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Kerala: सरकार के पैनल ने मौजूदा स्कूल समय को बदलने का रखा प्रस्ताव, मुस्लिम विद्वानों के संगठन ने किया विरोध
Fri, 23 Sep 2022 03:54 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 23 Sep 2022 03:54 PM IST
सार
समस्त केरल जेम-इय्यातुल उलमा या समस्त सुन्नी विद्वानों का एक संघ है। इसने पूछा है कि क्या सरकार के इस कदम का उद्देश्य धार्मिक पढ़ाई को हतोत्साहित करना है। संघ ने यह भी कहा कि यह शिफारिश किसी भी कीम पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
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मदरसा
- फोटो : Social Media
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विस्तार
सरकार द्वारा नियुक्त एक पैनल ने केरल में मौजूदा स्कूल समय में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। मीडिया में इसकी खबरें सामने आने के बाद राज्य के मुस्लिम विद्वानों के एक संगठन ने इसका विरोध किया है। संगठन का कहना है कि इससे उनके समुदाय के बच्चों की मदरसा पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
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समस्त केरल जेम-इय्यातुल उलमा या समस्त सुन्नी विद्वानों का एक संघ है। इसने पूछा है कि क्या सरकार के इस कदम का उद्देश्य धार्मिक पढ़ाई को हतोत्साहित करना है। संघ ने यह भी कहा कि यह शिफारिश किसी भी कीम पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
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हालांकि, समस्त के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि साम्यवाद, नास्तिक विचारधारा पर आधारित है। राज्य की वाम सरकार इसे अपनी नीति के रूप में लागू नहीं कर सकती है। वह सभी को एकसाथ लेकर ही आगे बढ़ सकती है। समस्त के नेता अब्दुस्समद पुक्कोट्टूर ने कहा कि स्कूल के मौजूदा समय में बदलाव से निश्चित रूप से मदरसों में पढ़ाई प्रभावित होगी। धार्मिक अध्ययन के लिए सुबह 7 बजे से सुबह 8.30 बजे तक के लिए एक तय समय उपलब्ध है।
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उन्होंने कहा कि अगर नया टाइम टेबल लागू किया जाता है तो बच्चों को मदरसों को समर्पित करने के लिए समय नहीं मिलेगा। इसलिए संठन इस कदम का कड़ा विरोध कर रहा है।
स्कूली शिक्षा पर एम.ए. खादर समिति ने एक दिन पहले ही राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। उसके एक दिन बाद ही संगठन की यह तीख प्रतिक्रिया सामने आई है। रिपोर्ट में कथित तौर पर स्कूल के समय को सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक करने की शिफारिश की गई है।
पुक्कोट्टूर ने बताया कि विद्वानों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को अपनी चिंताओं से पहले ही अवगत करा दिया था। उन्होंने कहा कि समस्त के शीर्ष नेता औपचारिक रूप से सरकार से जल्द ही इन सिफारिशों को खारिज करने का अनुरोध करेंगे।
समस्त नेता ने कहा कि जब स्कूल के समय में बदलाव का सुझाव सरकार के समक्ष पैनल की सिफारिश के रूप में आता है, तो स्वभाविक रूप से इसे स्वीकार किए जाने की संभावना होती है। इसलिए हम सरकार से इसे पहले से अस्वीकार करने के लिए कह रहे हैं।