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Navy: भारतीय नौसेना में पहली महिला फाइटर पायलट बनीं सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया, रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम
Fri, 04 Jul 2025 05:06 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विशाखापत्तनम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विशाखापत्तनम
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 04 Jul 2025 05:06 PM IST
सार
सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते भारतीय नौसेना में पहली महिला फाइटर पायलट बन गईं हैं। इस दौरान उन्हें 'विंग्स ऑफ गोल्ड' से नवाजा गया है। वहीं एक दिन पहले, रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने करीब ₹1.05 लाख करोड़ की लागत वाली 10 रक्षा खरीद योजनाओं को मंजूरी दी।
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सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया बनीं नौसेना में पहली महिला फाइटर पायलट
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारतीय नौसेना ने इतिहास रच दिया है। सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया को आधिकारिक रूप से नौसेना के फाइटर स्ट्रीम में शामिल कर लिया गया है। वे इस स्ट्रीम में जगह पाने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। इससे महिला अधिकारियों के लिए लड़ाकू भूमिकाओं के द्वार खुल गए हैं।
'विंग्स ऑफ गोल्ड' से आस्था पूनिया हुईं सम्मानित
आस्था पूनिया को 'विंग्स ऑफ गोल्ड' सम्मान प्रदान किया गया, जो नौसेना की फाइटर पायलट बनने की पात्रता का प्रतीक है। यह सम्मान उन्हें रियर एडमिरल जनक बेवली, सहायक नौसेना स्टाफ (एयर) की तरफ से आईएनएस डेगा, विशाखापत्तनम में दिया गया। इस मौके पर लेफ्टिनेंट अतुल कुमार ढुल को भी यह सम्मान प्राप्त हुआ। यह समारोह 'सेकेंड बेसिक हॉक कन्वर्जन कोर्स' की सफल समाप्ति पर आयोजित हुआ था।
यह भी पढ़ें - India-China Relations: 13 जुलाई से चीन के तीन दिवसीय दौरे पर जाएंगे जयशंकर, SCO शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल
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'विंग्स ऑफ गोल्ड' से आस्था पूनिया हुईं सम्मानित
आस्था पूनिया को 'विंग्स ऑफ गोल्ड' सम्मान प्रदान किया गया, जो नौसेना की फाइटर पायलट बनने की पात्रता का प्रतीक है। यह सम्मान उन्हें रियर एडमिरल जनक बेवली, सहायक नौसेना स्टाफ (एयर) की तरफ से आईएनएस डेगा, विशाखापत्तनम में दिया गया। इस मौके पर लेफ्टिनेंट अतुल कुमार ढुल को भी यह सम्मान प्राप्त हुआ। यह समारोह 'सेकेंड बेसिक हॉक कन्वर्जन कोर्स' की सफल समाप्ति पर आयोजित हुआ था।
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भारतीय नौसेना (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : ANI
1.05 लाख करोड़ की खरीद योजनाओं को मंजूरी
वहीं एक दिन पहले, रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने करीब ₹1.05 लाख करोड़ की लागत वाली 10 रक्षा खरीद योजनाओं को मंजूरी दी। यह बैठक ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार आयोजित की गई थी। इसमें कई रक्षा उपकरण शामिल हैं।
यह भी पढ़ें - Defence: DAC ने ₹1.05 लाख करोड़ के 10 सैन्य खरीद प्रस्तावों को दी मंजूरी, रक्षा तैयारियों को मिलेगा बड़ा बल
वहीं एक दिन पहले, रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने करीब ₹1.05 लाख करोड़ की लागत वाली 10 रक्षा खरीद योजनाओं को मंजूरी दी। यह बैठक ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार आयोजित की गई थी। इसमें कई रक्षा उपकरण शामिल हैं।
- त्वरित प्रतिक्रिया सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें
- नौसेना पोत
- आर्मर्ड रिकवरी वाहन
- इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम
- त्रि-सेना के लिए संयुक्त इन्वेंट्री प्रबंधन प्रणाली
- मूव्ड माइंस और माइंस से सुरक्षा के लिए विशेष जहाज़
- सुपर रैपिड गन माउंट्स
- स्वायत्त डूब सकने वाले पोत
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भारतीय नौसेना
- फोटो : ANI
ऑपरेशन सिंदूर के बाद डीएसी की बैठक
यह बैठक ऐसे समय हुई जब हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। यह ऑपरेशन 7 मई को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में किया गया था जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। भारतीय सेना ने सीमाओं को पार किए बिना, आतंकियों के ठिकानों को सटीक तरीके से निशाना बनाकर जवाब दिया।
सेना के लिए नई मिसाइल प्रणाली
30 जून को रक्षा सूत्रों ने बताया था कि त्रि-सेनाओं ने कई प्रस्ताव प्रस्तुत किए थे। इसमें सबसे महत्वपूर्ण था – डीआरडीओ की तरफ से विकसित क्विक रिएक्शन सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, जिसकी अनुमानित लागत ₹30,000 करोड़ है। यह प्रणाली 30 किलोमीटर तक के हवाई लक्ष्यों को मार गिराने में सक्षम होगी। तीन एयरक्राफ्ट मूल निर्माता से खरीदे जाएंगे और उन्हें डीआरडीओ के एयरबोर्न सिस्टम्स केंद्र और निजी भागीदारों की मदद से विशेष कार्यों के लिए बदला जाएगा।
यह बैठक ऐसे समय हुई जब हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। यह ऑपरेशन 7 मई को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में किया गया था जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। भारतीय सेना ने सीमाओं को पार किए बिना, आतंकियों के ठिकानों को सटीक तरीके से निशाना बनाकर जवाब दिया।
सेना के लिए नई मिसाइल प्रणाली
30 जून को रक्षा सूत्रों ने बताया था कि त्रि-सेनाओं ने कई प्रस्ताव प्रस्तुत किए थे। इसमें सबसे महत्वपूर्ण था – डीआरडीओ की तरफ से विकसित क्विक रिएक्शन सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, जिसकी अनुमानित लागत ₹30,000 करोड़ है। यह प्रणाली 30 किलोमीटर तक के हवाई लक्ष्यों को मार गिराने में सक्षम होगी। तीन एयरक्राफ्ट मूल निर्माता से खरीदे जाएंगे और उन्हें डीआरडीओ के एयरबोर्न सिस्टम्स केंद्र और निजी भागीदारों की मदद से विशेष कार्यों के लिए बदला जाएगा।