वार्ताकार पर आंच: आखिर नागालैंड के राज्यपाल आरएन रवि क्यों घिरे हैं सरकारी आवास को लेकर विवादों में?
नागा सोसाइटी का आरोप है कि राज्यपाल रवि के दिल्ली आवास के लिए नागालैंड सरकार की दो महिला कर्मचारियों से उनके सरकारी घर जबरन खाली करवाए गए और इसका विरोध करने पर उन्हें राजभवन के अफसरों ने धमकाया। इन महिला कर्मचारियों के पति नहीं हैं और उन पर बच्चों को पढ़ाने और देखभाल करने की जिम्मेदारी है...
विस्तार
नागालैंड के राज्यपाल और नागा शांति वार्ता में केंद्र की ओर से वार्ताकार आरएन रवि इन दिनों अपने दिल्ली के सरकारी आवास को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली के मोती बाग में एक बड़े सरकारी बंगले के आवंटन को लेकर वह विवाद में हैं। नागा सोसाइटी का आरोप है कि राज्यपाल रवि के दिल्ली आवास के लिए नागालैंड सरकार की दो महिला कर्मचारियों से उनके सरकारी घर जबरन खाली करवाए गए और इसका विरोध करने पर उन्हें राजभवन के अफसरों ने धमकाया। इन महिला कर्मचारियों के पति नहीं हैं और उन पर बच्चों को पढ़ाने और देखभाल करने की जिम्मेदारी है। राज्यपाल रवि के खिलाफ नागा सोसाइटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है और इसकी प्रतिलिपि गृह मंत्री अमित शाह समेत तमाम अहम मंत्रियों, पार्टी अध्यक्षों और मीडिया संस्थानों को भेजी है।
मिली जानकारी के मुताबिक रवि को ये बंगला 2015 के मार्च में ज्वाइंट इंटेलिजेंस कमेटी के चेयरमैन बनाए जाने के बाद आवंटित किया गया था। अगस्त 2018 में रवि के रिटायरमेंट के बाद उन्हें ये बंगला छोड़ना था, लेकिन रवि ने इसे खाली नहीं किया। करीब एक साल बाद एक अगस्त 2019 को नागालैंड के राज्यपाल बनाए जाने के बाद रवि कोहिमा के राजभवन में चले गए। दिल्ली के नागालैंड हाउस में राज्यपाल का विशेष भव्य सुइट पहले से है। खास बात ये है कि राज्यपाल बनाए जाने के बाद भी रवि नागा शांति वार्ता के लिए वार्ताकार भी हैं। केंद्र सरकार ने नागा शांति वार्ता में उनकी अहम भूमिका को देखते हुए रवि को दोनों ही अहम पदों पर बरकरार रखा है।
रवि ने राज्यपाल बनने के कुछ ही महीनों के बाद से वार्ताकार के तौर पर दिल्ली का ये बंगला वापस अपने नाम आवंटित कराने के लिए नागालैंड सरकार के कोटे से कागजी कार्रवाइयां शुरू करवा दीं। आखिरकार नागालैंड सरकार ने भी इस तर्क के साथ केन्द्र को ये चिट्ठी लिख दी कि चूंकि उन्हें वार्ताकार के तौर पर बार-बार दिल्ली जाना पड़ता है, ऐसे में उन्हें वही बंगला आवंटित कर दिया जाए। मामला प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बनी आवास से जुड़ी कैबिनेट कमेटी तक पहुंचा और कमेटी ने ये शर्त रखी कि नागालैंड सरकार अपने कोटे से दो छोटे आवास खाली करवाए तभी उसके एवज में रवि को ये बंगला आवंटित हो सकता है।
GPRA के नियमों के तहत नागालैंड सरकार को दिल्ली के केंद्रीय पूल से छह आवास उपलब्ध कराए जाते हैं। फिलहाल नागालैंड सरकार के पास जो उपलब्ध छह आवास हैं, उनमें से एक मुख्यमंत्री, एक अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा चार नागालैंड हाउस के अन्य कर्मचारियों को अवंटित थे।
दो विधवाओं का आवास जबरन खाली कराने का आरोप
आरोप है कि रवि को 102, न्यू मोतीबाग के टाइप-7 का बंगला आवंटित कराने के लिए नागालैंड सरकार पर दबाव डाला गया कि वह अपने कोटे से उन्हें ये बंगला दिलवाए और इसके लिए अपने दो कर्मचारियों के आवास खाली करवाए। इसके लिए दो नागा महिला कर्मचारियों लीसा पिला अनर और टी असेनला पर दबाव डाला गया। लीसा ने तो पिछले साल जनवरी में ही आवास खाली कर दिया और टी असेनला से भी जबरन आरके पुरम का उनका सरकारी आवास खाली करवा दिया गया।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक अब नागालैंड सरकार पर राजभवन अधिकारियों की ओर से ये दबाव डाला जा रहा है कि वे राज्यपाल रवि के लिए आवंटित इस बंगले के पुराने बकाये बिलों का भुगतान भी वही करे, जो करीब 38 लाख रुपये है। उधर नागा सोसाइटी का दावा है कि रवि का पहले से ही दिल्ली में एक बड़ा फ्लैट है, पटना में भी संपत्ति है, केरल में फार्म हाउस है, ऐसे में किसी विधवा कर्मचारी से आवास खाली करवाना उचित नहीं है जबकि नागालैंड हाउस में उनके लिए भव्य सुइट मौजूद है।
क्या कहते हैं राजभवन के अधिकारी
इस बारे में जब अमर उजाला ने राज्यपाल के कमिश्नर टी महाबेमो यंथान से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले में जानकारी नहीं है, ये नागालैंड सरकार का मामला है। इसके पहले मीडिया से बात करते हुए यंथान ने कहा था कि अगर दिल्ली में दोनों आवास को खाली कराने को लेकर कोई असंतोष है तो इसे दूर करने का काम राज्य सरकार का है, राजभवन का नहीं।
रवि से क्यों नाराज रहता है एनएसीएन-आईएम
दरअसल नागा शांति वार्ता के दौरान रवि के सख्त रुख से कई नागा संगठन उनसे नाराज़ चल रहे हैं और उन्हें राज्यपाल पद से हटाने की कोशिश में लगे हैं। कई दौर की वार्ता के बाद भी अभी किसी नतीजे पर पहुंच पाना संभव नहीं हो सका है। पिछले साल सितंबर में हुई वार्ता के दौरान एनएसीएन – आईएम और कुछ अन्य संगठन अपना अलग झंडा और संविधान पर अड़े रहे जबकि रवि ने साफ कहा कि ये संभव नहीं है। रवि कुछ संगठनों की मांग को पूरे नागा समुदाय की मांग मानने के लिए सहमत नहीं हैं। उनके सख्त रुख से मुइवा गुट उनके सख्त खिलाफ है। पिछले साल वार्ता के बाद रवि ने ये बयान दे दिया था कि वार्ता खत्म हो चुकी है जबकि मुइवा ने इसका सख्त विरोध किया था कि वार्ता सही दिशा में आगे बढ़ रही है, खत्म नहीं हुई है और राज्यपाल को गैर-जिम्मेदाराना बयान नहीं देना चाहिए।
ऐसे में दिल्ली में सरकारी आवास को लेकर उठे विवाद के बाद नागा सोसाइटी ने रवि के खिलाफ आरोपों की लंबी फेहरिस्त तैयार की है। जाहिर है राज्यपाल के आदेश को दिल्ली स्थित नागालैंड हाउस के कर्मचारी नजरअंदाज़ नहीं कर सकते, लेकिन दो विधवा कर्मचारियों के आवास जबरन खाली कराए जाने को लेकर भीतर ही भीतर नागा कर्मचारियों में असंतोष के स्वर सुनाई देने लगे हैं।