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'दोनों दल फैसले लेने के लिए स्वतंत्र': राकांपा विलय की खबरों पर बोले फडणवीस; पवार परिवार में पक रही नई खिचड़ी?
Sat, 07 Nov 2026 05:33 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नागपुर।
पीटीआई, नागपुर।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 07 Nov 2026 05:33 PM IST
सार
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि दोनों राकांपा धड़े अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन विलय की स्थिति में महायुति से सलाह लेनी होगी। इसके साथ ही उन्होंने गोकुल डेयरी विवाद पर कहा कि सरकार का किसी संस्था पर कब्जा करने का इरादा नहीं है और दोनों पक्षों को बातचीत से मामला सुलझाना चाहिए। क्या है पूरा मामला? जानिए...
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राकांपा विलय की खबरों पर सीएम फडणवीस का बयान
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अजित पवार की राकांपा और शरद पवार की राकांपा (एसपी) दो अलग-अलग पार्टियां हैं। दोनों दल अपने फैसले लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। हाल ही में प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार की मुलाकात का एक वीडियो सामने आने के बाद दोनों धड़ों के फिर से एक होने की चर्चाएं बहुत तेज हो गई थीं।
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विलय को लेकर दोनों पार्टियां अपने स्तर पर खुद फैसला करेंगी। लेकिन अगर ऐसी कोई बातचीत आगे बढ़ती है, तो वे राजग को भरोसे में लेकर सलाह जरूर लेंगे। फिलहाल किसी भी पक्ष ने इस बारे में भाजपा या गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं से कोई बात नहीं की है।
गोकुल डेयरी विवाद को लेकर क्यों बढ़ा सियासी बवाल?
कोल्हापुर की मशहूर गोकुल डेयरी के चुनावों को लेकर भी राज्य का सियासी माहौल काफी गरमा गया है। हाल ही में हुए चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल ने कुल 25 में से 13 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद राज्य मंत्रिमंडल ने एक ऐसा प्रस्ताव तैयार किया, जिससे सरकार को बोर्ड में पांच नए निदेशक नियुक्त करने का अधिकार मिल सकता है। सरकार के इस कदम के बाद विपक्षी दलों और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला और इसे जनादेश का अपमान बताया।
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यह भी पढ़ें: एक्सप्लेनर: पहले अमित शाह से मुलाकात, फिर शरद पवार से बात; राकांपा में क्यों फूट की अटकलें, किस ओर जाएगा दल?
गोकुल डेयरी विवाद पर सरकार का पलटवार
विपक्ष के तमाम आरोपों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का गोकुल डेयरी पर कब्जा करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने समझाया कि यह एक जिला स्तर की संस्था है जिसका असर सिर्फ कुछ तालुकों तक सीमित है। ऐसे में सरकार के पास एक स्थानीय डेयरी को नियंत्रित करने का कोई कारण नहीं है। फडणवीस ने दोनों पक्षों को आपस में बैठकर विवाद सुलझाने की सलाह दी और कहा कि कोई कानूनी संकट आने पर ही सरकार को अपना काम करना पड़ता है।
पवार परिवार में विलय की सुगबुगाहट क्यों?
महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के दोनों धड़ों के बीच संभावित विलय को लेकर चर्चाएं काफी जोरों पर हैं, जिसकी शुरुआत वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल के हाल ही में मुंबई के एक अस्पताल में शरद पवार से मुलाकात करने और 10 नवंबर के बाद बैठक की संभावना जताने वाले एक वायरल वीडियो से हुई। इसके बाद, राकांपा नेता सुनील तटकरे के इस बड़े दावे ने इन अटकलों को और हवा दे दी कि यदि दिवंगत अजित पवार आज जीवित होते, तो दोनों गुटों का यह बहुप्रतीक्षित विलय फरवरी महीने में ही हो चुका होता।
हालांकि, इन चर्चाओं के बीच यह भी याद दिलाना जरूरी है कि अतीत में भी राजनीतिक परिस्थितियों के चलते दोनों पक्षों के बीच सुलह और साथ आने की अटकलें समय-समय पर तैरती रही हैं, लेकिन इस बार परिवार के भीतर बढ़ती नजदीकियों और नेताओं के बयानों ने महाराष्ट्र की सियासत में एक नए समीकरण की सुगबुगाहट को फिर से तेज कर दिया है।
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सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विलय को लेकर दोनों पार्टियां अपने स्तर पर खुद फैसला करेंगी। लेकिन अगर ऐसी कोई बातचीत आगे बढ़ती है, तो वे राजग को भरोसे में लेकर सलाह जरूर लेंगे। फिलहाल किसी भी पक्ष ने इस बारे में भाजपा या गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं से कोई बात नहीं की है।
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गोकुल डेयरी विवाद को लेकर क्यों बढ़ा सियासी बवाल?
कोल्हापुर की मशहूर गोकुल डेयरी के चुनावों को लेकर भी राज्य का सियासी माहौल काफी गरमा गया है। हाल ही में हुए चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल ने कुल 25 में से 13 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद राज्य मंत्रिमंडल ने एक ऐसा प्रस्ताव तैयार किया, जिससे सरकार को बोर्ड में पांच नए निदेशक नियुक्त करने का अधिकार मिल सकता है। सरकार के इस कदम के बाद विपक्षी दलों और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला और इसे जनादेश का अपमान बताया।
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गोकुल डेयरी विवाद पर सरकार का पलटवार
विपक्ष के तमाम आरोपों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का गोकुल डेयरी पर कब्जा करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने समझाया कि यह एक जिला स्तर की संस्था है जिसका असर सिर्फ कुछ तालुकों तक सीमित है। ऐसे में सरकार के पास एक स्थानीय डेयरी को नियंत्रित करने का कोई कारण नहीं है। फडणवीस ने दोनों पक्षों को आपस में बैठकर विवाद सुलझाने की सलाह दी और कहा कि कोई कानूनी संकट आने पर ही सरकार को अपना काम करना पड़ता है।
पवार परिवार में विलय की सुगबुगाहट क्यों?
महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के दोनों धड़ों के बीच संभावित विलय को लेकर चर्चाएं काफी जोरों पर हैं, जिसकी शुरुआत वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल के हाल ही में मुंबई के एक अस्पताल में शरद पवार से मुलाकात करने और 10 नवंबर के बाद बैठक की संभावना जताने वाले एक वायरल वीडियो से हुई। इसके बाद, राकांपा नेता सुनील तटकरे के इस बड़े दावे ने इन अटकलों को और हवा दे दी कि यदि दिवंगत अजित पवार आज जीवित होते, तो दोनों गुटों का यह बहुप्रतीक्षित विलय फरवरी महीने में ही हो चुका होता।
हालांकि, इन चर्चाओं के बीच यह भी याद दिलाना जरूरी है कि अतीत में भी राजनीतिक परिस्थितियों के चलते दोनों पक्षों के बीच सुलह और साथ आने की अटकलें समय-समय पर तैरती रही हैं, लेकिन इस बार परिवार के भीतर बढ़ती नजदीकियों और नेताओं के बयानों ने महाराष्ट्र की सियासत में एक नए समीकरण की सुगबुगाहट को फिर से तेज कर दिया है।