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मोदी के दोस्त तोगड़िया बने विरोधी और अब पुरानी रार सतह पर आ गई

Thu, 18 Jan 2018 09:45 AM IST
शशिधर पाठक
शशिधर पाठक Updated Thu, 18 Jan 2018 09:45 AM IST
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Narendra Modi and Praveen Togadia part their ways after Gujarat Riots
Praveen Togadia

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक इसे चाहे जैसे समझाएं, भाजपा चाहे जो नाम दे लेकिन विश्व हिन्दू परिषद अपने कार्यकारी अंतरराष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगड़िया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कटुता का अर्थ निकालने लगा है। संगठन के एक वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि सबकुछ अनायास नहीं है। यह दो पुराने दोस्त (प्रवीण भाई और नरेन्द्र भाई) के बीच 2002-03 से पैदा हुई रार का नतीजा है। जाने अभी और क्या गुल खिलाएगी।

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संघ के एक और प्रचारक हाशिए पर हैं। वीएचपी अध्यक्ष स्व. अशोक सिंघल के जमाने से प्रवीण भाई तोगड़िया के करीबी हैं। प्रशिक्षण देकर राजनीतिक और कुशाग्र बुद्धि के युवा तैयार करने में उन्हें महारत हासिल है। वह भी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि बहुत कुछ ठीक नहीं हो रहा है क्योंकि आरएसएस की सोच बदल रही है। बहुत कुछ नया हो रहा है। सूत्र का कहना है कि यह भाजपा, प्रधानमंत्री जैसे पद, विहिप, और आरएसएस सबके लिए अच्छा नहीं हो रहा है।

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कभी घूमते थे साथ-साथ

Narendra Modi and Praveen Togadia part their ways after Gujarat Riots
प्रवीण तोगड़िया
प्रवीण भाई तोगड़िया, संघ के प्रचारक संजय विनायक जोशी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कभी अच्छे दोस्त थे। प्रवीण भाई और नरेन्द्र भाई एक स्कूटर पर बैठकर गुजरात की सड़कों पर अक्सर देखे जाते थे। कहते हैं सत्ता मिजाज बदल देती है। यही हुआ।

नरेन्द्र भाई गुजरात के मुख्यमंत्री बन गए। तब भी प्रवीण भाई तोगड़िया उनके दोस्त थे। 2002 में गुजरात में गोधरा में ट्रेन में आगजनी की घटना के बाद दंगा भड़का। तब तक दोनों में रिश्ते तल्ख नहीं हुए थे। दंगे के दौरान संवाददाता से फोन पर प्रवीण भाई की बात हुई थी। तब प्रवीण भाई ने नरेन्द्र भाई के शासन का न केवल बचाव किया था, बल्कि यह तर्क दिया था गुजरात के लोग बहुत संवेदनशील होते हैं।

जब भी सांप्रदायिक दंगा भड़का है, लंबे समय तक चला है। लेकिन सूत्र बताते हैं कि नरेन्द्र भाई की न केवल संजय विनायक जोशी से बिगड़ी, बुरी तरह बिगड़ी, बल्कि प्रवीण भाई तोगड़िया से भी बिगड़ गई। इसकी वजह गुजरात के गृह विभाग में प्रवीण भाई के गाहे-बगाहे हस्तक्षेप को बताया जा रहा है। बताते हैं नरेन्द्र भाई ने मौखिक तौर पर प्रवीण भाई को विभाग में नजरअंदाज किए जाने का संदेश दे दिया और खुद थोड़ा दूरी बनाने लगे। इसके बाद बिगड़ने का सिलसिला चल निकला। फिर चाहे गुजरात में सड़क या विकास के रास्ते में आ रहे मंदिरों को प्रशासन द्वारा तोड़ा जाना हो या अन्य टकराव की नींव पड़ने लगी। गुजरात पुलिस ने वीएचपी के कार्यकर्ताओं से सख्ती से निबटना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे प्रवीण भाई भी आलोचक हो गए।

गुजरात चुनाव से पहले

Narendra Modi and Praveen Togadia part their ways after Gujarat Riots
Praveen Togadia
सत्ता के गलियारे से लेकर विहिप के कुछ नेताओं में भी यह चर्चा आम थी। गुजरात से आने वाले भाजपा के एक नेता को भी इसमें सच्चाई नजर आती है। वह यह कि गुजरात विधानसभा चुनाव 2018 से पहले तोगड़िया भाजपा के लिए घातक माने जा रहे थे। बताते हैं संघ प्रमुख मोहन भागवत के हस्तक्षेप के बाद तोगड़िया संतुलित रहे। लेकिन कहा जाता है कि वह पर्दे के पीछे काफी सक्रिय रहे। हार्दिक पटेल के गुजरात में मजबूती से खड़े होने के पीछे भी काफी चर्चाएं हैं। मंगलवार 16 जनवरी को हार्दिक पटेल की तोगड़िया से भेंट के भी तरह तरह से माने निकाले जा रहे हैं। गुजरात से संबंध रखने वाले सूत्रों का मानना है कि विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा की पतली हालत भी इस झगड़े के सतह पर आ जाने का बड़ा कारण है। कहते हैं कि अब यह झगड़े चलेगा। संभव है कि यह देश में एक राजनीतिक बदलाव की लड़ाई का भी रूप ले ले।

संघ और भाजपा टापती रह गई

भुवनेश्वर की बैठक बड़ी अहमियत रखती है। वीएचपी कार्यकारी बोर्ड की इस बैठक ने सारे समीकरण पलट दिए। प्रवीण भाई तोगड़िया को संघ के सम्मान की लक्ष्मण रेखा लांघने पर मजबूर कर दिया। बताते हैं 31 दिसंबर 2017 को वीएचपी के अध्यक्ष राघव रेड्डी और संगठन के कार्यकारी अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगड़िया का कार्यकाल समाप्त हो रहा था। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और आरएसएस प्रमुख दोनों चाहते थे कि वीएचपी से इन दोनों को किनारे कर दिया जाए। इसके लिए संघ ने विहिप का अध्यक्ष बनाने के लिए वी. कोकजे को आगे किया। लेकिन संजय विनायक जोशी, प्रवीण भाई तोगड़िया, केएन गोविंदाचार्य, नरेन्द्र मोदी जैसे कुछ व्यक्तित्व के बारे में कहा जाता है कि संगठनात्मक क्षमता कूट-कूट कर भरी है। जैसे कभी भाजपा वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की मुट्ठी में मानी जाती थी। बताते हैं इसी दक्षता, संगठन पर गहरी पकड़ के चलते प्रवीण भाई तोगड़िया ने संघ, भाजपा और प्रधानमंत्री के प्रयास को फेल कर दिया। कोकजे अध्यक्ष नहीं बन पाए। यह कड़वाहट के सतह पर आ जाने का सबसे बड़ा कारण है, क्योंकि तोगड़िया भी मुट्ठी भींचे जमे रहे।
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संघ में भी दो फाड़

Narendra Modi and Praveen Togadia part their ways after Gujarat Riots
प्रवीण तोगड़िया
संघ में सर सहकार्यवाह स्तर पर मतभेद हैं। संघ के भीतर एक धड़ा जो हो रहा है, उससे सहमत नहीं है। संघ के एक दिग्गज प्रचारक का मानना है कि ऐसा बिल्कुल नहीं हो रहा है। संघ मुख्यालय नागपुर को ऐसी स्थितियों में सही स्टैंड लेना चाहिए, लेकिन रिकार्ड में आकर नाम से कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। वहीं तोगडिय़ा का विरोधी धड़ा इस उठा-पटक में तमाम विरोधियों के एकजुट हो जाने का तर्क दे रहा है। माना यह जा रहा है कि प्रवीण भाई तोगड़िया अब रुकने वाले नहीं है। वह इस लड़ाई को थोड़ा दूर तक ले जा सकते हैं। इसकी बानगी दिखाते हुए उन्होंने संजय जोशी के सीडी प्रकरण का जिक्र कर दिया है। इसकी आड़ में उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला तेज कर दिया है। सच भी है कि बात निकली है तो दूर तलक जाएगी।
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