आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या के पीछे हो सकता है नमो ब्रिगेड के संस्थापक का हाथ
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कर्नाटक के मैंगलोर में हाल ही में एक आरटीआई कार्यकर्ता की हुई हत्या के पीछे 'नमो ब्रिगेड' की स्थापना करने वाले एक शख्स को मुख्य संदिग्ध माना जा रहा है। संदिग्ध की तलाश के लिए पुलिस ने अपनी खोजबीन शुरू कर दी है और जल्द ही उसे पकड़ने की उम्मीद कर रही है।
पुलिस के मुताबिक नमो ब्रिगेड के संस्थापक नरेश शिनोए (39) के मकान से महज 75 मीटर की दूरी पर आरटीआई कार्यकर्ता विनायक पांडुरंग बलिगा (51) की हत्या कर दी गई थी। नरेश कर्नाटक में संघ के करीबी माने जाते हैं और जांच के दौरान हत्या में शामिल जिन तीन लोगों के नाम सामने आए हैं उनके नरेश से भी संबंध हैं।
जांच के दौरान पुलिस ने गुरुवार को नरेश के मंगलौर स्थित आवास पर छापेमारी की। पुलिस ने बताया कि वह करीब एक हफ्ते से गायब है और उनका फोन भी बंद जा रहा है जिसकी वजह से उन पर शक करना लाजमी है।
करीब 9 करोड़ रुपए के घोटाला का खुलासा किया था
विनायक बलिगा भी एक बीजेपी कार्यकर्ता ही थे। उन्होंने आरटीआई के माध्यम से वेंकटरमन मंदिर में कथित रूप से हुए करीब 9 करोड़ रुपए के घोटाला का खुलासा किया था जिसने एक बड़े विवाद का रूप ले लिया था। बलिगा ने विभिन्न मुद्दों पर करीब 92 आरटीआई आवेदन किया थे जिसमें मैंगलोर में अवैध रूप से भूमि हथियाने और अवैध निर्माणों का खुलासा किया था।
हालांकि, पुलिस को शक है कि वेंकटरमन मंदिर में हुए घोटाले का खुलासा करने की वजह से उनकी हत्या की गई। पुलिस ने बताया कि यह मंदिर सारस्वत गौड़ ब्राह्मण समुदाय से जुड़ा है और नरेश शिनोए भी इसके प्रबंधन अधिकारियों में शामिल थे।
पुलिस ने बताया कि विनायक की शादी नहीं हुई थी और वो परिजनों और दो बहनों के साथ मैंगलोर के कोडिबियाल में रहते थे। जिस वक्त उनकी हत्या हुई उस वक्त वह वेंकटरमन मंदिर ही जा रहे थे।