नारायण राणे: क्या किसी केंद्रीय मंत्री को गिरफ्तार किया जा सकता है, इसकी प्रक्रिया क्या है?
केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य नारायण राणे की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई है। अब नासिक पुलिस ने उन्हें नोटिस भेजकर दो सितंबर को थाने में पेश होने को कहा है। हालांकि उनकी गिरफ्तारी को लेकर नियमों और प्रक्रियाओं से जुड़े कई सवाल उठ रहे हैं।
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मारने की कथित टिप्पणी को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ़्तार कर लिया था। उन्हें आधी रात को जमानत मिली। राणे की गिरफ्तारी को लेकर सियासी हलकों में जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई है। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने इस गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा यह केंद्रीय मंत्री को गिरफ्तार करने के "प्रोटोकॉल के खिलाफ" था। ऐसे में हमने संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप से यह जानने की कोशिश की, कि एक केंद्रीय मंत्री को गिरफ्तार करने की प्रक्रिया क्या है?
सुभाष कश्यप का कहना है कि केंद्रीय मंत्री भी आम आदमी की तरह है। यदि किसी मंत्री पर आपराधिक मामला दर्ज है तो उन पर भी वही नियम लागू होता है जो किसी भी आपराधिक मामले में एक आम आदमी पर लागू होता है। आपराधिक मामले में केंद्रीय मंत्री को राज्यपाल या राष्ट्रपति की तरह मंत्रियों को विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है। उन्हें कानूनी तौर पर संरक्षण नहीं मिल सकता।
तकनीकी तौर पर भारत में, यदि प्रधान मंत्री के खिलाफ भी कोई आपराधिक मामला दर्ज होता है तो उन्हें भी गिरफ्तार किया जा सकता है, क्योंकि इस तरह की कार्रवाई को रोकने के लिए कोई नियम नहीं हैं। हालांकि किसी सांसद को किसी भी सदन या संसद परिसर से तब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता जब तक कि सदन के पीठासीन प्राधिकारी- यानी लोकसभा के अध्यक्ष या राज्य सभा के सभापति से अनुमति न ली जाए। सिलसिलेवार यह पूरी प्रक्रिया समझिए।
केंद्रीय मंत्री को कब गिरफ्तार किया जा सकता है?
गिरफ्तारी को लेकर एक केंद्रीय मंत्री या संसद सदस्य को कुछ विशेषाधिकार संसद सत्र चलने के दौरान ही हासिल होते हैं। यदि किसी कैबिनेट मंत्री के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज हुआ है और पुलिस उसे गिरफ्तार करना चाहती है तो सबसे पहले यह देखना होता है कि संसद का सत्र चल रहा है या नहीं। यदि संसद का सत्र नहीं चल रहा है, तो एक कैबिनेट मंत्री को उसके खिलाफ आपराधिक मामलों में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर कानून प्रवर्तन एजेंसी गिरफ्तार कर सकती है।
हालांकि राज्य सभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों की धारा 22 ए के अनुसार, पुलिस, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को, राज्य सभा के सभापति को 24 घंटे के अंदर गिरफ्तारी की वजह बतानी होगी। साथ ही यदि सदस्य को नजरबंद किया जा रहा है तो उसकी जगह या यदि जेल में भेजा गया है तो यह बताना होगा कि उन्हें किस जेल में रखा गया है।
गिरफ्तारी के बाद लोकसभा अध्यक्ष या राज्य सभा के सभापति क्या कर सकते हैं
यदि किसी सांसद की गिरफ्तारी हो जाती है तो सभापति से यह अपेक्षा की जाती है कि वे संसद सदस्यों को इसकी जानकारी देंगे। यदि इस दौरान संसद की कार्यवाही चल रही हो तो वे सदन को इसकी सूचना देंगे। यदि सदन नहीं चल रहा हो तो सदस्यों को इसकी जानकारी देने के लिए यह सूचना बुलेटिन में प्रकाशित की जाएगी।
गिरफ्तारी से कब तक राहत
सुभाष कश्यप के मुताबिक लोकसभा और राज्यसभा के दोनों सदनों के सदस्यों को कुछ मामलों में गिरफ्तारी से कुछ छूट प्राप्त है। नागरिक प्रक्रिया संहिता की धारा 135 के तहत, संसद सदस्यों को दीवाने मामलों में संसद सत्र चालू होने से 40 दिन पहले और इसकी समाप्ति के 40 दिन बाद और संसद सत्र के दौरान गिरफ्तारी से राहत मिल सकती है। हालांकि आपराधिक मामलों या नजरबंदी के मामलों में ऐसी कोई छूट नहीं मिलती। राज्यसभा या लोकसभा के किसी भी सदस्य को इसमें कोई सुरक्षा प्रदान नहीं की जाती है। इसलिए, नागरिक प्रक्रिया संहिता की धारा 135 के तहत, नारायण राणे को एक दीवानी मामले में गिरफ्तारी से राहत मिली हुई क्योंकि इस महीने की शुरुआत में संसद का मानसून सत्र समाप्त हुआ है।
क्या किसी व्यक्ति को सदन के परिसर से गिरफ्तार किया जा सकता है?
राज्य सभा के सभापति या लोकसभा अध्यक्ष की पूर्व अनुमति के बिना ऐसा करना संभव नहीं। साथ ही इस संबंध में गृह मंत्रालय की निर्धारित प्रक्रिया का भी पालन करना होता है। इसके अनुसार किसी भी सदस्य की या किसी अजनबी की गिरफ्तारी, सभा के परिसर के भीतर नहीं की जा सकती है। इसी प्रकार सदन के सत्र में है या नहीं, सभापति या अध्यक्ष की पूर्व अनुमति लिए बिना, कोई भी दीवानी या आपराधिक कानूनी प्रक्रिया सदन के परिसर के भीतर नहीं की जा सकती है।
क्या पहले भी ऐसी घटना हो चुकी है?
हां ऐसा पहले भी हो चुका है। 2001 में तमिलनाडु में कैबिनेट मंत्रियों की गिरफ्तारी हुई थी। पूर्व केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री मुरासोली मारन और केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री टी आर बालू को भी पद पर रहते हुए फ्लाइओवर घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। इस घटना ने उस समय भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
नारायण राणे से जुड़ा क्या है मामला
नारायण राणे ने 23 अगस्त को बीजेपी की जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान रायगढ़ में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के लिए एक आपत्तिजनक बयान दिया था। जिसके बाद शिवसैनिकों ने काफी बवाल किया और महाराष्ट्र के कई जिलों में उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ। राणे हाल ही में मोदी कैबिनेट में मंत्री बने हैं। उनके पास सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय है।