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Supreme Court: DMK कार्यकर्ता-वकील की हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, तमिलनाडु सरकार और DGP से मांगा जवाब
Sun, 02 Oct 2022 03:48 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sun, 02 Oct 2022 03:48 PM IST
सार
महिला ने याचिका में कहा है कि मृतक वकील की जाति और राजनीतिक आधार पर कुछ स्थानीय पुलिसकर्मियों के साथ पुरानी दुश्मनी थी। इसके चलते उसने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत एक स्थानीय अदालत में न्यायिक शिकायत दर्ज कराई थी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social media
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके के कार्यकर्ता और पेशे से वकील के राजकुमार की हत्या के मामले में तमिलनाडु सरकार और डीजीपी से जवाब तलब किया है। शीर्ष अदालत ने ये कार्यवाही मृतक वकील के राजकुमार की पत्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। गौरतलब है कि के राजकुमार की हत्या साल 2020 में कर दी गई थी और वे अनुसूचित जाति से संबंध रखते थे।
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न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने मृतक वकील के राजकुमार की पत्नी टी संध्या की याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान टी संध्या की ओर से पेश वरिष्ठ वकील के सुब्रमण्यम ने दलील दी कि मद्रास उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच के लिए उनकी याचिका को गलत तरीके से खारिज कर दिया था। मामले में दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि इश्यू नोटिस को चार सप्ताह में लौटाया जा सकता है।
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सुब्रमण्यम ने पिछले शुक्रवार को एक संक्षिप्त सुनवाई में आरोप लगाया था कि मृतक वकील अनुसूचित जाति समुदाय का था और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) से जुड़ा था। संध्या और उनके पति राजकुमार तमिलनाडु के तिरुवरूर अदालतों में अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस कर रहे थे।
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महिला ने याचिका में कहा है कि मृतक वकील की जाति और राजनीतिक आधार पर कुछ स्थानीय पुलिसकर्मियों के साथ पुरानी दुश्मनी थी। इसके चलते उसने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत एक स्थानीय अदालत में न्यायिक शिकायत दर्ज कराई थी। साथ ही उच्च अधिकारियों को भी अभ्यावेदन भेजा था।
इसके बाद कुछ पुलिसकर्मियों ने मामला वापस लेने के लिए उसे धमकाया भी। बावजूद इसके मृतक ने शिकायत वापस लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद 12 अक्टूबर, 2020 को जब वह तिरुवरूर जिले में फसलों को पानी देने के लिए अपने खेत में गया था तब रहस्यमय परिस्थितियों में रात को उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इसके बाद जब मृतक की पत्नी ने स्थानीय पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की तो पहले तो मामला दर्ज नहीं किया गया। बाद में जब मामला मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा तो पुलिस ने जल्दबाजी में आरोप पत्र दाखिल किया।
महिला के वकील ने कहा कि उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया कि स्थानीय पुलिस, जिसने हत्या में देर से प्राथमिकी दर्ज की थी, ने उच्च न्यायालय द्वारा याचिका पर ध्यान दिए जाने के बाद जल्दबाजी में आरोप पत्र दाखिल किया।वरिष्ठ वकील ने कहा कि मद्रास उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में मृतक की पत्नी संध्या द्वारा दायर रिट याचिका को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया, जो रिट याचिका की सुनवाई की तारीख को पहले ही दायर की गई थी।