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तैयारी: कोरोना काल में बच्चों का बोझ हल्का करेगी एनसीईआरटी, नए साल में समीक्षा के बाद हटाए जाएंगे पुराने कोर्स
Fri, 31 Dec 2021 08:05 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Fri, 31 Dec 2021 08:05 PM IST
सार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुसार, एनसीईआरटी पहले ही राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा (एनसीएफ) के अंतर्गत पाठ्यक्रम में सुधार लाने पर काम कर रही है। एनसीएफ देशभर के निजी और सरकारी स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले विषयों और पाठ्यक्रम सामग्री की एक व्यापक रूपरेखा तैयार करती है।
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विस्तार
कोविड महामारी के इस दौर ने बच्चों की पढ़ाई को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। अब बच्चे स्कूल जाने के बजाए घर से ही ऑनलाइन क्लास के जरिए अपना कोर्स पूरा कर रहे हैं। ऐसे में स्कूली छात्रों पर कोर्स पूरा करने का बोझ तेजी से बढ़ता जा रहा है। बच्चों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए छात्रों के पाठ्यक्रम के बोझ को हल्का करने का फैसला किया है।
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अमर उजाला को मिली जानकारी के अनुसार 15 दिसंबर को एनसीईआरटी प्रभारी निदेशक सुधीर श्रीवास्तव ने सभी विभागाध्यक्षों को पत्र लिखकर पाठ्यक्रम कम करने के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर पेश करने के लिए कहा है। इस संदर्भ में जल्द ही सभी विभागाध्यक्ष अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। इस रिपोर्ट में यह सुझाव दिए जाएंगे कि आगामी शैक्षणिक सत्र के पाठ्यक्रम से क्या क्या निकाला जा सकता है ताकि पाठ्यक्रम को पहले के मुकाबले थोड़ा हल्का किया जा सके।
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विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जब भी पाठ्यक्रम घटाने की कोशिश की जाती है तो ज्यादातर दोहराए गए विषयों या उन विषयों को हटाने पर गौर किया जाता है, जिनकी लंबी व्याख्या की जरूरत नहीं थी। फिलहाल एक्सपर्ट्स ऐसे विषयों को निकालने पर विचार कर रहे हैं, जो या तो उसी क्लास में या किसी दूसरे पाठ या दूसरी क्लास में पहले भी पढ़ाए जा चुके हैं। नए पाठ्यक्रम को लेकर विशेषज्ञों के सुझावों के अध्ययन किए जाने के बाद, काउंसिल और अधिक ब्यौरा जारी करेगा।
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पिछले दो वर्षों में कोविड-19 के चलते स्कूलों के शैक्षणिक सत्रों में कई बार रुकावटें आई हैं। वहीं बच्चों की क्लास भी पहले की तरह रेगुलर नहीं लग सकी है। इस दौरान अधिकांश बच्चों ने ऑनलाइन ही पढ़ाई की है। जबकि कई छात्र ऑनलाइन संसाधन उपलब्ध नहीं होने के चलते पढ़ाई भी नहीं कर सके। इसी को देखते हुए पाठ्यक्रम में बदलाव भी किया जा रहा है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुसार, एनसीईआरटी पहले ही राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा (एनसीएफ) के अंतर्गत पाठ्यक्रम में सुधार लाने पर काम कर रही है। एनसीएफ देशभर के निजी और सरकारी स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले विषयों और पाठ्यक्रम सामग्री की एक व्यापक रूपरेखा तैयार करती है। चूंकि एनसीएफ एक बृहद अभ्यास है और इसे अंतिम रूप देने में समय लगेगा, इसलिए एक्सपर्ट्स इस बीच अगले वर्ष के लिए बोझ को हल्का करने में लगे हैं।
गौरतलब है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने भी 2020 में कोरोना महामारी के दौर में बच्चों पर दबाव कम करने के लिए इसी तरह का प्रयास किया था। बोर्ड ने 9वीं से 12 तक के पाठ्यक्रम में बदलाव किए थे।