही तरीके से नहीं की जा रही है और अदालतों के सामने ठोस सबूत नहीं पेश किए जा रहे हैं। इससे समाज में गलत संदेश जाता है कि आरोपी इतनी संगीन वारदात को अंजाम देने के बाद भी अदालतों से बच निकलता है।
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गत वर्ष ऐसे मामलों में सजा की दर 32 फीसदी के करीब थी जो कुछ बेहतर थी। लेकिन अब इसका और अधिक नीचे गिरना दुष्कर्मियों के हौंसले बुलंद करने वाला है। हालांकि, इनमें ऐसे मामले भी शामिल होते हैं जिनमें महिलाएं कई वर्षों तक लिव इन में साथ रहने के बाद अपने पुरुष साथियों पर दुष्कर्म के आरोप लगा देती हैं। कई बार परिस्थितियों को देखते हुए अदालतें इसे दुष्कर्म की श्रेणी में रखना ठीक नहीं समझती हैं।


केस दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकती पुलिस 
वर्ष 2013 में आईपीसी में हुए परिवर्तन के कारण अब किसी भी थाने में दुष्कर्म की शिकायत दर्ज करना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर आरोपी पुलिस अधिकारियों पर धारा 166-A के तहत केस दर्ज किया जा सकता है। आरोप साबित होने पर पुलिस अधिकारी को छह महीने से दो साल तक की सजा भी हो सकती है। लेकिन इतने स्पष्ट कानून के बाद भी यही सामने आता है कि पुलिस दुष्कर्म के मामले दर्ज करने में अनाकानी करती है। हाथरस की घटना में भी ऐसा ही हुआ है। हालांकि, अब पुलिस के मुताबिक घटना में दुष्कर्म होने से इनकार किया गया है।

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