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नड्डा का सोनिया को जवाब: इंदिरा और राजीव गांधी की सरकार में हुए हमलों की दिलाई याद, कहा- पांच राज्यों में मिली हार से सीखें

Mon, 18 Apr 2022 10:15 AM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 18 Apr 2022 10:15 AM IST
सार

अपने पत्र में नड्डा ने लिखा है कि देश के युवा अवसर चाहते हैं, बाधाएं नहीं। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष से भी अनुरोध किया कि वह विकास की राजनीति करे। 

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Naddas letter to public: What kind of India do you want by 2027? Call to think and plan, urges opposition to politics of development
जेपी नड्डा भाजपा अध्यक्ष - फोटो : Social Media

विस्तार

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने देशवासियों के नाम एक पत्र लिखकर कांग्रेस पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने इंदिरा गांधी सरकार में साधुओं की हत्याओं और राजीव सरकार में सिखों के नरसंहार की याद दिलाते हुए कहा है कि यह देश अब केवल वोटबैंक पॉलिटिक्स करने वालों की राजनीति को नकार रहा है। पांच राज्यों के चुनावों में देश के अलग-अलग कोनों में भाजपा को मिली सफलता इस बात का प्रमाण है कि अब केवल जनता के हितों की राजनीति ही स्वीकार्य होगी। नड्डा का यह पत्र सोनिया गांधी के उस पत्र का जवाब माना जा रहा है जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि सत्तारूढ़ दल विभाजनकारी सोच को ही राजनीति का स्थाई आयाम बना देना चाहता है।

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 विश्व बैंक की रविवार को जारी हुई एक रिपोर्ट के अनुसार, नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले आठ साल के शासनकाल में भारत में गरीबी में 12 प्रतिशत की भारी कमी आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2011 में देश के ग्रामीण इलाकों में गरीबी दर 26.3 प्रतिशत थी जो 2019 में घटकर केवल 11.6 प्रतिशत रह गई है। जबकि शहरी मामलों में यही गिरावट 14.2 प्रतिशत से कम होकर 6.3 प्रतिशत पर आ गई है।
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 इसी रिपोर्ट के आधार पर जेपी नड्डा ने दावा किया है कि भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार की नीतियों को जनता पसंद कर रही है, जबकि उन लोगों की राजनीति को देश ने नकार दिया है जो अब तक केवल जाति-धर्म के आधार पर वोटबैंक की राजनीति करते रहे हैं। इशारों-इशारों में कांग्रेस पर हमला करते हुए उन्होंने कहा है कि हाल ही में कई राज्यों में करारी हार के बाद भी कुछ राजनीतिक दल अपनी गलती को समझने और स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।
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 दरअसल, सोनिया गांधी ने अपने पत्र में यूपीए सरकार के उस फॉर्मूले का भी जिक्र किया था जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि यदि जनता को सुरक्षा का वातावरण दे दिया जाए तो वह अपना विकास स्वयं कर लेती है। मनमोहन सिंह ने सामाजिक सौहार्द्र को भी देश के विकास के लिए अहम माना था और कहा था कि सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ने से विकास बाधित होता है और निवेश प्रभावित होता है। इसी आधार पर सोनिया गांधी ने देश के वर्तमान हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि देश में सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ता है तो इससे देश का विकास प्रभावित होगा।

विश्व बैंक के आंकड़ों के हवाले से नड्डा ने यही साबित करने की कोशिश की है कि यूपीए की नीतियां देश को गरीबी के जाल से मुक्त कराने में असफल रही हैं जबकि एनडीए ने अपने शासनकाल में अपनी नीतियों के सहारे देश के गरीबों को गरीबी से मुक्ति दिलाने में सफलता पाई है। इस प्रकार मनमोहन सिह सरकार की नीतियां बहुत प्रभावशाली नहीं कही जा सकतीं।


 चूंकि, सोनिया गांधी ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि वर्तमान सरकार देश के एक वर्ग को दूसरे वर्ग के खिलाफ खड़ा करने का प्रयास कर रहा है, नड्डा ने इस पर करारा हमला करते हुए कहा कि इस तरह के हमलों के मामले में पक्षीय सोच को स्थान नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा है कि जो लोग दे के दूसरे हिस्सों में हो रहे अपराध पर चिंता व्यक्त करते हैं, वे राजस्थान के करोली में हुई हिंसा पर चुप्पी साध लेते हैं। यह चुप्पी देश स्वीकार नहीं करेगा।

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