{"_id":"640705185e13c0608a0bd8eb","slug":"muslim-brotherhood-what-is-muslim-brotherhood-with-which-rahul-gandhi-compared-rss-2023-03-07","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Muslim Brotherhood: क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड, जिससे राहुल गांधी ने की राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तुलना?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Muslim Brotherhood: क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड, जिससे राहुल गांधी ने की राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तुलना?
Tue, 07 Mar 2023 03:54 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Tue, 07 Mar 2023 03:54 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
Rahul Gandhi
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी इन दिनों ब्रिटेन दौरे पर हैं। राहुल ने सोमवार को लंदन स्थित थिंक टैंक चैथम हाउस में कई मुद्दों पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने आरएसएस पर भी जमकर निशाना साधा। राहुल ने दावा किया कि आरएसएस की वजह से भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की प्रकृति पूरी तरह से बदल गई है। उन्होंने कहा कि यह एक फासीवाद संगठन है जिसने भारत के सभी संस्थानों पर कब्जा कर लिया है। इसी दौरान उन्होंने आरएसएस की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से भी की।आखिर मुस्लिम ब्रदरहुड क्या है? ये किन विवादों में रहा है? इस संगठन पर किस तरह के आरोप लगते रहे हैं? किन देशों में इसका प्रभाव है? आइए जानते हैं।
लंदन में क्या बोले राहुल?
लंदन स्थित थिंक टैंक चैथम में विभिन्न मुद्दों पर बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने भाजपा के साथ-साथ आरएसएस पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरएसएस को मुस्लिम ब्रदरहुड से तुलना करते हुए इसे एक गुप्त समाज बताया। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रतियोगिता के माध्यम से सत्ता में आना है और फिर इसी लोकतांत्रिक प्रतियोगिता को खत्म करना है।
लंदन स्थित थिंक टैंक चैथम में विभिन्न मुद्दों पर बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने भाजपा के साथ-साथ आरएसएस पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरएसएस को मुस्लिम ब्रदरहुड से तुलना करते हुए इसे एक गुप्त समाज बताया। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रतियोगिता के माध्यम से सत्ता में आना है और फिर इसी लोकतांत्रिक प्रतियोगिता को खत्म करना है।
Muslim Brotherhood
मुस्लिम ब्रदरहुड क्या है?
मुस्लिम ब्रदरहुड मिस्र का सबसे पुराना इस्लामिक संगठन है। इसे इख्वान-अल-मुस्लमीन के नाम से भी जाना जाता है। इस संगठन की स्थापना 1928 में हसन-अल-बन्ना ने की थी। साल 1928 में हसन के संगठन बनाने के बाद मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखाएं धीरे-धीरे पूरे संसार में फैलने लगी।
इस संगठन मुख्य उद्देश्य देश का कानून शरिया के आधार पर चलाना है। शुरुआती दौर में इस संगठन का मकसद इस्लाम के नैतिक मूल्यों और अच्छे कार्यो का प्रचार-प्रसार करना था, लेकिन बाद में राजनीति में भी शामिल हो गया। मुस्लिम ब्रदरहुड के संस्थापक हसन-अल-बन्ना ने एक हथियार बंद-दस्ते का भी गठन किया। इसका मुख्य मकसद ब्रिटिश शासन के खिलाफ बमबारी और हथियारों को अंजाम देना था।
मुस्लिम ब्रदरहुड मिस्र का सबसे पुराना इस्लामिक संगठन है। इसे इख्वान-अल-मुस्लमीन के नाम से भी जाना जाता है। इस संगठन की स्थापना 1928 में हसन-अल-बन्ना ने की थी। साल 1928 में हसन के संगठन बनाने के बाद मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखाएं धीरे-धीरे पूरे संसार में फैलने लगी।
इस संगठन मुख्य उद्देश्य देश का कानून शरिया के आधार पर चलाना है। शुरुआती दौर में इस संगठन का मकसद इस्लाम के नैतिक मूल्यों और अच्छे कार्यो का प्रचार-प्रसार करना था, लेकिन बाद में राजनीति में भी शामिल हो गया। मुस्लिम ब्रदरहुड के संस्थापक हसन-अल-बन्ना ने एक हथियार बंद-दस्ते का भी गठन किया। इसका मुख्य मकसद ब्रिटिश शासन के खिलाफ बमबारी और हथियारों को अंजाम देना था।
किन देशों में इसका प्रभाव है?
हसन-अल-बन्ना द्वारा 1928 में मुस्लिम ब्रदरहुड की स्थापना के बाद से ही इसकी शाखाएं पूरे देश में फैल गईं। 1928 के आखिरी दशक में ही इनकी संख्या 20 लाख तक हो गई थी। गरीबी और भ्रष्टाचार की वजह से मिस्र में इसकी तादाद तेजी से बढ़ने लगी। इस संगठन की विचारधारा केवल मिस्र तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे अरब देशों में भी फैलने लगी। मुस्लिम ब्रदरहुड का चर्चित नारा-“इस्लाम ही समाधान है।”
हसन-अल-बन्ना द्वारा 1928 में मुस्लिम ब्रदरहुड की स्थापना के बाद से ही इसकी शाखाएं पूरे देश में फैल गईं। 1928 के आखिरी दशक में ही इनकी संख्या 20 लाख तक हो गई थी। गरीबी और भ्रष्टाचार की वजह से मिस्र में इसकी तादाद तेजी से बढ़ने लगी। इस संगठन की विचारधारा केवल मिस्र तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे अरब देशों में भी फैलने लगी। मुस्लिम ब्रदरहुड का चर्चित नारा-“इस्लाम ही समाधान है।”
ओसामा बिन लादेन
- फोटो :
Social media
संगठन पर लगे आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप
अरब देशों में सक्रिय इस संगठन पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का भी आरोप लगता रहा है। अमेरिका में हुए 9/11 हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन भी पहले इसी संगठन का सदस्य था। उनके अलावा अल-कायदा को भी मुस्लिम ब्रदरहुड का जाना माना चेहरा माना जाता है। इस संगठन को सउदी अरब, रुस, मिस्र, सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात में आतंकी संगठन घोषित किया जा चुका है। इस संगठन पर 1954 में राष्ट्रपति गमाल अब्देल नासर की हत्या के असफल प्रयास का आरोप भी लग चुका है।
अरब देशों में सक्रिय इस संगठन पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का भी आरोप लगता रहा है। अमेरिका में हुए 9/11 हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन भी पहले इसी संगठन का सदस्य था। उनके अलावा अल-कायदा को भी मुस्लिम ब्रदरहुड का जाना माना चेहरा माना जाता है। इस संगठन को सउदी अरब, रुस, मिस्र, सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात में आतंकी संगठन घोषित किया जा चुका है। इस संगठन पर 1954 में राष्ट्रपति गमाल अब्देल नासर की हत्या के असफल प्रयास का आरोप भी लग चुका है।
राजनीति में भी सक्रिय है मुस्लिम ब्रदरहुड
भले ही मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, रुस, सीरिया में मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकी संगठन घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद ये अरब की कई देशों की राजनीति में सक्रियता से काम कर रहा है। मुस्लिम ब्रदरहुड के संबंध लेबनान स्थित शिया चरमपंथी संगठन हिज्बुल्लाह और कट्टरपंथी फिलस्तीनी संगठन हमास जैसे संगठनों से भी रहे हैं। अमेरिका के साथ इस संगठन के रिश्ते बेहद खराब हैं।
भले ही मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, रुस, सीरिया में मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकी संगठन घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद ये अरब की कई देशों की राजनीति में सक्रियता से काम कर रहा है। मुस्लिम ब्रदरहुड के संबंध लेबनान स्थित शिया चरमपंथी संगठन हिज्बुल्लाह और कट्टरपंथी फिलस्तीनी संगठन हमास जैसे संगठनों से भी रहे हैं। अमेरिका के साथ इस संगठन के रिश्ते बेहद खराब हैं।
मिस्र का राजनीति में फिर बढ़ा दखल
1948 में इस संगठन के संस्थापक हसन-अल-बन्ना की एक अज्ञात बंदूकधारी ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उनकी हत्या के बाद मिस्र सरकार ने ब्रितानी लोगों की हत्या और यहूदियों पर अत्याचार के आरोप में मुस्लिम ब्रदरहुड को भंग कर दिया। इसके हजारों कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया। इसके बाद यह संगठन भूमिगत हो गया।
साल 1970 में इस संगठन ने अनवर अल सादात को राष्ट्रपति बनने में समर्थन देने के साथ राजनीति में आने की कोशिश की। हालांकि, कुछ समय बाद ही दोनों के बीच खटास पैदा हो गई। मुस्लिम ब्रदरहुड ने पहली बार 2000 में 17 सीटें जीतकर विपक्ष पार्टी बनने का दर्जा हासिल किया। पांच साल बाद इस संगठन ने निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ मिलकर 20 सीटें जीती। राष्ट्रपति होस्ने मुबारक को सत्ता से बाहर करने में भी अहम भूमिका निभाई थी।
1948 में इस संगठन के संस्थापक हसन-अल-बन्ना की एक अज्ञात बंदूकधारी ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उनकी हत्या के बाद मिस्र सरकार ने ब्रितानी लोगों की हत्या और यहूदियों पर अत्याचार के आरोप में मुस्लिम ब्रदरहुड को भंग कर दिया। इसके हजारों कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया। इसके बाद यह संगठन भूमिगत हो गया।
साल 1970 में इस संगठन ने अनवर अल सादात को राष्ट्रपति बनने में समर्थन देने के साथ राजनीति में आने की कोशिश की। हालांकि, कुछ समय बाद ही दोनों के बीच खटास पैदा हो गई। मुस्लिम ब्रदरहुड ने पहली बार 2000 में 17 सीटें जीतकर विपक्ष पार्टी बनने का दर्जा हासिल किया। पांच साल बाद इस संगठन ने निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ मिलकर 20 सीटें जीती। राष्ट्रपति होस्ने मुबारक को सत्ता से बाहर करने में भी अहम भूमिका निभाई थी।
2012 में मुस्लिम ब्रदरहुड की फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी (एफजेपी) ने निचले सदन यानी की पीपल्स असेंबली में लगभग आधी सीटें जीती। ऊपरी सदन यानी की शूरा काउंसिल में उसने 84 फीसदी सीटें अपने नाम कीं। मुबारक के हटने से ठीक पहले मुस्लिम ब्रदरहुड ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से मना कर दिया था, लेकिन बाद में उन्होंने खैरात-एल-शेतर का नाम आगे कर दिया। शेतर के आयोग्य ठहराए जाने के बाद मोहम्मद मोर्सी को राष्ट्रपति बनाया गया।
राष्ट्रपति अल-सीसी
- फोटो :
File
अल-सीसी सरकार ने उठाए अहम कदम
नए संविधान, जिसने कानून के आधार पर इस्लामी कानून को संस्थापित किया। इसने विवादों को जन्म देना शुरू कर दिया। मिस्र के पूर्व संविधान में एक समान सिद्धांत मौजूद थे। नए संविधान ने उदारवादियों के लिए चिंता जताई कि ब्रदरहुड लाइसेंस के तौर पर विश्व के सामने पेश करेगा। मोर्सी और न्यायपालिका के बीच 2013 मिस्र के लोगों को महिलाओं की सुरक्षा, भाषण और इबादत की स्वतंत्रता के लिए अपर्याप्त सुरक्षा की भी आशंका थी। उन्हें राष्ट्रपति को दी गई शक्तियों पर भरोसा नहीं था। मोर्सी और न्यायपालिका के बीच 2013 में भी संघर्ष जारी रहा। इस दौरान ब्रदरहुड की आलोचना करने वाले मिस्रवासी तामारोड (विद्रोह) का आगाज हुआ। हालांकि, सरकार ने मुस्लिम ब्रदरहुड को गैरकनूनी घोषित कर दिया।
2014 में राष्ट्रपति अब्देल-फतेह-अल-सीसी ने विपक्ष को दबाने के लिए अहम कदम उठाते हुए इस संगठन के हजारों नेता और सदस्यों को कैद में ले लिया। समूह के दान बंद करवा दिए गए। उनकी संपत्ति जब्त कर ली गई। कतर और तुर्की ने मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ संबंध विकसित किए और मिस्र के कई निर्वासित सदस्य उन देशों में बस गए हैं।
नए संविधान, जिसने कानून के आधार पर इस्लामी कानून को संस्थापित किया। इसने विवादों को जन्म देना शुरू कर दिया। मिस्र के पूर्व संविधान में एक समान सिद्धांत मौजूद थे। नए संविधान ने उदारवादियों के लिए चिंता जताई कि ब्रदरहुड लाइसेंस के तौर पर विश्व के सामने पेश करेगा। मोर्सी और न्यायपालिका के बीच 2013 मिस्र के लोगों को महिलाओं की सुरक्षा, भाषण और इबादत की स्वतंत्रता के लिए अपर्याप्त सुरक्षा की भी आशंका थी। उन्हें राष्ट्रपति को दी गई शक्तियों पर भरोसा नहीं था। मोर्सी और न्यायपालिका के बीच 2013 में भी संघर्ष जारी रहा। इस दौरान ब्रदरहुड की आलोचना करने वाले मिस्रवासी तामारोड (विद्रोह) का आगाज हुआ। हालांकि, सरकार ने मुस्लिम ब्रदरहुड को गैरकनूनी घोषित कर दिया।
2014 में राष्ट्रपति अब्देल-फतेह-अल-सीसी ने विपक्ष को दबाने के लिए अहम कदम उठाते हुए इस संगठन के हजारों नेता और सदस्यों को कैद में ले लिया। समूह के दान बंद करवा दिए गए। उनकी संपत्ति जब्त कर ली गई। कतर और तुर्की ने मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ संबंध विकसित किए और मिस्र के कई निर्वासित सदस्य उन देशों में बस गए हैं।