मुंबई हमले की 10वीं बरसी: यहूदियों के इस ठिकाने के बारे में नहीं जानती थी स्थानीय पुलिस
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मुंबई हमले की जब भी बात होती है ताज महल होटल, सीएसटी और लियोपोल्ड कैफे का नाम सबसे पहले आता है। लेकिन इन सबके बीच एक और नाम भी है जहां आतंकियों ने हमला किया था जिसके बारे में स्थानीय पुलिस को कोई जानकारी ही नहीं थी। 26/11 हमले के मद्देनजर जब कोलाबा स्थित यहूदियों के बारे में खत भेजा गया तो कोलाबा पुलिस का कहना था कि इस क्षेत्र में यहूदियों का कोई ठिकाना नहीं है।
मुंबई पर हुए हमले की रात मुंबई पुलिस अपनी पूरी ताकत के साथ सड़क पर थी। वह एक साथ कई जगहों पर मुस्तैद थी और जाबांजी से आतंकियों का मुकाबला कर रही थी कि तभी कोलाबा पुलिस स्टेशन में विदेश मंत्रालय से आए फोन ने सभी को चौंका दिया। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने निर्माण हाउस के चावड़ हाउस में फंसे यहूदियों और वीआईपी की मदद के लिए फोन किया।
चौंकाने वाली बात यह है कि स्थानीय पुलिस अधिकारी ही नहीं विदेश विभाग के लिए काम कर रहे विशेष ब्रांच के लोगों को भी कोलाबा स्थित इस जगह की जानकारी नहीं थी कि यहां कोई यहूदियों का बसेरा है। विदेश मंत्रालय ने पुलिस अधिकारियों को वहां पहुंच कर जांच करने और जवाब देने की बात कही।
अभी कोलाबा पुलिस अधिकारी इस जगह के बारे में ऊहा- पोह की स्थिति से जूझ रहे थे कि तभी एक इजरायली डिप्लोमैट कोलाबा पुलिस स्टेशन पहुंचा और उसने यहूदियों के इस सेटलमेंट एरिया पर हुए हमले की जानकारी दी। कोलाबा पुलिस जिसे सबसे पहले हमले की जानकारी रात 10 बजकर 17 मिनट पर मिली थी उन्हें यह नहीं पता था कि यह जगह निर्माण हाउस में ही है। मुंबई हमले के दौरान विदेश मंत्रालय को इजरायली दूतावास से हमले की खबर मिली थी, तब कोलाबा पुलिस स्टेशन में मौजूद वरिष्ठ विशेष पुलिस अधिकारी ने ताज के बजाय वहां जाने का फैसला लिया।
आखिरकार एसीपी इसाक इब्राहिम बागवां थे जिन्होंने लियोपोल्ड कैफे से कोलाबा बाजार जाने का फैसला लिया जहां जबरदस्त धमाके की आवाजें आई थीं। निर्माण हाउस पहुंचने में उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा क्योंकि वहां के स्थानीय लोग भी उस जगह के बारे में बहुत अच्छे से नहीं जानते थे। जब इसाक वहां पहुंचे तब उन्हें पता चल पाया कि वहां कुछ यहीदी आतंकियों के कब्जे में हैं। तब उन्होंने मदद के लिए और अधिकारियों को बुलाया और आस-पास रह रहे लोगों को जगह खाली करने को कहा।
पुलिस वाले बगल की इमारतों से निर्माण हाउस में मौजूद आतंकियों पर गालियां चलानी शुरू कीं। 27 की सुबह मोशे जो आतंकियों के कब्जे में था अपनी नैनी सांद्रा सैमुयल्स के साथ बाहर आया। 27 की दोपहर जबतक एनएसजी ने पूरा ऑपरेशन अपने कब्जे में नहीं ले लिया तब तक मुंबई पुलिस और आतंकियों के बीच गोलीबारी चलती रही। इस हमले में रब्बी गैवरिल और उसकी पत्नी रेविका के साथ पांच यहूदी इस हमले में मारे गए।
यह बात चौंकाती है कि 26\11 हमले से पहले यहूदियों को निशाना साधे जाने की सूचना तीन बार मुंबई पुलिस को दी गई थी। तब भी निर्माण हाउस को भी टार्गेट नहीं बनाया जा सकता है यह पुलिस नहीं सोच सकी। समिति के राम प्रधान का कहना है कि यह पूरे मामले को आर अच्छे से हैंडल किया जा सकता था लेकिन यहूदियों की बस्ती के बारे में न तो कोलाबा पुलिस को और न ही स्पेशल ब्रांच को ही निर्माण हाउस के बारे में जानकारी थी। 26 नवंबर के मुंबई हमले के बाद ही सरकार को इज्रायली अथॉरिटी से देशभर में ज्वीश सेंटर की जानकारी मिली जहां आज सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम हैं।