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NMC: 231 मेडिकल कॉलेज कागजों पर दे रहे पीजी डॉक्टरों को मेहनताना, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का पहला सर्वे

Sat, 26 Aug 2023 05:55 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 26 Aug 2023 05:55 AM IST
सार

एनएमसी के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा विनियमन-2000 के बिंदु 13 के तहत सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्रों को समान वजीफा लेने का अधिकार प्राप्त है।

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National Medical Commission survey 231 Medical Colleges giving remuneration to PG doctors on paper
सांकेतिक फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश के निजी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के मेहनताना को लेकर चल रही मनमानी पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने हैरानी जताई है। सख्त नियमों के बाद भी अधिकतर निजी कॉलेज छात्रों को वजीफा नहीं दे रहे हैं। कई कॉलेज बैंक खाते में राशि जमा कराते हैं और उसके कुछ दिन बाद जबरन डॉक्टरों से कैश में पूरा वापस ले लेते हैं।

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आयोग का कहना है कि शिकायत के बाद जब इसकी जांच के लिए छात्रों ने अपनी आपबीती सुनाई तो हैरान कर दिया। एनएमसी उप सचिव औजेंद्र सिंह ने सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि महीने भर में डॉक्टरों को वजीफा नहीं दिया तो कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी जाएगी।  एनएमसी के अनुसार, पीजी छात्रों की शिकायत पर देश के 21 राज्यों के 231 निजी मेडिकल कॉलेजों में सर्वे कराया गया। इस दौरान 10,178 छात्रों से बातचीत में पता चला कि 7,626 छात्रों के साथ धोखाधड़ी हो रही है। 2,110 छात्रों को वजीफा नहीं दिया जा रहा है। 4,288 छात्रों ने कम वजीफा देने की बात कही तो 1,228 छात्रों ने कहा, वजीफे का भुगतान तो होता है लेकिन कुछ दिन बाद कॉलेज को वापस भी करना पड़ता है।

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क्या कहता है नियम  
एनएमसी के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा विनियमन-2000 के बिंदु 13 के तहत सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्रों को समान वजीफा लेने का अधिकार प्राप्त है। यह हैरानी की बात है कि निजी कॉलेजों की लंबे समय से यह धांधली चल रही है लेकिन अब तक इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। एनएमसी ने सभी मेडिकल कॉलेजों को लेकर भी जांच शुरू कर दी है। इसमें एमबीबीएस और पीजी चिकित्सा छात्रों से कॉलेज के बारे में जानकारी ली जा रही है।

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नियम एक समान लेकिन वेतन अलग  
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में 358 सरकारी और 296 निजी मेडिकल कॉलेज हैं। इनके अलावा 157 कॉलेज केंद्र की प्रायोजित योजना के तहत स्वीकृत हैं। इन कॉलेजों में एमबीबीएस की एक लाख और पीजी छात्रों की करीब 68 हजार सीटें हैं। मेडिकल कॉलेजों के लिए नियम पूरे देश में एक समान हैं लेकिन चिकित्सा छात्रों का वेतन अलग अलग है। उदाहरण के तौर पर तमिलनाडु में इन छात्रों को 35,000 रुपये प्रति माह से लेकर 102838 रुपये (ईएसआईसी संस्थान) तक मासिक मिलता है। उत्तर प्रदेश में एमडी माइक्रोबायोलॉजी की पढ़ाई करने वाले पीजी छात्र को प्रति माह 15,600- 39100 रुपये से लेकर 109955 रुपये तक मासिक दिए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में वजीफा एकसमान  
एनएमसी के आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और पंजाब में सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में भुगतान किए जाने वाले वजीफे के बीच सबसे अधिक अंतर है। हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात ही ऐसे राज्य हैं, जहां निजी कॉलेज उतना ही वजीफा देते हैं, जितना सरकारी कॉलेज देते हैं। ऐसे कई राज्य हैं, जहां अभी तक पीजी सीटों वाला कोई निजी मेडिकल कॉलेज नहीं है, क्योंकि इनमें से कई कॉलेज पिछले कुछ वर्षों में ही शुरू हुए हैं।


 
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