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Vice President: नायडू ने 'फ्री कल्चर' को लेकर किया आगाह, बोले- इसने कई राज्यों की वित्तीय स्थिति खराब कर दी
Tue, 09 Aug 2022 07:24 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 09 Aug 2022 07:24 PM IST
सार
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि सरकार को गरीबों और जरूरतमंदों का सपोर्ट जरूर करना चाहिए लेकिन इसके साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू
- फोटो : ANI
विस्तार
उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने मंगलवार को विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा वोट हासिल करने के लिए लोकलुभावन तरीकों के खिलाफ आगाह किया। नायडू ने कहा कि 'फ्री कल्चर' ने कई राज्यों की वित्तीय स्थिति खराब कर दी है।
उन्होंने कहा कि सरकार को गरीबों और जरूरतमंदों का सपोर्ट जरूर करना चाहिए लेकिन इसके साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए।
पीएम मोदी ने 'रेवड़ी कल्चर' को लेकर किया था आगाह
उनकी यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी की पृष्ठभूमि में आई है। पीएम मोदी ने वोट पाने के लिए 'रेवड़ी कल्चर' अपनाने वालों के प्रति लोगों को आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि यह देश के विकास के लिए खतरनाक हो सकता है।
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नायडू ने इंटरनेट और सोशल मीडिया के विस्तार के कारण तत्काल पत्रकारिता की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण पत्रकारिता के मानदंडों और लोकाचार के 'क्षरण' पर भी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने मीडिया रिपोर्टिंग में तटस्थता और निष्पक्षता के महत्व पर जोर दिया और कहा कि समाचारों को विचारों के साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है और भारत के लोकतांत्रिक लोकाचार के अस्तित्व के लिए इसकी तटस्थता और निष्पक्षता महत्वपूर्ण है।
'जनता और सरकार के बीच निरंतर संवाद की आवश्यकता'
उन्होंने कहा कि नागरिक केंद्रित और उत्तरदायी शासन के लिए लोगों और सरकारों के बीच निरंतर संवाद की आवश्यकता है। नायडू ने कहा कि नीति निर्माण और क्रियान्वयन दोतरफा प्रक्रिया होनी चाहिए जिसमें हर स्तर पर लोगों की भागीदारी हो।
2018 और 2019 बैच के भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए नायडू ने सरकारों और नागरिकों के बीच की खाई को पाटने में संचार की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोगों को उनकी मातृभाषा में सरकार की नीतियों और पहलों के बारे में समय पर जानकारी देकर लोकतंत्र को सशक्त बनाने की जरूरत है।
उपराष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक उन्होंने कहा, सरकारों को भी लोगों की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं से एक उद्देश्य और समयबद्ध तरीके से अवगत कराने की जरूरत है।
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उन्होंने कहा कि सरकार को गरीबों और जरूरतमंदों का सपोर्ट जरूर करना चाहिए लेकिन इसके साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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पीएम मोदी ने 'रेवड़ी कल्चर' को लेकर किया था आगाह
उनकी यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी की पृष्ठभूमि में आई है। पीएम मोदी ने वोट पाने के लिए 'रेवड़ी कल्चर' अपनाने वालों के प्रति लोगों को आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि यह देश के विकास के लिए खतरनाक हो सकता है।
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नायडू ने इंटरनेट और सोशल मीडिया के विस्तार के कारण तत्काल पत्रकारिता की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण पत्रकारिता के मानदंडों और लोकाचार के 'क्षरण' पर भी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने मीडिया रिपोर्टिंग में तटस्थता और निष्पक्षता के महत्व पर जोर दिया और कहा कि समाचारों को विचारों के साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है और भारत के लोकतांत्रिक लोकाचार के अस्तित्व के लिए इसकी तटस्थता और निष्पक्षता महत्वपूर्ण है।
'जनता और सरकार के बीच निरंतर संवाद की आवश्यकता'
उन्होंने कहा कि नागरिक केंद्रित और उत्तरदायी शासन के लिए लोगों और सरकारों के बीच निरंतर संवाद की आवश्यकता है। नायडू ने कहा कि नीति निर्माण और क्रियान्वयन दोतरफा प्रक्रिया होनी चाहिए जिसमें हर स्तर पर लोगों की भागीदारी हो।
2018 और 2019 बैच के भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए नायडू ने सरकारों और नागरिकों के बीच की खाई को पाटने में संचार की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोगों को उनकी मातृभाषा में सरकार की नीतियों और पहलों के बारे में समय पर जानकारी देकर लोकतंत्र को सशक्त बनाने की जरूरत है।
उपराष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक उन्होंने कहा, सरकारों को भी लोगों की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं से एक उद्देश्य और समयबद्ध तरीके से अवगत कराने की जरूरत है।