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NCP: एनसीपी में क्या होगा प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे का भविष्य?, दिल्ली में होगा तय, फिलहाल पद पर बने रहेंगे
Sat, 16 May 2026 07:27 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 16 May 2026 07:27 PM IST
सार
एनसीपी की ओर से कहा गया है, "दिवंगत अजित दादा के निधन के बाद एनसीपी उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और राष्ट्रीय महासचिव पार्थ पवार के नेतृत्व में और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सांसद प्रफुल्ल पटेल के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है।"
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एनसीपी में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर विराम
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों पर शनिवार को विराम लग गया। सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राकांपा ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पार्टी में अपने-अपने संगठनात्मक पदों पर पहले के जैसे ही बने रहेंगे। एनसीपी की ओर से कहा गया है कि प्रफुल्ल पटेल राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और सुनील तटकरे महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख के रूप में पूरी शक्ति के साथ कार्यभार संभालते रहेंगे।
हाल ही में एनसीपी की ओर से चुनाव आयोग को भेजे गए एक पत्र के चलते संगठनात्मक फेरबदल की अफवाहों को हवा मिली थी। एक संवाददाता सम्मेलन में एनसीपी नेताओं अविनाश आदिक और उमेश पाटिल ने बताया कि यह केवल एक लिपिकीय त्रुटि थी। उन्होंने कहा कि पार्टी जल्द ही चुनाव आयोग को एक नया पत्र भेजेगी, जिसमें पटेल और तटकरे सहित पार्टी संगठन के भीतर जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का स्पष्ट जिक्र होगा।
सुनेत्रा पवार के पत्र के बाद अटकलों को मिली हवा
इस पत्र के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही थीं कि एनसीपी के नेतृत्व में बदलाव होने वाला है। इसकी के साथ प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की भूमिकाएं भी बदली जाएंगी। इन अटकलों को सुनेत्रा पवार की 29 अप्रैल को चुनाव आयोग को भेजे गए एक पत्र से हवा मिली। इसमें लिखी सूची में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के नाम नवगठित राष्ट्रीय कार्यकारिणी से गायब थे।
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हालांकि, उन्हें नवगठित राष्ट्रीय कार्यकारी समिति में शामिल किया गया था, लेकिन उन्हें क्रमशः राज्यसभा और लोकसभा में एनसीपी नेता के रूप में नामित किया गया था। उनके राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और महाराष्ट्र राज्य अध्यक्ष के रूप में पदनाम का जिक्र न होने के कारण उन्हें पार्टी के कामकाज में दरकिनार किए जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं।
एनसीपी बोली- नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं
उमेश पाटिल ने इन रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, "प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पहले की तरह अपने पदों पर बने रहेंगे। चुनाव आयोग को भेजी गई चिट्ठी में एक लिपिकीय त्रुटि थी, जिसके कारण मीडिया में अनावश्यक गलतफहमी हुई।"
राष्ट्रीय अधिवेशन में होंगे महत्वपूर्ण फैसले
पाटिल ने आगे कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जल्द ही दिल्ली में एक राष्ट्रीय अधिवेशन (प्रमुख नेताओं की बैठक) बुलाएंगे। जब तक आंतरिक पार्टी चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक पार्टी संगठन के लिए शीर्ष राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों के चयन के साथ-साथ आंतरिक संगठनात्मक और प्रशासनिक पदाधिकारियों की नियुक्ति इस अधिवेशन में होगी।
चुनाव आयोग को एनसीपी भेजेगी नई सूची
एनसीपी नेताओं ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास उस पत्राचार में जरूरी बदलाव या संशोधन करने का अधिकार है। पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान उचित निर्णय लिए जाएंगे। पाटिल ने दोहराया कि पार्टी की विस्तारित राष्ट्रीय कार्यकारी समिति और सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के लिए नए सिरे से चुनाव होने तक, सभी वर्तमान प्रदेश अध्यक्षों और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के पद पूर्व व्यवस्था के अनुसार कार्य करते रहेंगे।
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हाल ही में एनसीपी की ओर से चुनाव आयोग को भेजे गए एक पत्र के चलते संगठनात्मक फेरबदल की अफवाहों को हवा मिली थी। एक संवाददाता सम्मेलन में एनसीपी नेताओं अविनाश आदिक और उमेश पाटिल ने बताया कि यह केवल एक लिपिकीय त्रुटि थी। उन्होंने कहा कि पार्टी जल्द ही चुनाव आयोग को एक नया पत्र भेजेगी, जिसमें पटेल और तटकरे सहित पार्टी संगठन के भीतर जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का स्पष्ट जिक्र होगा।
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सुनेत्रा पवार के पत्र के बाद अटकलों को मिली हवा
इस पत्र के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही थीं कि एनसीपी के नेतृत्व में बदलाव होने वाला है। इसकी के साथ प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की भूमिकाएं भी बदली जाएंगी। इन अटकलों को सुनेत्रा पवार की 29 अप्रैल को चुनाव आयोग को भेजे गए एक पत्र से हवा मिली। इसमें लिखी सूची में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के नाम नवगठित राष्ट्रीय कार्यकारिणी से गायब थे।
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हालांकि, उन्हें नवगठित राष्ट्रीय कार्यकारी समिति में शामिल किया गया था, लेकिन उन्हें क्रमशः राज्यसभा और लोकसभा में एनसीपी नेता के रूप में नामित किया गया था। उनके राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और महाराष्ट्र राज्य अध्यक्ष के रूप में पदनाम का जिक्र न होने के कारण उन्हें पार्टी के कामकाज में दरकिनार किए जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं।
एनसीपी बोली- नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं
उमेश पाटिल ने इन रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, "प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पहले की तरह अपने पदों पर बने रहेंगे। चुनाव आयोग को भेजी गई चिट्ठी में एक लिपिकीय त्रुटि थी, जिसके कारण मीडिया में अनावश्यक गलतफहमी हुई।"
राष्ट्रीय अधिवेशन में होंगे महत्वपूर्ण फैसले
पाटिल ने आगे कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जल्द ही दिल्ली में एक राष्ट्रीय अधिवेशन (प्रमुख नेताओं की बैठक) बुलाएंगे। जब तक आंतरिक पार्टी चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक पार्टी संगठन के लिए शीर्ष राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों के चयन के साथ-साथ आंतरिक संगठनात्मक और प्रशासनिक पदाधिकारियों की नियुक्ति इस अधिवेशन में होगी।
चुनाव आयोग को एनसीपी भेजेगी नई सूची
एनसीपी नेताओं ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास उस पत्राचार में जरूरी बदलाव या संशोधन करने का अधिकार है। पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान उचित निर्णय लिए जाएंगे। पाटिल ने दोहराया कि पार्टी की विस्तारित राष्ट्रीय कार्यकारी समिति और सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के लिए नए सिरे से चुनाव होने तक, सभी वर्तमान प्रदेश अध्यक्षों और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के पद पूर्व व्यवस्था के अनुसार कार्य करते रहेंगे।