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बुनियाद: साल-दर-साल घटा या बढ़ा खेल बजट, देश में क्रिकेट से इतर अन्य खेलों में इन्फ्रास्ट्रक्चर कैसा?

Sun, 29 Aug 2021 09:05 AM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार संभव Updated Sun, 29 Aug 2021 09:05 AM IST
सार

सवाल यह है कि साल 2024 में पेरिस ओलंपिक से पहले खिलाड़ियों से किए जा रहे वादे क्या पूरे हो पाएंगे? क्या देश में क्रिकेट से इतर अन्य खेलों में प्रशिक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी बुनियादी दिक्कतें दूर हो जाएंगी? 

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National Sports day Sports budget of India in last five years sai khelo india sports federation Major Dhyan Chand news and updates
देश में ऐसा है खेलों का हाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

टोक्यो ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया और लंदन ओलंपिक की यादों को पीछे छोड़ दिया। इस दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने ओलंपिक इतिहास में सबसे ज्यादा सात मेडल (एक गोल्ड, दो सिल्वर और चार ब्रॉन्ज मेडल) जीते। इसके बाद सरकार ने खिलाड़ियों पर इनाम की बारिश कर दी तो खेलों को बढ़ावा देने के लिए तमाम वादे भी किए। अब सवाल यह है कि साल 2024 में पेरिस ओलंपिक से पहले क्या ये वादे पूरे हो पाएंगे? क्या देश में क्रिकेट से इतर अन्य खेलों में प्रशिक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी बुनियादी दिक्कतें दूर हो जाएंगी? खेल दिवस के मौके पर इस रिपोर्ट में जानते हैं कि साल-दर-साल खेल बजट बढ़ा या घटा? इसके अलावा क्रिकेट से इतर देश में अन्य खेलों का इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा है?

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ओलंपिक वाले साल में ही घट गया खेल बजट

यह अहम बात है कि पिछले पांच-छह साल के दौरान खेलों पर फोकस काफी ज्यादा बढ़ाया गया। इसका असर खेल बजट में भी दिखाई दिया, लेकिन जब देश टोक्यो ओलंपिक की तैयारियों में जुटा था तो बजट में खासी कटौती कर दी गई। दरअसल, केंद्र सरकार ने खेलों के लिए 2020-21 में 2,596 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया, जो पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले 230.78 करोड़ रुपये कम था। यानी सरकार ने ओलंपिक गेम्स वाले साल में ही खेल बजट में 8.16 फीसदी की कटौती कर दी थी। हालांकि, इस कटौती के पीछे कोरोना महामारी के चलते एक साल तक खेलकूद नहीं होने का हवाला दिया गया।

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'खेलो इंडिया' से खिलाड़ियों को मिली नई पहचान

फेडरेशन की राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और प्रतिभा को सही प्रशिक्षण न मिलने से देश में खिलाड़ियों को अक्सर परेशान होना पड़ता था। न तो उन्हें सही डाइट मिलती थी और न ही सुविधाएं, जिससे ओलंपिक जैसे बड़े आयोजनों में इसका असर नजर आता था। इसके बाद खेलो इंडिया की शुरुआत की गई तो खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का नया रास्ता मिला। वहीं, सरकार ने भी खेलों पर अपना ध्यान बढ़ा दिया। खेल बजट भी लगातार बढ़ाया गया, जिससे खिलाड़ियों के लिए स्टेडियम आदि की सहूलियत बढ़ाने पर काम किया गया। उन्हें विदेशों में प्रशिक्षण भी दिलाया गया। गौर करने वाली बात यह है कि खेलो इंडिया के पहले चरण की शुरुआत भले ही 2018-19 में हुई, लेकिन सरकार ने इसके लिए बजट का प्रावधान 2015-16 से ही शुरू कर दिया था। 

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साई के बजट में न के बराबर इजाफा

कहने को स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी साई देश के खेल मंत्रालय का अहम हिस्सा है, लेकिन खेलो इंडिया के प्रति रुझान बढ़ने के बाद पिछले पांच साल के दौरान साई के बजट में खासा इजाफा नजर नहीं आया। साई का बजट 2015-16 के दौरान करीब 407 करोड़ रुपये था, जो 2020-21 तक महज 500 करोड़ हो पाया। बता दें कि यह संस्थान अपनी खेल प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से युवाओं की प्रतिभा निखारने का काम करता है। इसके अलावा उन्हें जरूरी सुविधाएं, प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के मौके देता है।

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