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Communal Violence: मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने की जुमे की नमाज के बहाने पथराव की घटना की निंदा, कही यह बड़ी बात

Fri, 17 Jun 2022 12:08 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 17 Jun 2022 12:08 AM IST
सार

मुस्लिम समुदाय ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व बच्चों को बिरयानी खिलाकर पथराव करा रहे हैं, उन्होंने बच्चों की आड़ में हिंसा और आतंक का जाल फैलाने वालों पर त्वरित और कठोर करवाई की मांग की। 

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Muslim intellectuals condemned the incident of stone pelting on the pretext of Friday jume ki namaz
मुस्लिम समाज की बैठक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बुधवार का दिन देश के लिए ऐतिहासिक रहा। बरेली में जमा हुए मुस्लिम समाज ने हिंसा को लेकर हिंदुस्तान और विश्व समुदाय के सामने अपनी बात रखी साथ ही पूछा कि शुक्रवार का दिन खास इबादत का होता है, ऐसे में जुमे की नमाज के बहाने पथराव करने वाले बताएं कि क्या शुक्रवार का नाम पत्थरवार कर दिया जाए?

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साथ ही मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने वैसी मस्जिदों पर भी सवाल खड़े किए जहां खुदाई करने पर खंडित मूर्तियां, शिवलिंग और सनातन धर्म के प्रमाण मिलते हैं। ऐसी मस्जिदों को बुद्धिजीवियों ने अल्लाह और रसूल की तौहीन बताया। 
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मुस्लिम समाज ने असमाजिक तत्वों पर कार्रवाई की मांग की
इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय ने सभ्य समाज से सवाल किया कि जुमे की नमाज पर पथराव और हिंसा फैलाने वाले असामाजिक तत्वों को क्या कहेंगे? क्या यह देश और अमन के दुश्मन नहीं हैं? कानपुर की पुलिस पड़ताल में यह बात साबित भी हो चुकी है कि बच्चों को कई दिनों से बिरयानी खिलाई जा रही थी और उन्हें पथराव करने के लिए पैसे भी दिए गए थे। 
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आगे कहा कि कानपुर पुलिस की यह पड़ताल अपने आप में रोंगटे खड़े करने वाली है कि क्या कश्मीर में जिस तरह आतंकवादी कश्मीरी अवाम और बच्चों को 500-500 रुपए देकर पथराव करवा रहे थे वो अब क्या देश के बाकी हिस्सों में भी बच्चों की आड़ में हिंसा और आतंक का जाल फैलाने की साजिश रच रहे हैं? मुस्लिम समाज ने ऐसे असामाजिक तत्वों पर त्वरित और कठोर करवाई की मांग की। 

दूसरे धर्म का अनादर करना अल्लाह और रसूल दोनों का ही अपमान
साथ ही साथ मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने सवाल किया कि ऐसी मस्जिदों और इबादतगाहों में इबादत करना जायज है क्या जो नापाक हैं? बुद्धिजीवियों ने कहा कि यह ज्वलंत प्रश्न हैं जिनसे भागा नहीं जा सकता है।

मुस्लिम समाज ने कहा कि किसी दूसरे धर्म का अनादर और अवहेलना करना अल्लाह और रसूल दोनों का ही अपमान है। मुस्लिम समाज ने तथाकथित मुस्लिम परस्त पार्टियों, उनके नेताओं और इस्लाम और दीन के ठेकेदारों को दो टूक संदेश दिया कि समाज को भड़काना और देश का माहौल खराब करना बंद करें। 

संघ नेता इंद्रेश कुमार बोले- क्या किसी  मुस्लिम शासक ने अस्पताल बनवाया
इस मौके पर संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने उपस्थित मुस्लिम समाज से पूछा कि क्या आप बता सकते हैं कि किसी मुस्लिम शासक या किसी मुसलमान नेता या किसी धर्म के ठेकेदार ने आपके लिए कभी कोई बड़ी यूनिवर्सिटी खोली हो जिससे आपकी शिक्षा का मयार बढ़ सके या आपको सही तालीम मिल सके या कोई बड़ा कोई अस्पताल खोला हो जिसमें बड़ी से बड़ी बीमारियों का इलाज होता हो?

संघ नेता ने पूछा कि क्या उन्होंने कभी कोई बड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया हो या फैक्टरी लगाई हो जहां आपको रोजगार मिला हो? या फिर आपके झगड़े झंझट निपट सकें ऐसी क्या कोई कोर्ट या कचहरी खड़ी की हो जहां आपको इंसाफ मिले? 

हुक्मरानों ने सिर्फ गुलाम बनाए रखा
इंद्रेश कुमार के सवाल के जवाब में मुस्लिम समाज ने खुल कर अपनी राय रखी। मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने कहा कि इस्लाम और मुसलमानों की दुहाई देने वाले हुक्मरानों ने केवल मुसलमानों का शोषण किया है। उन्होंने तीखे स्वर में कहा कि देश की किसी भी मुस्लिम परस्त पार्टी और हुक्मरानों ने कभी सही मायनो में उनके लिए सोचा ही नहीं, उन्हें सिर्फ गुलाम बनाए रखा।

बुद्धिजीवियों ने कहा कि मुस्लिम हुक्मरानों ने हमें सिर्फ मकबरा दिया जिसे हमने ले लिया। मुस्लिम समाज ने कहा कि अब देश बदल रहा है, अब देश हिंद से हिंदुस्तानी है। आज मुसलमान आग भड़काने वालों से सवाल पूछ रहा है। 

कार्यक्रम में इंद्रेश कुमार और साध्वी कल्पना भी मौजूद थीं
बरेली के समाजसेवा मंच और भारतीय सद्भावना मंच ने आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम मनाया यहां बड़ी तादाद में मुस्लिम समाज ने शिरकत की थी। कार्यक्रम में संघ के वरिष्ठ नेता और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मुख्य संरक्षक व मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार और साध्वी कल्पना भी मौजूद थीं। इस मौके पर शहर के अतिविशिष्ठ मुस्लिम समाज भी भारी संख्या में मौजूद था। महिलाओं ने भी जोर शोर के साथ शिरकत की। 

देश के बड़े मुस्लिम नेताओं पर उठाए सवाल
कार्यक्रम में बुद्धिजीवियों ने पूछा कि क्या ऐसी इबादतगाह को जायज कहा जा सकता है जो नापाक इरादों से बनाई गई हों? मुस्लिम समाज ने पूछा कि क्या किसी अन्य धर्म के इबादतगाह को तोड़ कर या निस्तनाबूद कर मस्जिद जैसी पाक चीज बनाई जा सकती हैं और गुनाहों से भरी ऐसी हरकतों से बनी मस्जिद में क्या इबादत जायज है? अगर ऐसी नापाक मस्जिदों में इबादत जायज है तो फिर इनमें दीन और इस्लाम के बड़े उलेमा और देश के बड़े मुस्लिम चेहरे माने जाने वालों ने क्या कभी वहां जाकर इबादत की है? 

सलमान खुर्शीद, ओवैसी माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं
मुस्लिम समाज ने यह भी जानना चाहा कि क्या कभी सलमान खुर्शीद, ओवैसी और तौकीर रजा जैसे नेता जो हमेशा इस्लाम के नाम पर देश का माहौल खराब करने की कोशिश करते रहते हैं उन्होंने कभी ऐसी इबादतगाहों में जाकर इबादत की है? और अगर की है तो कितनी बार की है?

मुस्लिम समाज ने यही बात मुस्लिम पर्सनल लॉ जैसे इस्लाम के ठेकेदारों से भी पूछीl। मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने कहा कि मंदिरों को तोड़ कर मस्जिद बनाने वालों और ऐसी हरकतों का समर्थन करने वालों की सजा क्या हो यह देखने वाली बातें हैं। 

मस्जिद हमेशा पाक- साफ, इबादत और जियारत की जगह
संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने मुस्लिम समाज द्वारा खड़े किए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि इस बात का फैसला खुद मुस्लिम समाज को करना चाहिए कि क्या गलत है और क्या सही है? उन्होंने कहा कि मस्जिद हमेशा पाक- साफ, इबादत और जियारत की जगह मानी जाती है। ऐसे में मुस्लिम समाज द्वारा खड़े किए सवालों का उठाया जाना पूरी तरह जायज है।

पत्थरबाजों को शैतानी ताकतें बताया
इंद्रेश कुमार ने मुस्लिम समाज के खड़े किए गए सवालों के समर्थन में कहा कि ऐसी जगह इबादत पाक कैसे हो सकती है जो दूसरे की इबादतगाह को तोड़ कर बनाई गई हो। उन्होंने पत्थरबाजों को भी असमाजिक और शैतानी ताकतें बताया जो अल्लाह और रसूल का अपमान करते हैं। उन्होंने कहा कि रसूल ने तो मुहब्बत और हब्बुल वतन मीनल ईमान का पैगाम दिया था। 

मां को लेकर कही बड़ी बात
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मुख्य संरक्षक ने कुरानशरीफ के हवाले से मां के शाब्दिक अर्थ को समझाया तथा लोगों से आह्वान किया कि मां को सुबह शाम याद करेंगे तो आपके रास्ते खुद ब खुद जन्नत के लिए खुल जाएंगे। क्योंकि कुरानशरीफ में साफ तौर पर लिखा है कि मां के कदमों में जन्नत है। 

उन्होंने कहा कि कुरानशरीफ में लिखा शब्द मां संस्कृत का शब्द है। इंद्रेश कुमार ने कहा जो मां की कद्र न करे वो जहन्नुम का काम करता है। इसी तरह तलाक और ट्रिपल तलाक का उदाहरण देते हुए संघ नेता ने बताया कि ये खुदा की नाफरमानी है और जहन्नुम का रास्ता है। उन्होंने कहा कि मुहब्बत और सुलह जन्नत का रास्ता खोलती है जबकि शैतानी हरकत तलाक जहन्नुम के रास्ते पर ले जाती है। 

बरेली के रोटरी भवन में जुटे थे मुस्लिम समुदाय के लोग
बरेली के रोटरी भवन में राष्ट्रीय सद्भावना मंच और भारतीय समाज सेवा मंच के संयुक्त तत्वाधान में सद्भावना विषय पर बड़ी गोष्टी और कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। सभा में मुख्य रूप से संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार और साध्वी कल्पना मौजूद थे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सर्व श्री साई दर्शन परवेज मियां, नावेद खान, नावेद बैग, नदीम, दीपक अग्रवाल, राजा मुनीर आलम, साजिद हुसैन, डॉक्टर दीपक, डॉ विनोद पाल, नदीम सैफी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र प्रसाद द्वारा किया गया। पंडित कपिल शर्मा भी कार्यक्रम में मंचासीन थे।

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