पीएम पर भड़कीं सुप्रिया सुले: महाराष्ट्र के प्रति मन में नफरत होने का लगाया आरोप, कहा- दिल्ली के आगे न झुके हैं और न झुकेंगे
सुप्रिया सुले ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री का महाराष्ट्र को निशाना बनाना दुखद है, जिसने 2019 के आम चुनाव में उनकी पार्टी की जीत में अहम योगदान किया था।
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की नेता सुप्रिया सुले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि महाराष्ट्र ने अन्य राज्यों में कोरोना वायरस संक्रमण फैलाया है। उन्होंने हैरत व्यक्त की कि प्रधानमंत्री के मन में महाराष्ट्र के लिए इतनी नफरत क्यों है। पीएम मोदी ने सोमवार को विपक्ष पर कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान प्रवासियों को डराकर मुंबई छोड़ने के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार है।
सुप्रिया सुले ने कहा, 'मुझे हैरत होती है कि प्रधानमंत्री को बार-बार महाराष्ट्र की आलोचना करके, राज्य से प्रमुख परियोजनाओं को हटा के और मुंबई के महत्व को अनदेखा करते कौन सा सुख प्राप्त होता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। महाराष्ट्र दिल्ली की सत्ता के आगे कभी नहीं झुका है और न कभी झुकेगा।' सुले ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने उत्तर में महाराष्ट्र के खिलाफ जो भी दावे किए, उनमें कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को लोकसभा में कही थी यह बात
प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन के समय महाराष्ट्र से प्रवासी मजदूरों के पलायन को लेकर कहा था, 'कांग्रेस के नेताओं ने क्या किया? वह मुंबई में रेलवे स्टेशनों पर खड़े रहे और उन्हें मुफ्त में टिकट बांटकर मुंबई से जाने के लिए प्रोत्साहित करते रहे। उन्होंने लोगों को जाने के लिए इसलिए प्रोत्साहित किया जिससे महाराष्ट्र पर बोझ कम हो सके। आप उत्तर प्रदेश जाइए, आप बिहार जाइए। जाइए, वहां कोरोना फैलाइए। आपने यह पाप किया और अफरा-तफरी का माहौल तैयार किया।'
'प्रवासी श्रमिकों के महाराष्ट्र से ज्यादा गुजरात से ट्रेनें चलाई गईं'
बारामती से लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को महाराष्ट्र का अपमान करते हुए देखना मेरे लिए दुखद था। हमें उम्मीद थी कि वह चीन, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर बोलेंगे। इसके साथी ही सुले ने यह आरोप भी लगाया कि कोविड-19 महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों के लिए ट्रेनें महाराष्ट्र से ज्यादा गुजरात से चलाई गईं थी। रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि गुजरात से प्रवासियों के लिए 1033 ट्रेनें चलीं, जबकि महाराष्ट्र से 817 श्रमिक ट्रेनें ही चलाई गई थीं।