मुंबई निकाय चुनाव: उद्धव गुट को फायदा पहुंचाने के लिए प्रचार कर सकते हैं तेजस्वी, जानें क्या हैं समीकरण?
उद्धव गुट के नेता आदित्य ठाकरे के साथ बैठक के बाद अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव आगामी बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों में प्रचार कर सकते हैं।
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बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी याद आगामी बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए प्रचार कर सकते हैं। यह अटकलें तब सामने आईं जब आदित्य ठाकरे ने बुधवार को पटना में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से मुलाकात की और कई मुद्दों पर चर्चा की। आदित्य ठाकरे के पटना पहुंचने के बाद, अटकलें लगाई गईं कि वह 2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्षी एकता या गठबंधन पर बात करेंगे लेकिन वे बीएमसी चुनावों के बारे में अधिक चिंतित दिखे। अब समझिए आखिर इस बार उद्धव गुट को तेजस्वी और नीतीश कुमार की शरण में क्यों आना पड़ा। तो जान लीजिए सारा खेल वोट बैंक का है।
उत्तर भारतीय विरोधी छवि से उबरने की कोशिश
महाराष्ट्र में शिवसेना के निशाने पर अक्सर उत्तर भारतीय लोग रहे हैं। शिवसेना नेता कई बार बिहार और यूपी के छात्रों की पिटाई तो कई बार मजदूरों की पिटाई में शामिल रहे हैं। ऐसे में कहा जाए तो शिवसेना की छवि उत्तर भारतीय विरोधी बन गई है। लेकिन इस बार भाजपा के साथ गठबंधन नहीं होने और शिंदे गुट के अलग हो जाने से उद्धव ठाकरे को वोट बैंक खिसकने का डर सताने लगा है। ऐसे में उत्तर भारतीय वोट बैंक साधने के लिए तेजस्वी और नीतीश कुमार से बेहतर विकल्प फिलहाल नहीं हो सकता। ठाकरे गुट को उम्मीद है कि ये दोनों नेता अगर प्रचार करें तो कहीं न कहीं बिहार और यूपी के लोग उनके पक्ष में मतदान कर सकते हैं।
मुंबई में क्या हैं उत्तर-भारतीय वोटों के समीकरण?
बता दें कि मुंबई में करीब 40 लाख उत्तर भारतीय वोटर हैं। यानी वे मतदाता जो यूपी या बिहार के रहने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बीएमसी (BMC) में कुल 227 वार्ड हैं और इनमें से 40 पर तो उत्तर भारतीय मतदाताओं की ज्यादा पैठ है। इतना ही नहीं इन 227 में से 50 वार्डों पर तो यूपी-बिहार के वोटरों की पैठ है।