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NCP: अजित बोले- सुप्रिया-प्रफुल्ल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने से नाखुश नहीं, नेता प्रतिपक्ष की है जिम्मेदारी
Sat, 10 Jun 2023 02:36 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 10 Jun 2023 02:36 PM IST
सार
एनसीपी में शरद पवार के भतीजे अजित पवार को यह अहम पद न देना अपने आप में कई सियासी संकेत देता है। दरअसल, पवार ने यह एलान एनसीपी की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर किए। इस दौरान अजित पवार मंच पर ही मौजूद थे।
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शरद पवार-सुप्रिया सुले (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
विस्तार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में पिछले महीने शरद पवार की ओर से पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद जो भूचाल आया था, वह उनके इस्तीफा वापस लेने के बाद ही थमा था। हालांकि, इससे पार्टी में अंदरूनी हितों से जुड़े मुद्दे खुलकर सतह पर आ गए थे। इस बीच राकांपा में संगठन में बड़े बदलाव किए गए हैं। शरद पवार की ओर से एनसीपी में अब दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए हैं। इनमें शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले का नाम भी शामिल है। वहीं, दूसरा नाम प्रफुल्ल पटेल का है।
इस बीच एनसीपी में शरद पवार के भतीजे अजित पवार को यह अहम पद न देना अपने आप में कई सियासी संकेत देता है। दरअसल, पवार ने यह एलान एनसीपी की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर किए। इस दौरान अजित पवार मंच पर ही मौजूद थे। पवार ने प्रफुल्ल पटेल को मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, झारखंड, गोवा राज्य के अलावा राज्यसभा की जिम्मेदारी सौंपी। वहीं, सुप्रिया सुले के पास महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, यूपी और लोकसभा की जिम्मेदारी दी गई है।
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कार्यकारी अध्यक्ष पद के बंटवारे पर क्या बोले छगन भुजबल
इस बीच राकांपा नेता छगन भुजबल ने शरद पवार के एलान पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कार्यकारी अध्यक्ष के एलान के साथ ही चुनाव का काम और लोकसभा-राज्यसभा का काम बंट जाएगा। उन्हें चुनाव नजदीक आने के साथ ही कंधों पर ज्यादा जिम्मेदारी दी गई है। यह 2024 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अहम एलान है।
अजित पवार के भाजपा में जाने की लगी थी अटकलें
दो महीने पहले ही शरद पवार के इस्तीफे की वापसी के बाद अजित पवार के भाजपा में शामिल होने की अटकलें लग रही थीं। हालांकि, अजित ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि वह एनसीपी में हैं और एनसीपी में ही रहेंगे। अजित पवार ने कहा कि 'मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसी खबरें फैलाई जा रही हैं।' उन्होंने कहा था कि 'पार्टी जो भी फैसला करेगी, मैं उसके साथ रहूंगा।'
शरद पवार का परिवार: सूखे के चलते परिवार ने किया था पलायन, 11 भाई-बहनों में एक शहीद, जानें बाकियों के बारे में?
अजित ने ही किया था शरद पवार के इस्तीफे का समर्थन
दो महीने पहले जब शरद पवार ने राकांपा अध्यक्ष पद छोड़ने का अचानक से एलान किया था। तब अजित पवार ही एकमात्र ऐसे नेता थे, जिन्होंने शरद पवार के इस्तीफे का समर्थन किया था और पार्टी के अन्य नेताओं को इसका सम्मान करने को कहा था। हालांकि, बाद में शरद पवार ने पार्टी के कहने पर अपना इस्तीफा वापस ले लिया था।
नाखुश नहीं हूं, नेता प्रतिपक्ष की है जिम्मेदारीः अजीत
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता अजित पवार ने शनिवार को मीडिया में आई उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा है कि सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को संगठन का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने से वह नाखुश हैं और उन्हें शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी में कोई भूमिका नहीं दी गई। राकांपा की स्थापना की 24वीं वर्षगांठ के मौके पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में शरद पवार ने पटेल और सुले को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया है।
अजित पवार ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा, कुछ मीडिया चैनलों ने खबरें चलाईं कि अजित पवार को कोई जिम्मेदारी नहीं मिली, मैं उन्हें बताना चाहूंगा कि मेरे पास महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी है। राज्य की राजनीति में अपनी पसंद से सक्रिय होने की बात पर जोर देते हुए राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा, 'पिछले कई सालों से सुप्रिया दिल्ली में हैं। मैं राज्य की राजनीति में सक्रिय हूं। मेरे पास राज्य की जिम्मेदारी है क्योंकि मैं विपक्ष का नेता हूं।'
संयोग से, राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कार्यक्रम के बाद दिल्ली में बोलते हुए इन बातों को खारिज कर दिया कि सुले की नियुक्ति ने भतीजे अजीत पवार को परेशान किया है। पवार ने कहा, यह सुझाव उन्होंने (अजित पवार ने) ही दिया था। ऐसे में उनके खुश या नाखुश होने का सवाल ही कहां उठता है।
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इस बीच एनसीपी में शरद पवार के भतीजे अजित पवार को यह अहम पद न देना अपने आप में कई सियासी संकेत देता है। दरअसल, पवार ने यह एलान एनसीपी की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर किए। इस दौरान अजित पवार मंच पर ही मौजूद थे। पवार ने प्रफुल्ल पटेल को मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, झारखंड, गोवा राज्य के अलावा राज्यसभा की जिम्मेदारी सौंपी। वहीं, सुप्रिया सुले के पास महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, यूपी और लोकसभा की जिम्मेदारी दी गई है।
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कार्यकारी अध्यक्ष पद के बंटवारे पर क्या बोले छगन भुजबल
इस बीच राकांपा नेता छगन भुजबल ने शरद पवार के एलान पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कार्यकारी अध्यक्ष के एलान के साथ ही चुनाव का काम और लोकसभा-राज्यसभा का काम बंट जाएगा। उन्हें चुनाव नजदीक आने के साथ ही कंधों पर ज्यादा जिम्मेदारी दी गई है। यह 2024 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अहम एलान है।
अजित पवार के भाजपा में जाने की लगी थी अटकलें
दो महीने पहले ही शरद पवार के इस्तीफे की वापसी के बाद अजित पवार के भाजपा में शामिल होने की अटकलें लग रही थीं। हालांकि, अजित ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि वह एनसीपी में हैं और एनसीपी में ही रहेंगे। अजित पवार ने कहा कि 'मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसी खबरें फैलाई जा रही हैं।' उन्होंने कहा था कि 'पार्टी जो भी फैसला करेगी, मैं उसके साथ रहूंगा।'
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अजित ने ही किया था शरद पवार के इस्तीफे का समर्थन
दो महीने पहले जब शरद पवार ने राकांपा अध्यक्ष पद छोड़ने का अचानक से एलान किया था। तब अजित पवार ही एकमात्र ऐसे नेता थे, जिन्होंने शरद पवार के इस्तीफे का समर्थन किया था और पार्टी के अन्य नेताओं को इसका सम्मान करने को कहा था। हालांकि, बाद में शरद पवार ने पार्टी के कहने पर अपना इस्तीफा वापस ले लिया था।
नाखुश नहीं हूं, नेता प्रतिपक्ष की है जिम्मेदारीः अजीत
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता अजित पवार ने शनिवार को मीडिया में आई उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा है कि सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को संगठन का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने से वह नाखुश हैं और उन्हें शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी में कोई भूमिका नहीं दी गई। राकांपा की स्थापना की 24वीं वर्षगांठ के मौके पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में शरद पवार ने पटेल और सुले को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया है।
अजित पवार ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा, कुछ मीडिया चैनलों ने खबरें चलाईं कि अजित पवार को कोई जिम्मेदारी नहीं मिली, मैं उन्हें बताना चाहूंगा कि मेरे पास महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी है। राज्य की राजनीति में अपनी पसंद से सक्रिय होने की बात पर जोर देते हुए राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा, 'पिछले कई सालों से सुप्रिया दिल्ली में हैं। मैं राज्य की राजनीति में सक्रिय हूं। मेरे पास राज्य की जिम्मेदारी है क्योंकि मैं विपक्ष का नेता हूं।'
संयोग से, राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कार्यक्रम के बाद दिल्ली में बोलते हुए इन बातों को खारिज कर दिया कि सुले की नियुक्ति ने भतीजे अजीत पवार को परेशान किया है। पवार ने कहा, यह सुझाव उन्होंने (अजित पवार ने) ही दिया था। ऐसे में उनके खुश या नाखुश होने का सवाल ही कहां उठता है।