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Mukul Rohatgi: रोहतगी के दोबारा अटॉर्नी जनरल बनने की यह है कहानी, रहे हैं इस BJP नेता के सबसे करीबी

Tue, 13 Sep 2022 02:02 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Tue, 13 Sep 2022 02:02 PM IST
सार

Mukul Rohatgi: 66 साल के मुकुल रोहतगी के बारे में कहा जाता है कि रोहतगी की पकड़ सिर्फ भाजपा ही नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी में भी मजबूत है। यही वजह रही कि मुकुल रोहतगी 2011 से लेकर 2014 तक एडीशनल सॉलिसिटर जनरल भी रहे हैं...

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Mukul Rohatgi becoming Attorney General again, closest to BJP leader Arun Jaitley
Attorney General Mukul Rohatgi - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

देश के जाने-माने वकील मुकुल रोहतगी को एक बार फिर से अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया है। मुकुल रोहतगी भाजपा के कद्दावर नेताओं के न सिर्फ करीबी रहे हैं, बल्कि गुजरात दंगों के दौरान मुकुल रोहतगी ने गुजरात सरकार का सुप्रीम कोर्ट में पक्ष भी रखा था। मुकुल रोहतगी की दोबारा अटॉर्नी जनरल की ताजपोशी को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी तमाम तरीके के कयास लगाए जा रहे हैं। वहीं अगले तीन साल अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के लिए बहुत चुनौती भरे भी रहने वाले हैं। क्योंकि तकरीबन 400 मामले संवैधानिक बेंच में सुनवाई के लिए लगे हुए हैं। जिसमें मुकुल रोहतगी की महत्वपूर्ण भूमिका और जिम्मेदारी भी है।

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महंगे और कानून के जानकार वकीलों में होती है गिनती

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी भाजपा के चहेते वकील तो हैं ही, साथ ही देश के सबसे महंगे वकीलों में भी उनकी गिनती होती है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील बताते हैं कि शुरुआती दौर में मुकुल रोहतगी ने भाजपा के कद्दावर नेता रहे पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ में कानूनी दांव-पेंच सीखें हैं। सरकार के शीर्ष कानून अधिकारी के पद पर दोबारा पहुंचने वाले मुकुल रोहतगी के बारे में कहा जाता है कि रोहतगी सिर्फ भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के ही चहेते नहीं हैं, बल्कि देश के बड़े कारपोरेट घरानों के मुकदमों की भी पैरवी कर चुके हैं। हाल में सबसे ज्यादा चर्चित पैरवी मुकुल रोहतगी की फिल्म स्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को लेकर रही है।

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राजनीतिक हलकों में भी मुकुल रोहतगी की दोबारा ताजपोशी को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं। दरअसल ये चर्चाएं इसलिए सबसे ज्यादा हो रही हैं क्योंकि मुकुल रोहतगी ने 2002 के गुजरात दंगों और बेस्ट बेकरी, समीर जाहिरा शेख कांड और फर्जी मुठभेड़ मामले में गुजरात सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की है। विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि यही वजह है कि मुकुल रोहतगी भाजपा के नेताओं की पहली पसंद हैं और बड़े पद पर दोबारा पहुंचे हैं। मुकुल रोहतगी सिर्फ गुजरात सरकार के सुप्रीम कोर्ट में बड़े पैरोकार नहीं रहे हैं, बल्कि रोहतगी ने अंबानी भाइयों के बीच हुए गैस विवाद को लेकर उच्च न्यायालय में अनिल अंबानी की ओर से मुकदमे की पैरवी भी की थी। इसके अलावा रोहतगी इटली दूतावास के वकील भी रहे हैं। इटली दूतावास की ओर से दो इतालवी मरीन पर मछुआरों की हत्या के मामले का केस भी रोहतगी ने ही लड़ा था।

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यूपीए सरकार में भी रहे एडीशनल सॉलिसिटर जनरल

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के नजदीकी लोगों में शुमार किए जाने वाले मुकुल रोहतगी भाजपा नेताओं में अच्छी पकड़ भी रखते हैं। 66 साल के मुकुल रोहतगी के बारे में कहा जाता है कि रोहतगी की पकड़ सिर्फ भाजपा ही नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी में भी मजबूत है। यही वजह रही कि मुकुल रोहतगी 2011 से लेकर 2014 तक एडीशनल सॉलिसिटर जनरल भी रहे हैं। रोहतगी कई बड़े मामलों में पैरवी कर चर्चा में आए। जिसमें बेस्ट बेकरी केस, जाहिरा शेख, योगेश गौड़ा और जज लोया का मामला भी शामिल है।



सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्वनी उपाध्याय कहते हैं कि नए अटॉर्नी जनरल के लिए उनका कार्यकाल बहुत चुनौतियों भरा रहने वाला है। इसकी वजह बताते हुए उपाध्याय कहते हैं कि दरअसल 400 से ज्यादा मामले संवैधानिक बेंच में पेंडिंग हैं। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अब संवैधानिक बेंच लगातार इन पेंडिंग मामलों की सुनवाई करेगी। ऐसे में अटॉर्नी जनरल के लिए अगले तीन साल न सिर्फ महत्वपूर्ण होने वाले हैं बल्कि चुनौतियों भरे भी रहने वाले हैं। अश्वनी उपाध्याय कहते हैं कि अटॉर्नी जनरल खुद में एक इंडिपेंडेंट बॉडी भी होता है। इसलिए कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट सरकार की ओर से रखे जाने वाले पक्ष से इतर भी अटॉर्नी जनरल की राय को महत्वपूर्ण मानता है। अश्वनी उपाध्याय कहते हैं कि इस वक्त ईडब्ल्यूएस मामले के अलावा और भी कई महत्वपूर्ण मामले संवैधानिक बेंच में चल रहे हैं।

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