मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड: नागेश्वर राव को अवमानना का नोटिस, सुप्रीम कोर्ट में 12 को पेशी
- सुप्रीम कोर्ट ने केस को बिहार से दिल्ली ट्रांसफर किया
- बिहार सरकार की आलोचना की, कहा-बस बहुत हो गया
- एम नागेश्वर राव ने जांच अधिकारी का कर दिया था ट्रांसफर
- टिस्स की रिपोर्ट में हुआ था बालिका गृह कांड का खुलासा
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“We are going to take it very very seriously. You have played with order of Supreme Court of India. God help you. Never play with SCs order,”Chief Justice Ranjan Gogoi says after CBI counsel informed that 2 officials including M Nageswara Rao were involved in transferring Sharma. https://t.co/LSTnGwoJiY
— ANI (@ANI) February 7, 2019विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर बिहार आश्रय गृह मामलों की जांच कर रहे सीबीआई के अधिकारी एके शर्मा का तबादला करने पर सुप्रीम कोर्ट ने राव के प्रति कड़ा रूख अख्तियार किया है। कोर्ट ने सीबीआई के तत्कालीन अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव को अवमानना का नोटिस भेजा और 12 फरवरी को अपने समक्ष पेश होने को कहा।
मालूम हो कि पिछले साल अक्तूबर में सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच उपजे विवाद के बाद तत्कालीन संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक बनाया था।
Supreme Court seeks personal appearance on February 12 of former interim CBI director M Nageswara Rao and one other official, incharge of Director Prosecution, associated in the transfer of CBI officer AK Sharma probing Muzaffarpur shelter home case. pic.twitter.com/d3liyHqJ87
— ANI (@ANI) February 7, 2019
सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड केस की सुनवाई बिहार से नई दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। सुनवाई पटना से दिल्ली के साकेत पॉक्सो कोर्ट में ट्रांसफर की गई है। कोर्ट ने जज को आदेश दिया है कि दो हफ्ते के भीटर ट्रायल शुरू करें और 6 महीने के भीतर इसे खत्म करें।
बिहार सरकार को कहा- बस बहुत हो गया
आदेश में कहा गया है कि मुजफ्फरपुर यौन उत्पीड़न मामले से जुड़े दस्तावेजों को दो सप्ताह के भीतर बिहार सीबीआई अदालत से साकेत निचली अदालत में स्थानांतरित किया जाए को कहा गया है।इस दौरान कोर्ट ने आश्रय गृहों की देखभाल को लेकर बिहार सरकार की आलोचना की। कोर्ट ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन उत्पीड़न मामले में बिहार सरकार से कहा, बस बहुत हो गया, बच्चों के साथ ऐसा बर्ताव नहीं किया जा सकता।
सीबीआई को फटकार
कोर्ट ने कहा कि यदि राज्य सभी सूचनाएं मुहैया कराने में असफल रहा तो वह बिहार के मुख्य सचिव को समन कर सकता है। कोर्ट ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रहे अधिकारी का तबादला करने को लेकर सीबीआई को भी फटकार लगाई है।ये है पूरा मामला
बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह में 34 लड़कियों के साथ रेप का खुलासा होने के बाद ही राजनीतिक बहस तेज हो गई थी। इस कांड का खुलासा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सांइसेज(टिस्स) की रिपोर्ट में हुआ।
जब सरकार पर विपक्षी पार्टियों और लोगों का दबाव बढ़ा तो इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की गई। पिछले दिनों मुजफ्फरपुर के बालिका गृह से 15 साल की बच्ची का भी कंकाल मिला है। जिससे मामले में नया मोड़ आ गया है।