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Nagaland: स्पीयर कॉर्प्स के जांबाज जवानों ने माउंट गोरिचेन पर फहराया तिरंगा, साहस और धैर्य का अद्भुत प्रदर्शन
Fri, 03 Oct 2025 10:04 PM IST
पवन पांडेय
एन. अर्जुन, अमर उजाला, दीमापुर
एन. अर्जुन, अमर उजाला, दीमापुर
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 03 Oct 2025 10:04 PM IST
सार
Spear Corps Of Indian Army: पूर्वी हिमालय की दुर्गम चोटियों पर सैनिकों ने अनुशासन, जज्बे का अद्भुत प्रदर्शन किया है। सेना की स्पीयर कॉर्प्स ने साहस, धैर्य और सामूहिकता का अद्भुत प्रदर्शन करते हुए माउंट गोरिचेन पर विजय हासिल की और पहाड़ की चोटी पर तिरंगा फहराया।
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स्पीयर कॉर्प्स के जांबाज जवानों ने माउंट गोरिचेन पर फहराया तिरंगा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारतीय सेना की स्पीयर कॉर्प्स ने साहस, धैर्य और सामूहिकता का अद्भुत प्रदर्शन करते हुए माउंट गोरिचेन (21,286 फीट / 6,488 मीटर) पर विजय हासिल की और पहाड़ की चोटी पर तिरंगा फहराया। यह अभियान पूर्वी हिमालय की दुर्गम चोटियों पर सैनिकों के अनुशासन, जज्बे और रोमांचकारी भावना का प्रतीक बना।
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स्पीयर कॉर्प्स के जांबाज जवानों ने माउंट गोरिचेन पर फहराया तिरंगा
- फोटो : अमर उजाला
इस अभियान की शुरुआत 20 अगस्त को लिकाबाली सैन्य स्टेशन से स्पीयरहेड डिविजन के जीओसी द्वारा झंडी दिखाकर की गई थी। इससे पहले 13 अगस्त को अग्रिम दल ने रेकी और समन्वय के लिए प्रस्थान किया था। इसके बाद दल मिसामारी, टेंगा और सेंग (9500 फीट) से होते हुए ऊंचाई पर व्यवस्थित प्रशिक्षण और अनुकूलन प्रक्रिया से गुजरा।
स्पीयर कॉर्प्स के जांबाज जवानों ने माउंट गोरिचेन पर फहराया तिरंगा
- फोटो : अमर उजाला
दीमापुर में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि 1 सितंबर को 12,200 फीट की ऊंचाई वाले मागो रोड हेड से वास्तविक चढ़ाई शुरू हुई। अभियान दल मेराथांग बेस कैंप, चोकर्सुम, कैंप-I और समिट कैंप से आगे बढ़ता गया। बर्फीली ढलानों, तेज हवाओं और ऑक्सीजन की कमी का सामना करते हुए सैनिकों ने रस्सियां फिक्स कीं, बोझ उठाकर पहुंचाया और मध्यवर्ती कैंप स्थापित किए।
स्पीयर कॉर्प्स के जांबाज जवानों का अद्भुत प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
19 सितंबर को स्पीयर कॉर्प्स के जांबाज जवानों ने सफलता पूर्वक माउंट गोरिचेन की चोटी पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और अटूट साहस व गर्व का प्रतीक पेश किया। वापसी का सफर भी निर्धारित मार्ग से पूरा करते हुए अभियान दल 3 अक्तूबर को दीमापुर पहुंचा, जहां स्पीयर कॉर्प्स के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल एएस पेंढारकर (एवीएसएम, वाईएसएम) ने औपचारिक रूप से अभियान दल का स्वागत किया।
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इस अभियान की सफलता ने भारतीय सेना की रोमांचक परंपरा को और मजबूत किया है और यह साबित किया है कि सैनिक किसी भी कठिन भूभाग व ऊंचाई पर शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और ऑपरेशनल उत्कृष्टता का अद्भुत परिचय देने में सक्षम हैं।
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इस अभियान की सफलता ने भारतीय सेना की रोमांचक परंपरा को और मजबूत किया है और यह साबित किया है कि सैनिक किसी भी कठिन भूभाग व ऊंचाई पर शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और ऑपरेशनल उत्कृष्टता का अद्भुत परिचय देने में सक्षम हैं।