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नरेंद्र मोदी यानी राजनीति में सपनों का सौदागर
राजदीप सरदेसाई वरिष्ठ टीवी पत्रकार/ बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
Updated Fri, 10 Mar 2017 01:11 PM IST
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एक मार्च को मैंने एक लेख लिखा था कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आ रही है। मैंने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग और जो फीडबैक मिले थे, उसके आधार पर अनुमान लगाया था। ये नहीं कह सकता कि मैं सौ प्रतिशत सही हूं, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में जहां इतनी ज्यादा विधानसभा सीटें हैं और इतने ज्यादा वोटर हैं।
ऐसे में किसको कितनी सीटें आएंगी, इसका अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है। लेकिन गुरुवार को जो एग्जिट पोल आए हैं, खासकर इंडिया टुडे चैनल पर जो एग्जिट पोल मैंने होस्ट किया है, उसने एक ट्रेंड पकड़ा है।
ये वास्तविक आंकड़े हैं, ऐसा नहीं है लेकिन जो ट्रेंड हैं उससे साफ है कि यूपी में बीजेपी को बढ़त हासिल है। अगर ये एग्जिट पोल सही रहा तो ये माना जाएगा उत्तर प्रदेश में मोदी को लेकर लहर है। यानी, 2014 में 73 सीटों पर जीत दिलाने वाली लहर बरकरार है।
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ऐसे में किसको कितनी सीटें आएंगी, इसका अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है। लेकिन गुरुवार को जो एग्जिट पोल आए हैं, खासकर इंडिया टुडे चैनल पर जो एग्जिट पोल मैंने होस्ट किया है, उसने एक ट्रेंड पकड़ा है।
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ये वास्तविक आंकड़े हैं, ऐसा नहीं है लेकिन जो ट्रेंड हैं उससे साफ है कि यूपी में बीजेपी को बढ़त हासिल है। अगर ये एग्जिट पोल सही रहा तो ये माना जाएगा उत्तर प्रदेश में मोदी को लेकर लहर है। यानी, 2014 में 73 सीटों पर जीत दिलाने वाली लहर बरकरार है।
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बीजेपी की नहीं, मोदी की बढ़त
यहां एक बात ध्यान देने लायक है, उत्तर प्रदेश में ये बढ़त बीजेपी की नहीं है, ये नरेंद्र मोदी की बढ़त है। दरअसल नरेंद्र मोदी जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं, उसे मैं 360 डिग्री की राजनीति कह रहा हूं। उन्होंने पब्लिक मूड को कैप्चर कर लिया है। चाहे वो नोटबंदी का मसला हो, चाहे पाकिस्तान के खिलाफ उनकी रणनीति हो या फिर उज्ज्वला स्कीम ही क्यों ना हो, इन सबसे उन्होंने अपनी एक छवि बना ली है।
ये छवि ऐसे नेता की है जो कठोर निर्णय ले सकता है, लोगों का दिल जीत सकता है। उनके राजनीतिक तौर तरीकों को देखिए- वे रोड शो भी करना जानते हैं, सोशल मीडिया पर दमदार उपस्थिति दर्ज कराते हैं। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को धीरे-धीरे कमजोर करने का खेल भी उन्हें आता है।
इसके लिए मोदी ने जोड़-तोड़ का सहारा भी लिया है, उत्तराखंड में कांग्रेस के नेताओं को तोड़ा, उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के स्वामी प्रसाद मौर्या को अपने साथ मिलाया। इसके साथ-साथ नरेंद्र मोदी जाति की राजनीति भी कर रहे हैं। यूपी में गैर यादव ओबीसी को खास तरह से फोकस किया।
ये छवि ऐसे नेता की है जो कठोर निर्णय ले सकता है, लोगों का दिल जीत सकता है। उनके राजनीतिक तौर तरीकों को देखिए- वे रोड शो भी करना जानते हैं, सोशल मीडिया पर दमदार उपस्थिति दर्ज कराते हैं। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को धीरे-धीरे कमजोर करने का खेल भी उन्हें आता है।
इसके लिए मोदी ने जोड़-तोड़ का सहारा भी लिया है, उत्तराखंड में कांग्रेस के नेताओं को तोड़ा, उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के स्वामी प्रसाद मौर्या को अपने साथ मिलाया। इसके साथ-साथ नरेंद्र मोदी जाति की राजनीति भी कर रहे हैं। यूपी में गैर यादव ओबीसी को खास तरह से फोकस किया।
बीजेपी की नहीं, मोदी की बढ़त
यहां एक बात ध्यान देने लायक है, उत्तर प्रदेश में ये बढ़त बीजेपी की नहीं है, ये नरेंद्र मोदी की बढ़त है। दरअसल नरेंद्र मोदी जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं, उसे मैं 360 डिग्री की राजनीति कह रहा हूं। उन्होंने पब्लिक मूड को कैप्चर कर लिया है। चाहे वो नोटबंदी का मसला हो, चाहे पाकिस्तान के खिलाफ उनकी रणनीति हो या फिर उज्ज्वला स्कीम ही क्यों ना हो, इन सबसे उन्होंने अपनी एक छवि बना ली है।
ये छवि ऐसे नेता की है जो कठोर निर्णय ले सकता है, लोगों का दिल जीत सकता है। उनके राजनीतिक तौर तरीकों को देखिए- वे रोड शो भी करना जानते हैं, सोशल मीडिया पर दमदार उपस्थिति दर्ज कराते हैं। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को धीरे-धीरे कमजोर करने का खेल भी उन्हें आता है।
इसके लिए मोदी ने जोड़-तोड़ का सहारा भी लिया है, उत्तराखंड में कांग्रेस के नेताओं को तोड़ा, उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के स्वामी प्रसाद मौर्या को अपने साथ मिलाया। इसके साथ-साथ नरेंद्र मोदी जाति की राजनीति भी कर रहे हैं। यूपी में गैर यादव ओबीसी को खास तरह से फोकस किया।
ये छवि ऐसे नेता की है जो कठोर निर्णय ले सकता है, लोगों का दिल जीत सकता है। उनके राजनीतिक तौर तरीकों को देखिए- वे रोड शो भी करना जानते हैं, सोशल मीडिया पर दमदार उपस्थिति दर्ज कराते हैं। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को धीरे-धीरे कमजोर करने का खेल भी उन्हें आता है।
इसके लिए मोदी ने जोड़-तोड़ का सहारा भी लिया है, उत्तराखंड में कांग्रेस के नेताओं को तोड़ा, उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के स्वामी प्रसाद मौर्या को अपने साथ मिलाया। इसके साथ-साथ नरेंद्र मोदी जाति की राजनीति भी कर रहे हैं। यूपी में गैर यादव ओबीसी को खास तरह से फोकस किया।
मोदी अपने प्रतिद्वंद्वियों के लिए कोई मौका
इसके अलावा कब्रिस्तान और श्मशान का मुद्दा भी उठाते हैं। साथ ही वे विकास का मुद्दा भी उठाना जानते हैं, गरीबों के विकास की बात भी करते हैं। यानी सबको मिला दीजिए तो यह जाहिर होता है कि नरेंद्र मोदी, अपने प्रतिद्वंद्वियों के लिए कोई मौका, कोई स्पेस ही नहीं छोड़ रहे हैं और आम लोगों को ये भरोसा दिलाने में कामयाब हो रहे हैं कि वे उनके विकास के लिए हर तरह का काम करने के लिए तैयार हैं।
दरअसल, नरेंद्र मोदी की इस राजनीति ने सोशल इंजीनियरिंग की पुरानी राजनीति को एक हद तक बेमानी बना दिया है। पुरानी सोशल इंजीनियरिंग का तरीका मायावती और मुलायम की धुरी हुआ करता था। मुलायम ने यादव और मुस्लिम को जोड़ लिया था, तो वे एक ताकत बन गए। मायावती ने दलितों के साथ एक बड़े समुदाय ब्राह्मण को जोड़कर चुनाव जीतने का करिश्मा 2007 में दिखाया था।
लेकिन नई पीढ़ी इस तरह की राजनीति से ऊब गई है। अगर उत्तर प्रदेश में कोई पार्टी एक जाति या एक समुदाय को महत्त्व देगी तो उसके खिलाफ माहौल बनता है। अगर आप हर जगह यादव या जाटव को फायदा देंगे, तो उसके खिलाफ भी एक प्रतिक्रिया होगी।
दरअसल, नरेंद्र मोदी की इस राजनीति ने सोशल इंजीनियरिंग की पुरानी राजनीति को एक हद तक बेमानी बना दिया है। पुरानी सोशल इंजीनियरिंग का तरीका मायावती और मुलायम की धुरी हुआ करता था। मुलायम ने यादव और मुस्लिम को जोड़ लिया था, तो वे एक ताकत बन गए। मायावती ने दलितों के साथ एक बड़े समुदाय ब्राह्मण को जोड़कर चुनाव जीतने का करिश्मा 2007 में दिखाया था।
लेकिन नई पीढ़ी इस तरह की राजनीति से ऊब गई है। अगर उत्तर प्रदेश में कोई पार्टी एक जाति या एक समुदाय को महत्त्व देगी तो उसके खिलाफ माहौल बनता है। अगर आप हर जगह यादव या जाटव को फायदा देंगे, तो उसके खिलाफ भी एक प्रतिक्रिया होगी।
लगातार बदलाव
मगर ऐसा भी नहीं है कि सोशल इंजीनियरिंग की अहमियत नहीं है। उत्तर भारत की राजनीति में सोशल इंजीनियरिंग का महत्त्व अभी भी है, यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) में से गैर यादव 150 लोगों को अपना उम्मीदवार बनाया।
लेकिन जातिगत समीकरणों के साथ-साथ विकास की नैया भी बढ़ाने की जरूरत है। साथ में एक लीडरशिप वाली क्वॉलिटी भी दिखानी होगी। ये सब नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। दरअसल, पहले भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता,
बाद में गुजरात के मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री के तौर पर अपने सफर में नरेंद्र मोदी खुद को रिइन्वेंट करते रहे हैं, लगातार बदलाव ला रहे हैं। वे कुछ ना कुछ करते रहे हैं, जिससे लगता है कि उनकी गाड़ी थम ही नहीं रही है।
लेकिन जातिगत समीकरणों के साथ-साथ विकास की नैया भी बढ़ाने की जरूरत है। साथ में एक लीडरशिप वाली क्वॉलिटी भी दिखानी होगी। ये सब नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। दरअसल, पहले भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता,
बाद में गुजरात के मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री के तौर पर अपने सफर में नरेंद्र मोदी खुद को रिइन्वेंट करते रहे हैं, लगातार बदलाव ला रहे हैं। वे कुछ ना कुछ करते रहे हैं, जिससे लगता है कि उनकी गाड़ी थम ही नहीं रही है।
मोदी लोगों को बड़ी चतुराई से दिखाते है सपने
वे हमेशा से बोलने में माहिर नेता रहे हैं, लेकिन कब बोलना है, कितना बोलना है, कैसे बोलना है- मुझे तो लगता है कि राजनीतिक चाल-ढाल और कम्युनिकेशन के मास्टर बन चुके हैं। इससे भी आगे जाकर कहें तो वो सपनों के सौदागर बन गए हैं। लोगों के सामने सपने रखते हैं। वो भी बड़ी चतुराई से। आम आदमी को इससे लगता है कि वाकई में नरेंद्र मोदी मेरे लिए कुछ करेगा, कुछ बदलाव लाएगा।
वाकई कुछ होता है या नहीं इसकी असलियत तो तभी पता चलेगी जब उनकी सरकार के पांच साल पूरे होते हैं। हालांकि ढाई साल बीतने के बाद भी आज की तारीख में लोग उनके दिखाए सपनों पर भरोसा कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के आम लोगों ने मायावती को भी देख लिया है, अखिलेश को भी परख लिया। अब वो कह रहे हैं कि किसी और को भी देख लें। ऐसे में ये साफ है कि वो भारतीय जनता पार्टी को वोट दे रहे हैं तो कमल को देखकर नहीं दे रहे हैं, नरेंद्र मोदी पर विश्वास रखकर वोट दे रहे हैं।
वाकई कुछ होता है या नहीं इसकी असलियत तो तभी पता चलेगी जब उनकी सरकार के पांच साल पूरे होते हैं। हालांकि ढाई साल बीतने के बाद भी आज की तारीख में लोग उनके दिखाए सपनों पर भरोसा कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के आम लोगों ने मायावती को भी देख लिया है, अखिलेश को भी परख लिया। अब वो कह रहे हैं कि किसी और को भी देख लें। ऐसे में ये साफ है कि वो भारतीय जनता पार्टी को वोट दे रहे हैं तो कमल को देखकर नहीं दे रहे हैं, नरेंद्र मोदी पर विश्वास रखकर वोट दे रहे हैं।
मोदी को समर्थन
उन्हें ऐसा लग रहा है नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं और उनकी सरकार लखनऊ में हो तो वे हमारे लिए कुछ करेंगे। आम लोगों का ये वोट भारतीय जनता पार्टी की लोकल लीडरशिप के लिए नहीं है, बल्कि यह नरेंद्र मोदी को मिला समर्थन होगा। हालांकि उनके इस करिश्मे के बाद भी पंजाब में भारतीय जनता पार्टी हार रही है, तो इसकी वजह नरेंद्र मोदी नहीं है।
दरअसल पंजाब में अकालियों को लेकर लोगों में काफी गुस्सा है। जब आम लोगों में गुस्सा होता है तो कोई भी हो, उसे हार का सामना करना पड़ता है। उत्तर प्रदेश में अगर भारतीय जनता पार्टी की सरकार आती है, तो नरेंद्र मोदी मजबूत होंगे।
वे इंदिरा गांधी के बाद राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेता के तौर पर स्थापित हो सकते हैं। कम से कम मेरा अनुमान और एग्जिट पोल तो यही जाहिर कर रहे हैं।
दरअसल पंजाब में अकालियों को लेकर लोगों में काफी गुस्सा है। जब आम लोगों में गुस्सा होता है तो कोई भी हो, उसे हार का सामना करना पड़ता है। उत्तर प्रदेश में अगर भारतीय जनता पार्टी की सरकार आती है, तो नरेंद्र मोदी मजबूत होंगे।
वे इंदिरा गांधी के बाद राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेता के तौर पर स्थापित हो सकते हैं। कम से कम मेरा अनुमान और एग्जिट पोल तो यही जाहिर कर रहे हैं।