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नगालैंड हिंसा: रिपोर्ट में दावा- गोलियां चलाने से पहले सैन्य बलों ने मजदूरों की पहचान नहीं की थी, विरोध में हॉर्नबिल फेस्टिवल रद्द

Wed, 08 Dec 2021 04:16 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, कोहिमा
एजेंसी, कोहिमा Published by: Kuldeep Singh Updated Wed, 08 Dec 2021 04:16 AM IST
सार

नगालैंड में कोयला खदान मजदूरों पर गोलियां चलाने से पहले सैन्य बलों ने उनकी पहचान सुनिश्चित नहीं की थी , यह दावा राज्य के पुलिस महानिदेशक टी जॉन लॉन्गकुमार और कमिश्नर रोविलातो मोर ने एक संयुक्त रिपोर्ट में किया है।

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Nagaland Violence: Report Claims, Military forces did not identify laborers before firing, Hornbill Festival canceled in protest
नगालैंड में गोलीबारी - फोटो : Agency

विस्तार

नगालैंड में कोयला खदान मजदूरों पर गोलियां चलाने से पहले सैन्य बलों ने उनकी पहचान सुनिश्चित करने का कोई प्रयास नहीं किया था और सीधे गोलियां चला दी। यह दावा राज्य के पुलिस महानिदेशक टी जॉन लॉन्गकुमार और कमिश्नर रोविलातो मोर ने एक संयुक्त रिपोर्ट में किया है। दोनों शीर्ष अधिकारियों ने रिपोर्ट में चश्मदीद गवाहों के बयान के आधार पर यह भी लिखा है कि गांव वालों ने सेना की विशेष टुकड़ी को छह शव चुपके से पिकअप वैन में डालकर अपने बेस कैंप तक ले जाने का प्रयास करते हुए देखा।

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राज्य सरकार को भेजी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है, चार दिसंबर की शाम करीब चार बजकर दस मिनट पर जब आठ ग्रामीण तिरू स्थित कोयला खदान से एक पिकअप ट्रक से घर लौट रहे थे, सैन्य बलों (असम की 21वीं पारा स्पेशल फोर्स) ने घात लगाकर उन्हें घेर लिया और बिना किसी तरह की पहचान का प्रयास किए गोलियां चलाने लगे। सभी पीड़ित निर्दोष नागरिक थे, जो कोयला खदान में काम करते थे। इनमें से छह घटनास्थल पर ही मारे गए जबकि दो गंभीर रूप से घायल हैं। 
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तारपोलीन में लपेट रहे थे शव
गोलियों की आवाज सुनकर ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे, जहां उन्होंने पिकअप ट्रक को खड़ा पाया और देखा कि सैन्य बल छह शवों को तारपोलीन में लपेट कर एक अन्य पिकअप में लादने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी मंशा इन शवों को अपने आधार शिविर पर ले जाने की थी। शवों को देखकर गुस्साए ग्रामीणों ने सैन्य बलों के तीन वाहनों में आग लगा दी। जवाबी हिंसा में सुरक्षा बलों ने फिर से गोलियां चलाईं और इसमें 7 अन्य ग्रामीणों की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस बार भी सुरक्षा बलों ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं और घटनास्थल से असम की ओर भागने का प्रयास करने लगे।  

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नगालैंड हिंसा के विरोध में हॉर्नबिल फेस्टिवल रद्द

नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के मंत्रिमंडल ने सैन्य बलों की कार्रवाई में 14 नागरिकों की मौत के खिलाफ विरोध स्वरूप हॉर्नबिल महोत्सव को मंगलवार को समाप्त करने का फैसला लिया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून (अफ्स्पा) रद्द करने की मांग करते हुए केंद्र को पत्र लिखने का भी फैसला किया है। इस बीच राज्य के मोन जिले में मंगलवार को आमतौर पर शांति रही लेकिन तनाव अब भी बना हुआ है।

पर्यटन को बढ़ावा देने वाला राज्य का सबसे बड़ा मनोरंजन कार्यक्रम 10 दिवसीय हॉर्नबिल महोत्सव राजधानी कोहिमा के समीप किसामा में नगा हेरिटेज गांव में आयोजित किया जा रहा था। यह महोत्सव 10 दिसंबर को खत्म होना था। राज्य सरकार ने सोमवार को आयोजन स्थल पर एक दिन का कार्यक्रम रद्द किया था। वहीं, पूर्वी नगालैंड और राज्य के अन्य हिस्सों की कई जनजातियों ने मोन जिले में आम नागरिकों की मौत पर सभी गतिविधियों को निलंबित कर दिया।

राज्य मंत्रिमंडल को इन हत्याओं के बाद की घटनाओं की जानकारी भी दी गई। मंत्रिमंडल को बताया गया कि घटना की जांच के लिए पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में एसआईटी गठन किया गया है। इसे एक महीने के अंदर जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

कोर्ट ऑफ एनक्वायरी की अगुआई मेजर जनरल रैंक के हवाले
सेना ने नागालैंड के मोन जिले में हुई फायरिंग की घटना की जांच के लिए कोर्ट ऑफ एनक्वायरी (सीओआई) गठित कर दी है। मेजर जनरल रैंक के अधिकारी की अगुआई में सीओआई की जांच पूरी की जाएगी। सेना सूत्रों के मुताबिक इस जांच में पता चलेगा कि 21 पारा स्पेशल फोर्सेज ने किस तरह की खुफिया जानकारी केआधार पर और किन हालात में उस एनकाउंटर को अंजाम दिया जिसकी परिणति में 14 लोगों की जान गई।

सूत्रों के मुताबिक शुरुआती घटना के बाद गांव वालों का सेना के काफिले पर हमला और बचाव में सेना की ओर से चलाई गई गोली की घटना को भी जांच के दायरे में लिया गया है। गौरतलब है कि गृहमंत्री अमित शाह संसद में बयान दे चुकेहैं कि मूलत आतंकवादियों की पहचान में हुई चूक की वजह से यह घटना हुई। उधर राज्य सरकार ने भी एक एसआईटी गठित की है जो एक महीने में अपनी रिपोर्ट देगी।

मोन जिले में एक दिन का बंद और सात दिन का शोक

नगालैंड के मोन जिले में जनजातीय समुदायों की सर्वोच्च संस्था कोनयाक यूनियन (केयू) ने 14 नागरिकों की सैन्य बलों द्वारा हत्या के विरोध में मंगलवार को जिले में एक दिन का बंद रखा और अगले सात दिन तक शोक मनाने की घोषणा की है। केयू ने सुरक्षा बलों से अनुरोध किया है कि शोक की इस अवधि में कोनयाक क्षेत्र में गश्त न करें।

यूनियन ने भी चेतावनी दी है कि यदि कानून प्रर्वतन एजेंसियों ने इसका पालन नहीं किया तो वहां होने वाली किसी भी अप्रिय घटना के लिए वह खुद जिम्मेदार होंगे। यूनियन ने सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भी पत्र लिखकर घटना के लिए जिम्मेदार सैन्य कर्मियों की पहचान करने के लिए विशेष जांच दल गठित करने का आग्रह किया था। आम नागरिकों की रक्षा में विफल रहने के कारण 27 असम राइफल्स को तत्काल मोन जिला खाली करने और राज्य से अफ्स्पा हटाने की मांग भी यूनियन ने की है। एजेंसी

जोरमथांगा ने शांति स्थापना की प्रार्थना की
आइजोल। मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने नगालैंड में 14 निर्दोष नागरिकों की हत्या पर दुख जताते हुए कहा कि वह नगालैंड के लोगों साथ खड़े हैं। उम्मीद है कि वहां जल्द से जल्द शांति स्थापित होगी और पीड़ितों को न्याय मिलेगा।

थरूर ने की सरकार की आलोचना
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नगालैंड की घटना के लिए केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि इस मामले में संसद में बहस होनी चाहिए थी लेकिन गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बिना सवालों का जवाब दिए सदन से बाहर चले गए। उन्होंने कहा कि सरकार के इस रवैये को देखते हुए ही कांग्रेस ने इस मामले में विरोध स्वरूप सदन से वाकआउट किया।

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