Mumbai: पर्यावरण के लिए गैर-सरकारी संगठन का ऐतिहासिक अभियान, बीएमसी के साथ मिलकर समुद्र की रक्षा का दिया संदेश
मुंबई में भारतीय कोस्ट गार्ड, अर्थडे.ओआरजी और बीएमसी ने तटीय सफाई अभियान आयोजित किया। कार्यक्रम 'स्वच्छ तट, स्वच्छ समुद्र' थीम के तहत समुद्र और पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा पर जोर देता है। स्वयंसेवकों और अधिकारियों ने प्लास्टिक कचरा हटाया और शैक्षिक सत्रों में भाग लिया। अतीका फारूकी की कविता और पौधरोपण ने संदेश को भावनात्मक और स्थायी रूप दिया। यह अभियान अंतरराष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस के तहत आयोजित हुआ।
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विस्तार
कार्यक्रम के दौरान तीन मुख्य स्तंभों पर जोर दिया गया स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु शिक्षा, और वनरोपण और पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन। स्वयंसेवक, छात्र और कई अधिकारी मिलकर प्लास्टिक कचरा इकट्ठा करने और समुद्री संरक्षण पर शैक्षिक सत्रों में भाग लेने के लिए आए।
समुद्र साफ करने का दिया आदेश
इस कार्यक्रम के दौरान इंस्पेक्टर जनरल बिषम शर्मा ने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण हमारे समुद्रों को घेर रहा है और समुद्री जीवन को दम घोंट रहा है। कोस्ट गार्ड जागरूकता फैलाना जारी रखेगा और समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभाएगा।
वहीं, बीएमसी कमिश्नर डॉ. भूषण गाग्रानी ने कहा कि आज हम अपने समुद्र तटों के लिए समर्थन बढ़ा रहे हैं और सुनिश्चित करेंगे कि हमारे समुद्र और शहर स्वच्छ, सतत और सुदृढ़ बने रहें।
अतीका फारूकी ने सुनाई कविता
इस कार्यक्रम की विशेषता मीडिया हस्ती और कलाकार अतीका फारूकी का कविता पाठ था। उनकी कविता 'टियर्स ऑफ द सी' ने सभी को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। कविता में समुद्र को हमारे घर का बुज़ुर्ग बताते हुए उसकी सुरक्षा की अपील की गई। उन्होंने इन पंक्तियों के साथ काव्य पाठ किया।
इंसान भूल गया है…
समंदर सिर्फ खारा पानी नहीं।
हमारे घर का बुज़ुर्ग है,
जिसके पेट में ठूंस दिए गए हैं
हमारे घरों के कूड़ेदान, प्लास्टिक के ढेर,
केमिकल के दाग और गंदगी के ढेर।
आओ इज्जत दें अपने घर के बुज़ुर्ग को,
जो पी गए हमारे जुल्मों को,
फिर भी हमारी नस्लों को सींचेंगे।
और वही नहीं… इस शहर का कौन-सा वो गम है जो
समंदर किनारे बैठ के धुल नहीं जाता।
इनके साथ- अमीर हो या गरीब,
अपने दर्द में सम्भल नहीं आता।
ये समंदर तो बादलों का गीत है, इंसान का मीत है।
हर राज छुपा लेता है… यही इसकी रीत है।
इसी में तो हम भगवान डुबोते हैं,
इसी में तो हम अरजुएं बोते हैं।
कि नजर जाए जहां तक, मेरा आसमान हो वहां तक।
वरना अर्बनाइजेशन के इस दौर में सूरज-आसमान मांगने वाले हम कौन होते हैं।
इन जहरीली परतों को हटाओ,
तभी समंदर रहेगा साफ।
क्योंकि यही देता है नसीब की बारिशें,
मां की तरह है ये माफी मांग लो।
वरना बाप की तरह भी है… खुद जान लो।
यही समंदर देगा दुआ भी,
और यही समंदर देगा बददुआ भी।
इसमें भगवान भी समाते हैं,
और इंसान सुकून पाते हैं।
ये समंदर नहीं- जन्नत है।
कान बंद मत करना, समंदर को जरूर सुनना,
ये कह रहा है-
प्लास्टिक मेरा दुश्मन है,
इसे मेरे नजदीक न लाएं।
हम समंदर के नहीं,
समंदर हमारे हैं।
आज समुद्र के साथ हम सब
गुफ्तगू करने आए हैं।
पौधरोपण के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का समापन पौधरोपण के साथ हुआ, जो संदेश देता है कि छोटे या बड़े हर कदम से हमारी धरती को बचाया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस, हर सितंबर के तीसरे शनिवार को मनाया जाता है और यह समुद्र, नदियों और तटों से कचरा हटाने के लिए विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवक प्रयास है।
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